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Chinmoy Krishna Das: क्यों हुई चिन्मय कृष्ण की गिरफ्तारी, बांग्लादेश के सत्ता परिवर्तन का इससे क्या संबंध?
Wed, 27 Nov 2024 06:58 PM IST
संध्या
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: संध्या
Updated Wed, 27 Nov 2024 06:58 PM IST
सार
Chinmoy Krishna Das: चिन्मय कृष्ण दास सनातन जागरण मंच के प्रवक्ता और चटगांव इस्कॉन के नेता हैं। चिन्मय अपने धार्मिक भाषणों के लिए जाने जाते हैं और इन्ही भाषणों के चलते उन्हें 'शिशु वक्ता' उपनाम भी मिला। उन्हें सोमवार को देशद्रोह के आरोप में ढाका हवाई अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया।
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बांग्लादेश में इस्कॉन के संत चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी
- फोटो : AMAR UJALA
विस्तार
बांग्लादेश में इस्कॉन के संत चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी इन दिनों चर्चा में हैं। चिन्मय को बांग्लादेश में देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया है। सत्ता परिवर्तन के बाद से वहां के अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हुई हिंसा के खिलाफ चिन्मय एक प्रमुख आवाज बनकर उभरे हैं। अब चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद उनके अनुयायी सड़क पर हैं। भारत ने भी इस मामले को लेकर प्रतिक्रिया दी है और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के लिए चिंता व्यक्त की है।
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कौन हैं चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी?
चंदन कुमार धर, जिन्हें चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी के नाम से भी जाना जाता है, सनातन जागरण मंच के प्रवक्ता और चटगांव इस्कॉन के नेता हैं। इस्कॉन चटगांव से पता चला कि 37 साल के चिन्मय कृष्ण चटगांव के सतकानिया उप जिला से हैं। वे अपने धार्मिक भाषणों के लिए जाने जाते हैं। इन्ही भाषणों के कारण उन्होंने कम उम्र में ही धार्मिक उपदेशक के रूप में जाना जाने लगा। इसके चलते उन्हें 'शिशु वक्ता' उपनाम भी मिला।
चिन्मय कृष्ण दास 2016 से 2022 तक इस्कॉन के चटगांव मंडल सचिव रहे। वे 2007 से चटगांव के हथजारी में पुंडरीक धाम के प्रधानाचार्य भी रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चिन्मय को तीन महीने पहले इस्कॉन में उनके पद से निलंबित कर दिया गया था।
चंदन कुमार धर, जिन्हें चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी के नाम से भी जाना जाता है, सनातन जागरण मंच के प्रवक्ता और चटगांव इस्कॉन के नेता हैं। इस्कॉन चटगांव से पता चला कि 37 साल के चिन्मय कृष्ण चटगांव के सतकानिया उप जिला से हैं। वे अपने धार्मिक भाषणों के लिए जाने जाते हैं। इन्ही भाषणों के कारण उन्होंने कम उम्र में ही धार्मिक उपदेशक के रूप में जाना जाने लगा। इसके चलते उन्हें 'शिशु वक्ता' उपनाम भी मिला।
चिन्मय कृष्ण दास 2016 से 2022 तक इस्कॉन के चटगांव मंडल सचिव रहे। वे 2007 से चटगांव के हथजारी में पुंडरीक धाम के प्रधानाचार्य भी रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चिन्मय को तीन महीने पहले इस्कॉन में उनके पद से निलंबित कर दिया गया था।
चिन्मय कृष्ण दास प्रभु
- फोटो : Social Media
सनातन जागरण मंच क्या है?
5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में जारी हिंसा के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश छोड़ दिया। देश में सत्ता परिवर्तन होने के साथ ही बड़े पैमाने पर हिंदू घरों और मंदिरों में तोड़फोड़ की गई। इसके जवाब में यह मंच शुरू किया गया और चिन्मय दास को इसका प्रवक्ता नियुक्त किया गया। बांग्लादेश में फैली अशांति के बीच हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा को लेकर इस मंच के द्वारा हिंदुओं की आवाज को उठाया जाता है। चिन्मय इसी मंच के द्वारा आंदोलन के जरिए हाल ही में सनातन जागरण मंच ने चटगांव और रंगपुर में बड़ी रैलियां आयोजित की। रैलियों में चिन्मय ने हिंदू समुदाय के अधिकारों के बारे में बात करते हुए कई भाषण दिए।
5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में जारी हिंसा के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश छोड़ दिया। देश में सत्ता परिवर्तन होने के साथ ही बड़े पैमाने पर हिंदू घरों और मंदिरों में तोड़फोड़ की गई। इसके जवाब में यह मंच शुरू किया गया और चिन्मय दास को इसका प्रवक्ता नियुक्त किया गया। बांग्लादेश में फैली अशांति के बीच हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा को लेकर इस मंच के द्वारा हिंदुओं की आवाज को उठाया जाता है। चिन्मय इसी मंच के द्वारा आंदोलन के जरिए हाल ही में सनातन जागरण मंच ने चटगांव और रंगपुर में बड़ी रैलियां आयोजित की। रैलियों में चिन्मय ने हिंदू समुदाय के अधिकारों के बारे में बात करते हुए कई भाषण दिए।
चिन्मय कृष्ण दास
- फोटो : एएनआई
बांग्लादेश में सनातन जागरण मंच की मांग क्या है?
