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Hindi News ›   World ›   Why Is Pakistan Panicking Over the Indus Waters? Is a Major Water Crisis Looming?

Explainer: सिंधु के पानी के लिए क्यों बौखलाया पाकिस्तान, क्या दाने-दाने को होने वाला है मोहताज?

Sat, 04 Jul 2026 06:04 AM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Sat, 04 Jul 2026 06:04 AM IST
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सार
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि निलंबित किए जाने से भारत-पाकिस्तान के बीच जल विवाद और गहरा गया है। पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है, जबकि भारत अपने फैसले पर कायम है। दूसरी ओर, पाकिस्तान पहले से ही गंभीर जल संकट, कृषि पर बढ़ते खतरे और प्रांतों के बीच पानी के विवाद का सामना कर रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं।
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Why Is Pakistan Panicking Over the Indus Waters? Is a Major Water Crisis Looming?
पाकिस्तान का हाल बेहाल - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सिंधु के पानी के लिए पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ती जा रही है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। अगल-अलग जगह गुहार लगाने के बाद भी पाकिस्तान को कोई मदद नहीं मिली। भारत अपने रुख पर अड़ा रहा। अब इसको लेकर पाकिस्तान की बेचैनी इतनी बढ़ चुकी है कि वहां के नेता भारत को गीदड़ भभकियां देने पर उतर आए हैं। 

 
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सिंधु जल संधी क्या है? इसे लेकर क्यों विवाद हो रहा है? भारत ने क्या रुख अपनाया? पाकिस्तान कहां-कहां गुहार लगा चुका है? पाकिस्तान में पानी को लेकर क्या हालात हैं?

सबसे पहले जानें अभी क्या हुआ है?

पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने हाल ही में कहा कि सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर दावा करने वाले हाथ काट दिए जाएंगे। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी कह चुके हैं कि यदि देश की जल सुरक्षा को खतरा हुआ तो पाकिस्तान भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तक कर सकता है।

वहीं, पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने दावा किया कि सिंधु जल संधि अब भी प्रभावी है और भारत द्वारा इसे निलंबित करने के फैसले को किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वीकार नहीं किया गया है। पाकिस्तान के पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने परमाणु सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि अगर उसके जल अधिकारों को कमजोर करने या पानी रोकने की कोशिश की गई, तो इसे देश के 'राष्ट्रीय अस्तित्व' पर हमला माना जाएगा और इसके जवाब में उचित राष्ट्रीय प्रतिक्रिया दी जाएगी।

पी. हरीश
पी. हरीश - फोटो : अमर उजाला

भारत ने पाकिस्तान की धमकी का कैसे जवाब दिया?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान को सीमा-पार आतंकवाद को अपना समर्थन भरोसेमंद और पक्के तौर पर छोड़ना होगा।
संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के आरोपों का जवाब दिया। भारत ने कहा कि 1960 में संधि लागू होने के बाद से पाकिस्तान ने तीन युद्ध और हजारों आतंकी हमलों के जरिए इस समझौते की भावना का लगातार उल्लंघन किया है। भारत के प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा कि भारत हमेशा एक जिम्मेदार देश की तरह व्यवहार करता रहा, जबकि पाकिस्तान ने आतंकवाद को बढ़ावा देकर संधि की मूल भावना को कमजोर किया। भारत ने यह भी दोहराया कि सीमा पार आतंकवाद पर विश्वसनीय और स्थायी कार्रवाई होने तक सिंधु जल संधि को निलंबित रखने का फैसला जारी रहेगा।

सिंधु जल संधि
सिंधु जल संधि - फोटो : Amar Ujala

आखिर क्या है सिंधु नदी जल संधि?

  • भारत और पाकिस्तान के बीच में सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर 1960 को कराची में हस्ताक्षर हुए थे। समझौता सिंधु नदी और इसकी सहायक नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर हुआ था। 
  • विश्व बैंक की पहल के बाद समझौते के लिए भारत-पाकिस्तान के बीच अलग-अलग स्तर पर नौ साल तक बात चली थी। 
  • भारत की तरफ से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान की तरफ से राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान ने संधि पर हस्ताक्षर किए थे।

भारत ने संधि निलंबित क्यों की?

