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अमेरिकी कांग्रेसनल रिपोर्ट: भारत का चाबहार बंदरगाह पर काम तेज, मई तक शुरू हो सकता है संचालन 

Sat, 10 Apr 2021 02:59 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 10 Apr 2021 02:59 AM IST
सार

  • सीआरएस ने कहा है कि ईरान के चाबहार बंदरगाह और रेलवे लाइन बिछाने के काम में मदद के लिए भारत 2015 में तैयार हो गया था
  • इस रेलवे लाइन से भारत को पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान से बेरोकटोक व्यापार करने में मदद मिलेगी

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Work on Indias Chabahar port intensifies, operations can start form May
चाबहार बंदरगाह - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

भारत में तेल आयात के लिए अहम ईरान के चाबहार बंदरगाह पर काम तेज हो गया है। अमेरिकी संसद में रखी गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने थोड़े ठहराव के बाद इस साल की शुरुआत से ही चाबहार बंदरगाह पर काम तेज कर दिया है और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस ईरानी बंदरगाह का संचालन अगले महीने तक शुरू होने की संभावना भी है। 

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अमेरिकी कांग्रेसनल रिपोर्ट के मुताबिक, इसका संचालन मई तक शुरू होने की संभावना
अमेरिकी सांसदों के लिए अपनी नई रिपोर्ट में कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) ने कहा है कि ईरान के चाबहार बंदरगाह और रेलवे लाइन बिछाने के काम में मदद के लिए भारत 2015 में तैयार हो गया था। इस रेलवे लाइन से भारत को पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान से बेरोकटोक व्यापार करने में मदद मिलेगी।
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करीब 100 पेज की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मई 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईरान गए और बंदरगाह तथा उससे संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 50 करोड़ डॉलर निवेश करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए।
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हालांकि ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान पर लगाए प्रतिबंधों के तहत भारत ने 2020 के अंत तक परियोजना पर काम रोक दिया। लेकिन सीआरएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने 2021 की शुरुआत में ही काम तेज कर दिया और बंदरगाह का संचालन मई 2021 तक शुरू होने की संभवना है।
 

पाक के बजाय भारत-ईरान रिश्ते ज्यादा अच्छे

स्वतंत्र संगठन सीआरएस की रिपोर्ट विशेषज्ञों ने तैयार की है और इसे भले ही अमेरिकी संसद की आधिकारिक रिपोर्ट नहीं माना जाए लेकिन इसे बेहद अहम माना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की अर्थव्यवस्था दक्षिण एशिया में उसके निकटतम पड़ोसियों से जुड़ी हुई है।

जबकि ईरान के आर्थिक रिश्ते पाकिस्तान की तुलना में भारत के साथ ज्यादा बेहतर रहे हैं। 2016 में प्रतिबंधों में ढील मिलने पर ईरान ने भारत ने जुलाई 2018 में आठ लाख बीपीडी तेल का आयात किया जो किसी भी अन्य देश से बहुत ज्यादा है। हालांकि 2019 के बाद भारत ने ईरान से तेल आयात नहीं किया।

चीन पर अविश्वास के चलते मजबूत हुआ क्वाड

अमेरिकी संसद में पेश कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की भूमिका पर अविश्वास ने क्वाड गठबंधन को मजबूत बनाया है। इसमें ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका शामिल हैं।

2017 में ट्रंप प्रशासन ने क्वाड संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश की, उसके बाद इस साल बाइडन प्रशासन ने इसे अपनाया और डिजिटल बैठक की। रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च प्रौद्योगिकी उत्पादों में इस्तेमाल सामग्री पर चीन का एकाधिकार कम करने की योजना तथा पेरिस समझौते को मजबूत करने के लिए यह कदम आपसी सहयोग की दिशा में एक नया अध्याय शुरू कर सकता है।

ईरान से परोक्ष वार्ता रचनात्मक और व्यावहारिक: अमेरिका

अमेरिकी संसद में पेश सीआरएस रिपोर्ट के साथ ही अमेरिका ने ईरान के साथ विएना में होने वाली परोक्ष वार्ता को रचनात्मक और व्यावहारिक कहकर रिश्ते आगे बढ़ाने की पहल की है। विशेष अमेरिकी दूत रॉब माले के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ईरान के साथ परोक्ष वार्ता कर रहा है।

इसकी मध्यस्थता यूरोपीय संघ कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, हम दो मुद्दों पर वार्ता कर रहे हैं। पहला- ईरान परमाणु समझौते में अमेरिका की वापसी के लिए और दूसरा ईरान को प्रतिबंधों से राहत देने के लिए। उन्होंने कहा, यह वार्ता रचनात्मक है लेकिन परोक्ष होने के कारण इसकी प्रक्रिया कठिन होगी। हम भी उम्मीदों को आगे बढ़ाने की जल्दबाजी नहीं करेंगे। हालांकि प्राइस ने इस परोक्ष वार्ता को व्यावहारिक कहा है।

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