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अमेरिका के न्यूनतम वैश्विक टैक्स रेट पर चीन की चुप्पी के मायने क्या हैं?
Fri, 09 Apr 2021 02:43 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 09 Apr 2021 02:43 PM IST
सार
हांगकांग दुनिया का सातवां सबसे बड़ा टैक्स हैवेन (जहां टैक्स दर बहुत कम है) है। एशिया का वह सबसे बड़ा टैक्स हैवेन है। चीन में आने वाला लगभग 70 फीसदी विदेशी निवेश हांगकांग के जरिए आता है...
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चीनी स्टॉक मार्केट
- फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
दुनिया में इनकम और कॉरपोरेट टैक्स की एक न्यूनतम दर तय करने के अमेरिकी प्रस्ताव पर चीन की प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। ये आम समझ है कि चीन के इस प्रस्ताव पर राजी हुए बिना अमेरिका अपने इस मकसद में कामयाब नहीं हो पाएगा। विश्लेषकों का कहना है कि सैद्धांतिक रूप में इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेने में चीन को ज्यादा दिक्कत नहीं होगी, लेकिन इसके बदले मुमकिन है कि वह अमेरिका से कड़ी सौदेबाजी करे। कुछ जानकारों का कहना है कि चीन इस प्रस्ताव पर रजामंदी देने के एवज में अमेरिका से उसके उत्पादों पर डोनाल्ड ट्रंप के दौर में अमेरिका में लगाए गए अतिरिक्त शुल्कों को हटाने की मांग कर सकता है।
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चीन ने अब तक इस मामले में सतर्क रुख अपनाए रखा है। वैश्विक न्यूनतम टैक्स दर के हांगकांग पर संभावित असर को लेकर वह जरूर चिंतित हो सकता है। थिंक टैंक टैक जस्टिस नेटवर्क के मुताबिक हांगकांग दुनिया का सातवां सबसे बड़ा टैक्स हैवेन (जहां टैक्स दर बहुत कम है) है। एशिया का वह सबसे बड़ा टैक्स हैवेन है। चीन में आने वाला लगभग 70 फीसदी विदेशी निवेश हांगकांग के जरिए आता है। यहां रजिस्टर्ड कंपनियों को हांगकांग की बेहद कम दर पर कॉरपोरेट टैक्स चुकाना पड़ा है। अगर यहां टैक्स दरें बढ़ीं, तो बहुत से कंपनियों की नजर में निवेश आकर्षक जगह नहीं रह जाएगा।
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हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक बीजिंग में पत्रकारों ने अमेरिकी प्रस्ताव पर चीन के वित्त मंत्रालय की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की। लेकिन फैक्स से भेजे गए सवालों का मंत्रालय ने कोई जवाब नहीं दिया। वैसे जी-20 समूह के वित्त मंत्रियों ने बुधवार को एक वर्चुअल बैठक में अमेरिकी प्रस्ताव का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि वे इस साल के मध्य तक इस मामले में आम सहमति से किसी समाधान तक पहुंचने के लिए वचनबद्ध हैं।
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इस बीच धनी देशों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकॉनमिक को-ऑपरशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) से जुड़े सेंटर फॉर टैक्स पॉलिसी एंड एडमिनिस्ट्रेशन के निदेश पास्कल सेंट अमान्स ने कहा है कि वैश्विक न्यूनतम कर दर तय करने को लेकर बातचीत 2012 से ही चल रही है। इसमें 139 देश भाग ले चुके हैँ। उन्होंने कहा कि हालांकि चीन ओईसीडी का सदस्य नहीं है, इसके बावजूद वह इस बातचीत में पूरी तरह शामिल रहा है। सेंट अमान्स ने कहा कि ये बात हर कोई जानता है कि अगर इस मामल में सहमति नहीं बनी, तो उसका मतलब अफरातफरी होगा। उसका मतलब व्यापार युद्ध होगा, जो कोई नहीं चाहता।
फ्रांस के कॉरपोरेट इन्वेस्टमेंट बैंक नैटिक्सिस की मुख्य अर्थशास्त्री एलिसिया गार्सिया- हेरेरो ने कहा है कि अगर अमेरिका 21 फीसदी न्यूनतम कॉरपोरेट टैक्स रेट प्रस्तावित करता है, तो उस पर चीन को कोई दिक्कत नहीं होगी। चीन में अभी आधिकारिक रूप से कॉरपोरेट टैक्स रेट 25 फीसदी है। एलिसिया- गार्सिया ने ध्यान दिलाया कि टैक्स हैवेन चीन के लिए भी समस्या हैं। लेकिन यह जरूर है कि तब हांगकांग में कंपनी रजिस्टर करने के बाद चीन में निवेश आकर्षक नहीं रह जाएगा। अभी हांगकांग में रजिस्टर्ड कंपनी के पहले 20 लाख हांगकांग डॉलर के मुनाफे पर 8.25 फीसदी टैक्स लगता है। उसके बाद के तमाम मुनाफे पर 16.5 फीसदी की दर से कॉरपोरेट टैक्स लगता है।
चीन की रेनमिन यूनिवर्सिटी झाओ शिजुन ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से बातचीत में ध्यान दिलाया है कि अमेरिका ने अपने यहां जो टैक्स प्रस्ताव रखा है, उसे अभी अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी नहीं मिली है। वहां क्या होगा, ये अनिश्चित है। जहां तक चीन का संबंध है तो चीन उस पर सहमत होने के बदले व्यापार शुल्कों में कटौती की शर्त अमेरिका के सामने रख सकता है।