Afghan Taliban: अफगान तालिबान के खिलाफ फिर पाकिस्तान को मोहरा बनाएगा अमेरिका?
Afghan Taliban: हाल में पाकिस्तान में भी अफगानिस्तान की हालत और तालिबान के रुख को लेकर चिंता बढ़ी है। पाकिस्तान सरकार के एक हिस्से में यह राय बनी है कि तालिबान अपने कट्टरपंथी रूप में लौट रहा है। इस तरह वह उन वायदों से मुकर रहा है, जो उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से किए थे...
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अफगानिस्तान के तालिबान शासन को घेरने की अपनी रणनीति में अमेरिका एक बार फिर पाकिस्तान को अपना केंद्र बनाने की कोशिश में है। ऐसे संकेत कुछ समय पहले से मिल रहे थे, लेकिन अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि थॉमस वेस्ट की मौजूदा पाकिस्तान यात्रा ने इस बात की लगभग पुष्टि कर दी है।
अमेरिका का आरोप है कि लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगा कर तथा कुछ दूसरे कदमों के साथ तालिबान दोहा समझौते से पीछे हट गया है। अपना यही तर्क अमेरिका अब अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों के सामने रख रहा है। थॉमस वेस्ट ने यहां सोमवार को पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ कई बैठकें की। खास कर पाकिस्तान के विदेश सचिव असद माजिद के साथ उनकी बैठक अहम रही। वेस्ट अफगान मामलों में अमेरिका के प्वाइंट पर्सन (मुख्य संपर्क अधिकारी) हैं।
हाल में पाकिस्तान में भी अफगानिस्तान की हालत और तालिबान के रुख को लेकर चिंता बढ़ी है। पाकिस्तान सरकार के एक हिस्से में यह राय बनी है कि तालिबान अपने कट्टरपंथी रूप में लौट रहा है। इस तरह वह उन वायदों से मुकर रहा है, जो उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से किए थे। इसके अलावा आतंकवादी गुट तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को अफगानिस्तान में मिले संरक्षण से भी पाकिस्तान में नाराजगी पैदा हुई है। समझा जाता है कि इस कारणों से अमेरिका में यह राय बनी है कि अब पाकिस्तान उसकी अफगान रणनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकता है।
जब अमेरिकी दूत पाकिस्तान में हैं, तभी सोमवार को पेशावर में एक मस्जिद पर घातक आतंकवादी हमला हुआ। इसमें 60 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर पुलिसकर्मी बताए जाते हैं। टीटीपी ने इस फिदायीन हमले की जिम्मेदारी स्वीकार की है। यह हमला पुलिस लाइन एरिया में किया गया, जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहते हैं। लेकिन फियादीन इस इंतजामिया घेरे को तोड़ने में कामयाब रहे। इस हमले के बाद एक बार फिर से पाकिस्तान सरकार के सूत्रों ने आरोप लगाया कि अफगान तालिबान ने टीटीपी को संरक्षण दे रखा है। इसलिए वह ऐसे हमले बेखौफ होकर कर पा रहा है।
लेकिन अफगान तालिबान ने पेशावर में हुए हमले की तुरंत निंदा की। उसने कहा कि मस्जिद पर हमले को किसी रूप में वाजिब नहीं ठहराया जा सकता। पर्यवेक्षकों के मुताबिक यह संभवतया पहला मौका है, जब अफगान तालिबान ने उस हमले की खुलेआम निंदा की है, जिसकी जिम्मेदारी टीटीपी ने ली है। इसके बावजूद यह उम्मीद नहीं है कि अफगानिस्तान में टीटीपी के अड्डों पर कोई ठोस कार्रवाई की जाएगी।
थॉमस वेस्ट ने अफगान तालिबान की हालिया गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने यहां कहा कि अमेरिका तालिबान की जनता की सहायता करने के साथ-साथ अपने हितों की रक्षा करना चाहता है। उन्होंने कहा कि इस मकसद के लिए अमेरिका क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के साथ मिल कर एकजुट कदम उठाने के पक्ष में है।
समझा जाता है कि वेस्ट ने पाकिस्तानी अधिकारियों से इस मामले में केंद्रीय भूमिका निभाने का अनुरोध किया है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता के बीच पाकिस्तान सरकार अमेरिकी प्रस्ताव को ठुकरा पाएगी, इसकी संभावना कम है।