अक्तूबर से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों की मांग को लेकर सनातन जागरण मंच ने चटगांव में विरोध प्रदर्शन शुरू किए थे। चिन्मय कृष्ण दास प्रभु ने कई बार सरकार पर हमला बोला। उनके नेतृत्व में हिंदू अल्पसंख्यकों ने आठ प्रमुख मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। इसमें अल्पसंख्यकों के विरुद्ध अपराध में शामिल लोगों पर मुकदमा चलाने के लिए न्यायाधिकरण का गठन, पीड़ितों को मुआवजा और उनका पुर्नवास, अल्पसंख्यक संरक्षण कानून को लागू करने, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का गठन, शैक्षिक संस्थानों और छात्रावास में अल्पसंख्यकों के प्रार्थना स्थल और पूजा कक्ष बनाने, हिंदू, बौद्ध और ईसाई वेलफेयर ट्रस्टों को प्राथमिकता देने, संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम लागू करने, पाली और संस्कृत शिक्षा बोर्ड के आधुनिकीकरण और दुर्गा पूजा में पांच दिन की छुट्टी की मांग शामिल है।
अक्तूबर से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों की मांग को लेकर सनातन जागरण मंच ने चटगांव में विरोध प्रदर्शन शुरू किए थे। चिन्मय कृष्ण दास प्रभु ने कई बार सरकार पर हमला बोला। उनके नेतृत्व में हिंदू अल्पसंख्यकों ने आठ प्रमुख मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। इसमें अल्पसंख्यकों के विरुद्ध अपराध में शामिल लोगों पर मुकदमा चलाने के लिए न्यायाधिकरण का गठन, पीड़ितों को मुआवजा और उनका पुर्नवास, अल्पसंख्यक संरक्षण कानून को लागू करने, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का गठन, शैक्षिक संस्थानों और छात्रावास में अल्पसंख्यकों के प्रार्थना स्थल और पूजा कक्ष बनाने, हिंदू, बौद्ध और ईसाई वेलफेयर ट्रस्टों को प्राथमिकता देने, संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम लागू करने, पाली और संस्कृत शिक्षा बोर्ड के आधुनिकीकरण और दुर्गा पूजा में पांच दिन की छुट्टी की मांग शामिल है।
चिन्मय पर देशद्रोह का मामला क्यों दर्ज हुआ?
इसी बीच 25 अक्तूबर को चिन्मय और 18 अन्य लोगों पर चटगांव के न्यू मार्केट चौराहे पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भगवा झंडा फहराने का आरोप लगा। 30 अक्टूबर की रात को कोतवाली थाने में चिन्मय और 18 अन्य लोगों के खिलाफ देशद्रोह के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इसी बीच 25 अक्तूबर को चिन्मय और 18 अन्य लोगों पर चटगांव के न्यू मार्केट चौराहे पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भगवा झंडा फहराने का आरोप लगा। 30 अक्टूबर की रात को कोतवाली थाने में चिन्मय और 18 अन्य लोगों के खिलाफ देशद्रोह के तहत मामला दर्ज किया गया था।
रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय
- फोटो : PTI
भारत का इस मामले में क्या रुख है?
भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में 'गहरी चिंता' व्यक्त की। मंत्रालय ने कहा, 'यह घटना बांग्लादेश में चरमपंथी तत्वों द्वारा हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर किए गए कई हमलों के बाद हुई है। अल्पसंख्यकों के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में आगजनी और लूटपाट के साथ-साथ चोरी और तोड़फोड़ और देवताओं और मंदिरों को अपवित्र करने के कई मामले दर्ज हैं।'
मंत्रालय ने कहा, 'हम बांग्लादेश के अधिकारियों से हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं, जिसमें शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उनका अधिकार भी शामिल है।'
वहीं, मंगलवार की देर रात बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय भारत की तरफ से दिए गए बयान का विरोध करते हुए इसे 'बांग्लादेश का आंतरिक मामला' कह दिया।
भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में 'गहरी चिंता' व्यक्त की। मंत्रालय ने कहा, 'यह घटना बांग्लादेश में चरमपंथी तत्वों द्वारा हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर किए गए कई हमलों के बाद हुई है। अल्पसंख्यकों के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में आगजनी और लूटपाट के साथ-साथ चोरी और तोड़फोड़ और देवताओं और मंदिरों को अपवित्र करने के कई मामले दर्ज हैं।'
मंत्रालय ने कहा, 'हम बांग्लादेश के अधिकारियों से हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं, जिसमें शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उनका अधिकार भी शामिल है।'
वहीं, मंगलवार की देर रात बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय भारत की तरफ से दिए गए बयान का विरोध करते हुए इसे 'बांग्लादेश का आंतरिक मामला' कह दिया।