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Marburg Virus: गिनी में मिला कोरोना व इबोला की तरह घातक मारबर्ग वायरस, डब्ल्यूएचओ ने दी जानकारी
Wed, 11 Aug 2021 07:15 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, जिनेवा
एजेंसी, जिनेवा
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 11 Aug 2021 07:15 AM IST
सार
- डब्ल्यूएचओ के अनुसार गिनी के दक्षिणी क्षेत्र गुकेगु में दो अगस्त को एक मरीज की मौत के बाद सैंपल की जांच में मारबर्ग वायरस की पुष्टि हुई है
- कोरोना की तरह चमगादड़ इस वायरस का वाहक है
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मारबर्ग वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : iStock
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विस्तार
कोरोना के बीच एक और घातक वायरस ने दस्तक दे दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सोमवार को बताया कि पश्चिमी अफ्रीका के गिनी गणराज्य में इबोला जैसा जानलेवा और घातक मारबर्ग वायरस पहली बार मिला है।
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डब्ल्यूएचओ के अनुसार गिनी के दक्षिणी क्षेत्र गुकेगु में दो अगस्त को एक मरीज की मौत के बाद सैंपल की जांच में इस वायरस की पुष्टि हुई है। मारबर्ग इबोला व कोरोना वायरस जैसा ही वायरस है, जो पशुओं से मनुष्यों तक फैल सकता है। कोरोना की तरह चमगादड़ इस वायरस का वाहक है। इससे मौत का खतरा 24 से 88 फीसदी है। गिनी सरकार ने देश में इस वायरस के होने की पुष्टि कर दी है। संगठन ने बताया कि इससे पहले दक्षिण अफ्रीका, अंगोला, केन्या, युगांडा, और कांगो गणराज्य में ये वायरस मिल चुका है।
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डब्ल्यूएचओ ने ये भी स्पष्ट किया है कि मारबर्ग वायरस से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर खतरा अधिक हो सकता है, लेकिन वैश्विक स्तर पर इसके फैलने के खतरे का कोई संकेत नहीं है। वायरस को यही पर रोकने के लिए गिनी में इबोला वायरस से निपटने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीम को ही मोर्चे पर लगाया गया है।
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फ्रूट बैट वायरस का अड्डा
सियेरा लियोन के वैज्ञानिकों ने मारबर्ग की मौजूदगी की घोषणा 2018 में की थी लेकिन किसी मनुष्य में ये नहीं मिला था। वैज्ञानिकों ने कहा था कि फ्रूट बैट वायरस का प्रमुख अड्डा है, जिसमें वो लंबे समय तक जीवित रहता है। इसी के जरिए वो इंसानों तक पहुंच सकता है।
अचानक बुखार और सिर में दर्द लक्षण
डब्ल्यूएचओ ने बताया है कि गिनी में मिले इस वायरस की चपेट में आने वाले व्यक्ति को अचानक बुखार, सिर में दर्द, मांसपेशी में दर्द, शरीर के किसी हिस्से से खून निकलना, उल्टी में खून आदि तकलीफ अधिक होती है। ये वायरस भी संपर्क में आने या शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों या उतकों से फैल सकता है।
ये भी लाइलाइज बीमारी
डब्ल्यूएओ ने बताया कि कोरोना की तरह मारबर्ग संक्रमण भी लाइलाज है। इसमें भी सिर्फ लक्षणों का इलाज होता है जिससे रोगी की तकलीफ कम की जाए। राहत के लिए ड्रिप इत्यादि रोगी की स्थिति के आधार पर चिकित्सक देते हैं। अभी तक कोई सटीक दवा या इंजेक्शन नहीं है।
कोरोना का अंत पोलियो से भी आसान
कोरोना महामारी का अंत पोलियों से भी आसान है लेकिन चेचक से थोड़ा मुश्किल है। ब्रिटिश मेडिकल जनरल (बीएमजे) द्वारा किए गए सर्वेक्षण में ये दावा किया गया है। न्यूजीलैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ ओटागो के विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण, सावधानी और वैश्विक सहयोग के जरिए कोरोना का अंत संभव है। दुनियाभर में जितने अधिक लोगों को टीका लगाया जाएगा तो आबादी में वायरस को मात देने की क्षमता उतनी ही अधिक होगी। शोधपत्र के अनुसार असरदार टीके, बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता, सावधानी व प्रबंधन की व्यवस्था से महामारी को अंत तक पहुंचाया जा सकता है।
हर रोग का कुछ न कुछ उपचार
शोध के अनुसार वैज्ञानिकों ने स्मॉलपॉक्स को 2.7, कोरोना को 1.6 और पोलियो को 1.5 की रेटिंग दी है। चेचक 1980 में खत्म हो गया था। वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि वायरस अपने पीक पर जाएगा लेकिन ऐसा नहीं है कि उसके खिलाफ दवा या टीका नहीं बन सकता। हर रोग का कुछ न कुछ इलाज जरूर है।