यह संधि कई युद्धों और दशकों तक चले तनाव के बावजूद कायम रही, लेकिन 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए। इन्हीं में एक बड़ा फैसला 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करना था। पीएम मोदी ने साफ कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। भारत ने कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय और स्थायी रूप से समाप्त नहीं करता, तब तक संधि निलंबित रहेगी। वहीं, पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। इसके बाद से पाकिस्तान लगातार भारत के इस फैसले का विरोध करता रहा है और सीमा पार पानी के प्रवाह में किसी भी बदलाव की कोशिश के खिलाफ चेतावनी देता रहा है।

हर जगह हाथ फैलता पाकिस्तान
हर जगह हाथ फैलता पाकिस्तान - फोटो : Amar Ujala

क्या अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण जा सकता यह विवाद?

भारत का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ले जाने का प्रस्ताव सिंधु जल संधि के अनुच्छेद IX के तहत विवाद निपटान तंत्र का उल्लंघन है। इस संधि के अंतर्गत अगर कोई विवाद उभरता है तो उसे सुलझाने के लिए तीन स्तरीय तंत्र पहले से स्थापित है। ऐसे विवादों को पहले दोनों देशों के बीच स्थापित सिंधु आयोग में परखा जाएगा। यहां हल न होने की स्थिति में विवाद को विश्व बैंक की तरफ से नियुक्त तटस्थ विशेषज्ञों के पास भेजा जाएगा। अगर यहां भी कोई हल नहीं होता है, तब इस मामले को हेग स्थित न्यायाधिकरण ले जाया जा सकता है।

जल संकट
जल संकट - फोटो : Amar Ujala

पाकिस्तान में जल संकट कितना गंभीर हो चुका?

पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। खासकर सिंध और बलूचिस्तान के कई हिस्सों में पानी की भारी कमी देखी जा रही है। इन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। कई किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी, तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। जल संकट का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लाखों लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।

सुक्कुर बैराज में पानी की कमी क्यों बढ़ा रही है चिंता?

सिंधु नदी पर बना सुक्कुर बैराज पाकिस्तान की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक है। यह सिंध और बलूचिस्तान के लाखों एकड़ खेतों को पानी उपलब्ध कराता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64.1 प्रतिशत, राइस कैनाल में 38 प्रतिशत और दादू कैनाल में 82 प्रतिशत तक पानी की कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो पाकिस्तान के कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

क्या पाकिस्तान के भीतर भी पानी को लेकर विवाद बढ़ रहा?

जल संकट के बीच पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों के बीच भी विवाद बढ़ने लगा है। सिंध प्रांत ने पंजाब पर अपने हिस्से से अधिक पानी लेने का आरोप लगाया है। सिंध का कहना है कि ऊपरी क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा पानी रोके जाने के कारण निचले इलाकों में हालात और खराब हो गए हैं। इससे न केवल जल संकट गहरा रहा है, बल्कि राजनीतिक तनाव भी बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पानी के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बनी, तो पाकिस्तान को आंतरिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

सिंधु नदी पर कितना निर्भर है पाकिस्तान?

  •  पानी का बंटवारा- सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को 80% और भारत को 20% पानी आवंटित किया गया।
  • खेती की रीढ़- पाकिस्तान की 90% कृषि भूमि (करीब 4.7 करोड़ एकड़) की सिंचाई सिंधु नदी प्रणाली के पानी से होती है।
  • अर्थव्यवस्था पर असर- पाकिस्तान की राष्ट्रीय आय (GDP) में कृषि की हिस्सेदारी 23% है और 68% ग्रामीण आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है।
  • बिजली संकट का खतरा- मंगल और तारबेला हाइड्रोपावर डैम में पानी की कमी से बिजली उत्पादन 30% से 50% तक घटने की आशंका है।
  • उद्योग और रोजगार पर प्रभाव- पानी और बिजली की कमी से औद्योगिक उत्पादन, रोजगार और पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
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