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इमरान खान के हक्कानी नेटवर्क वाले बयान पर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने ली चुटकी
Thu, 23 Jan 2020 07:25 PM IST
आसिम खान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: आसिम खान
Updated Thu, 23 Jan 2020 07:25 PM IST
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इमरान खान (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
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पाकिस्तान में हक्कानी समूह की मौजूदगी से प्रधानमंत्री इमरान खान के इनकार पर तंज करते हुए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ गनी ने गुरुवार को कहा कि यह इस दावे जैसा है कि पृथ्वी सूरज की परिक्रमा नहीं करती। गनी ने कहा कि वह अब भी इस मुद्दे पर पाकिस्तान से चल रही बातचीत में सफलता देखना चाहते हैं लेकिन अभी तक इस्लामाबाद से केवल कुछ ‘अच्छे बयान’ आए हैं।
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दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच 2020 की बैठक में बुधवार को अंतरराष्ट्रीय मीडिया परिषद (आईएमसी) से संवाद करते हुए इमरान ने कहा था कि अब उनके देश से हक्कानी नेटवर्क आतंकी गतिविधियों का संचालन नहीं करता।
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आईएमसी से गुरुवार को संवाद के दौरान गनी से जब इमरान के दावे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, वह यह भी कह सकते हैं कि धरती सूर्य की परिक्रमा नहीं करती। उन्होंने कहा कि यह अच्छा है कि इमरान खान ने यहां दावोस में बहुत अच्छा एजेंडा पेश किया लेकिन इस तरह का इनकार ठीक नहीं है।
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गनी ने कहा, मैंने अबतक सफलता नहीं देखी है। मैंने कुछ अच्छे बयान देखे हैं लेकिन नतीजे सामने नहीं आए हैं। अगर हक्कानी नेटवर्क वहां नहीं है तो फिर क्यों प्रधानमंत्री इमरान खान बंधकों को छुड़ाने का श्रेय ले रहे हैं। उन्होंने कहा, यह इनकार है जो ठीक नहीं है। हमें संवाद में शामिल होने की जरूरत है और यह अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए बेहतर है।
गनी ने कहा कि अफगानिस्तान के अधिकतर लोग मानते हैं कि देश सही दिशा में जा रहा है। अफगानिस्तान में संघर्ष विराम के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि किसी भी शांति समझौते में दुविधा होती है लेकिन इसके लिए लोगों को मनाने की जरूरत होती है।
अमेरिकी सैनिकों को हटाने के बारे में गनी ने कहा, हम आने वाले हफ्तों में वापस होने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या पर विस्तार से चर्चा करेंगे लेकिन अभी विचार है कि यह वापसी करीब 4,000 जवानों की होगी। समय और अन्य विस्तृत पहलुओं पर चर्चा की जरूरत है।
अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी सैनिकों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किए जाने के सवाल पर राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों पक्षों में यह आपसी समझ है कि इनका इस्तेमाल तीसरे देश के खिलाफ नहीं किया जा सकता। अगर जरूरत पड़ी तो उनके जमीनी ठिकाने बदले जा सकते हैं।