Monkeypox Outbreak: कई देशों में तेजी से बढ़ रहे मंकीपॉक्स के मामले, डब्ल्यूएचओ ने बुलाई आपात बैठक
Monkeypox Outbreak: मई की शुरुआत से अब तक मंकीपॉक्स के मामले कई देशों में मिल चुके हैं। इन देशों में यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, बेल्जियम, इटली, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा शामिल हैं।
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Monkeypox Outbreak: दुनिया के कई देशों में मंकीपॉक्स के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आपात बैठक बुलाने का फैसला किया है। रूसी मीडिया ने बताया कि डब्ल्यूएचओ मंकीपॉक्स वायरस को लेकर काफी चिंतित है। माना जा रहा है कि बैठक में मुख्य रूप से वायरस के ट्रांसमिशन के तरीकों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, समलैंगिक और उभयलिंग लोगों में इसके प्रसार के अलावा वैक्सीन को लेकर भी बातचीत की जाएगी। यह जानकारी स्पूतनिक न्यूज एजेंसी ने शुक्रवार (20 मई) को दी।
फ्रांस पहुंचा मंकीपॉक्स
फ्रांस में शुक्रवार को मंकीपॉक्स का पहला मामला दर्ज किया गया। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक दिन पहले मरीज पर पीसीआर परीक्षण के बाद मामले की पुष्टि की। जानकारी के मुताबिक, मरीज इले-डी-फ्रांस क्षेत्र में रहने वाला एक 29 वर्षीय व्यक्ति है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसकी हालत गंभीर और चिंताजनक नहीं है, इसलिए वह अपने घर पर आइसोलेशन में है।
कई देशों में मिले मामले
बता दें कि मई की शुरुआत से अब तक मंकीपॉक्स के मामले कई देशों में मिल चुके हैं। इन देशों में यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, बेल्जियम, इटली, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा शामिल हैं। सात मई को इंग्लैंड में भी मंकीपॉक्स के मामले की पुष्टि हुई थी। बताया गया था कि पीड़ित शख्स हाल ही में नाइजीरिया से लौटा था।
अमेरिका में मिल चुका है मामला
18 मई को अमेरिका के मैसाचुसेट्स के स्वास्थ्य विभाग ने मंकीपॉक्स का पहला मामला मिलने की पुष्टि की। पीड़ित शख्स कुछ समय पहले ही कनाडा से लौटा था। विदेशी मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, इन मामलों से फिलहाल कोई खतरा नहीं है। संक्रमित शख्स को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वह ठीक है।
इन लक्षणों से पीड़ित हो रहे लोग
जानकारी के मुताबिक, मंकीपॉक्स बेहद दुर्लभ, लेकिन काफी गंभीर वायरस है, जिसके शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे होते हैं। साथ ही, चेहरे और शरीर पर चकत्ते पड़ जाते हैं। पिछले दो-चार सप्ताह के दौरान मरीजों में इसी तरह के लक्षण देखे गए हैं। अफ्रीका के पश्चिमी और मध्य इलाकों में भी मंकीपॉक्स के मामले मिले हैं। माना जा रहा है कि पीड़ित लोग बंदर आदि जानवरों के संपर्क में आए, जिसके चलते उनके शरीर पर काटने और खरोंच के निशान पाए गए।
इसलिए कहते हैं मंकीपॉक्स
रोडेंट्स कहे जाने गिलहरी, चूहे जैसे जीवों से यह मानव में आता है। मध्य और पश्चिमी अफ्रीका में यह सैकड़ों से हजारों लोगों में फैलता रहा है। इसे पहली बार 1958 में पहचाना गया, चूंकि शोध के दौरान पहली बार इसकी पहचान बंदरों में हुई इसलिए इसे मंकीपॉक्स नाम मिला। मानव में यह पहली बार 1970 में कॉन्गो में दर्ज किया गया।
अफ्रीका में हजारों संक्रमित
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार करीब 12 अफ्रीकी देशों में हर साल हजारों लोग मंकीपॉक्स से संक्रमित होते हैं। अकेले कॉन्गो में 6 हजार और नाइजीरिया में 3 हजार मामले आते हैं। वास्तविक मामले कहीं अधिक हो सकते हैं, जो निगरानी की कमी से दर्ज नहीं हो पाते। अब तक अफ्रीका के बाहर यह दुर्लभ मामलों में ही नजर आया। 2003 में अमेरिका के 6 राज्यों में 47 लोगों को मंकी पॉक्स हुआ। यह संक्रमण प्रेरी डॉग (एक प्रकार की गिलहरी) के संपर्क में आने से हुआ, जो घाना से लाए जीवों के साथ रखी गई थी। अब यूरोप में इसके 100 से ज्यादा संक्रमित मिल चुके हैं। कनाडा, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी मरीज मिले हैं।
जीवों के अलावा शारीरिक संबंध भी वजह
ब्रिटिश स्वास्थ्य एजेंसी ने दावा किया है कि इसकी प्रमुख वजह समलैंगिक संबंध हो सकते हैं। पुर्तगाल में तो यौन-स्वास्थ्य क्लीनिक से ही यह केस बढ़े। लंदन इंपीरियल कॉलेज के विषाणु विज्ञानी माइकल स्किनर का मनाना है कि यौन-संपर्क के दौरान यह फैल सकता है। लंदन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ फ्रेंकोइस ने इसके फैलने में यौन संबंध को प्रमुख वजह बताई।