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₹900 करोड़ की दौलत, राष्ट्रपति ट्रंप के बेहद करीबी: कौन हैं केविन वार्श, जो बने फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष?

Thu, 14 May 2026 02:06 AM IST
राकेश कुमार पीटीआई, वाशिंगटन।
पीटीआई, वाशिंगटन। Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 14 May 2026 02:06 AM IST
सार

केविन वार्श की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी मौद्रिक नीति की दिशा बदलने का एक बड़ा दांव है। क्या वे ट्रंप की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे या केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को बरकरार रखेंगे? पूरी दुनिया की नजरें अब वार्श के पहले बड़े फैसले पर टिकी हैं।

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केविन वार्श, फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका की तिजोरी की चाबी अब एक ऐसे शख्स के हाथ में है, जिसके पास न सिर्फ रसूख है, बल्कि बेहिसाब दौलत भी। अमेरिकी सीनेट ने केविन वार्श के नाम पर मुहर लगाकर उन्हें दुनिया के सबसे ताकतवर केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का नया अध्यक्ष चुन लिया है। 56 साल के वार्श सिर्फ एक बैंकर नहीं, बल्कि वॉल स्ट्रीट के वो 'गोल्डन बॉय' हैं जिनकी जड़ें सत्ता के गलियारों से लेकर अरबों डॉलर के बिजनेस साम्राज्यों तक फैली हैं। वे महज 35 साल की उम्र में फेड के सबसे युवा गवर्नर बने थे। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था महंगाई और युद्ध के साये में है।
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कौन हैं वॉल स्ट्रीट का 'गोल्डन बॉय' केविन वार्श?
केविन वार्श का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। न्यूयॉर्क के अल्बानी में जन्मे वार्श ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड लॉ स्कूल जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से शिक्षा प्राप्त की। वे महज 35 साल की उम्र में फेडरल रिजर्व के गवर्नर बन गए थे, जो अमेरिकी इतिहास में एक रिकॉर्ड है। लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक बैंकर की नहीं, बल्कि एक ऐसे रणनीतिकार की है जिसके तार राजनीति और बेतहाशा दौलत, दोनों से जुड़े हैं। केविन वार्श की नियुक्ति के पीछे तीन बड़े पहलू हैं, जो उन्हें विवादों के केंद्र में रखते हैं।
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900 करोड़ रुपये से अधिक की निजी संपत्ति
वार्श के पास लगभग 100 मिलियन डॉलर करीब 900 करोड़ रुपये से अधिक की निजी संपत्ति है। उनके निवेश एलन मस्क की स्पेसएक्स, प्रेडिक्शन मार्केट प्लेटफॉर्म पॉलीमार्केट और कई एआई स्टार्टअप्स में हैं। सीनेट में उन पर आरोप लगे कि इतने बड़े निवेशों के साथ वे निष्पक्ष फैसले कैसे लेंगे? हालांकि उन्होंने वादा किया है कि वे पद संभालने के 90 दिनों के भीतर अपने सारे शेयर बेच देंगे, लेकिन विपक्ष उन्हें वॉल स्ट्रीट का दलाल कहकर निशाना बनाता रहा है।
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अरबपति पत्नी और ट्रंप से कनेक्शन
वार्श की शादी जेन लॉडर से हुई है, जो मशहूर कॉस्मेटिक्स कंपनी एस्टी लॉडर की वारिस हैं। जेन की अपनी निजी संपत्ति 18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है।जेन के पिता रोनाल्ड लॉडर, डोनाल्ड ट्रंप के पुराने और करीबी दोस्तों में गिने जाते हैं। यही कारण है कि वार्श की नियुक्ति को योग्यता से ज्यादा पारिवारिक रसूख और ट्रंप की निजी पसंद के तौर पर देखा जा रहा है।

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'इंडिपेंडेंट' या ट्रंप के 'कठपुतली'?
वार्श ने 2011 में फेड के गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया था क्योंकि वे तत्कालीन नीतियों के सख्त खिलाफ थे। अब वे सत्ता परिवर्तन के वादे के साथ लौटे हैं।विपक्षी सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने उन्हें ट्रंप का 'सॉक पपेट' यानी कठपुतली कहा है। आरोप है कि ट्रंप ने उन्हें इसलिए चुना ताकि वे राष्ट्रपति के इशारे पर ब्याज दरें कम कर सकें, भले ही इससे महंगाई बढ़ जाए।

ट्रंप ने उन्हें क्यों चुना?
अमेरिकी राष्ट्रपि डोनाल्ड ट्रंप और निवर्तमान फेड प्रमुख जेरोम पॉवेल के बीच तल्खी जगजाहिर है। ट्रंप ने वार्श को चुनकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे फेडरल रिजर्व में 'सत्ता परिवर्तन' चाहते हैं।

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद: ट्रंप खुलेआम कह चुके हैं कि उन्हें ऐसा फेड अध्यक्ष चाहिए जो शेयर बाजार चढ़ने पर ब्याज दरें कम करे। व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट के अनुसार, बाजार को उम्मीद है कि वार्श समय के साथ दरों में कटौती करेंगे।

वफादारी का सवाल: विपक्षी डेमोक्रेट्स ने वार्श की आलोचना करते हुए उन्हें ट्रंप का कठपुतली तक कह दिया है। हालांकि, वार्श ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ट्रंप ने उन पर दरों को लेकर कभी दबाव नहीं बनाया और वे एक स्वतंत्र अध्यक्ष के रूप में काम करेंगे।  केविन वार्श के लिए यह सफर आसान नहीं होने वाला है। उनके सामने दो मुख्य चुनौतियां हैं। 


क्या है चुनौतियां?
महंगाई की मार:
अमेरिका में महंगाई का लक्ष्य दो फीसदी है, लेकिन पिछले पांच वर्षों से यह इसके ऊपर बनी हुई है। ईरान युद्ध के कारण गैस की कीमतों में 50% का उछाल आया है, जिससे अप्रैल में महंगाई 3.8% तक पहुंच गई। वार्श को तय करना होगा कि वे दरें घटाकर ट्रंप को खुश करेंगे या बढ़ाकर महंगाई रोकेंगे।

शक्ति के दो केंद्र: निवर्तमान अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने पद छोड़ने के बाद भी फेड बोर्ड में बने रहने का फैसला किया है। यह 1948 के बाद पहली बार होगा कि कोई पूर्व अध्यक्ष बोर्ड में रहकर नए अध्यक्ष के साथ काम करेगा। इससे फेड के भीतर पावर स्ट्रगल की स्थिति बन सकती है।

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