फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   pakistan army unrest against munir rawalpindi security increased three companies deployed

पाकिस्तान: मुनीर के खिलाफ सेना में असंतोष; रावलपिंडी की सुरक्षा बढ़ाई गई, छह माह तक तैनात रहेंगी तीन कंपनियां

Sun, 23 Aug 2026 07:23 AM IST
Ashutosh Bhatia आशुतोष भाटिया
Updated Sun, 23 Aug 2026 07:23 AM IST
सार

पाकिस्तान में आसिम मुनीर को मिली असीमित शक्तियों के खिलाफ सेना में असंतोष की खबर है। रावलपिंडी में सैन्य मुख्यालय की सुरक्षा के लिए तीन कंपनियां छह महीने के लिए तैनात की गई हैं। पढ़िए रिपोर्ट-

विज्ञापन
pakistan army unrest against munir rawalpindi security increased three companies deployed
आसिम मुनीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को मिली असीमित शक्तियों के खिलाफ सेना के अधीनस्थ रैंक अधिकारियों में असंतोष फैल गया है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि गृह मंत्रालय को रावलपिंडी में सैन्य मुख्यालय के आसपास सुरक्षा के लिए सेना की तीन कंपनियां तैनात करनी पड़ी हैं। यह तैनाती अगले छह माह के लिए है। हालांकि, सरकार ने इसे राजनीतिक आक्रोश के कारण किसी तरह की संवेदनशील स्थिति से निपटने की कोशिश बताया है।
विज्ञापन


गृह मंत्रालय ने सेना की तैनाती का आदेश संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत उठाया गया है, जो नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सशस्त्र बलों की तैनाती का अधिकार देता है। बहरहाल, सूत्रों का कहना है कि हाल में पारित 27वें संविधान संशोधन और नए डिफेंस फोर्सेस एक्ट के बाद आसिम मुनीर को अभूतपूर्व शक्तियां मिल चुकी हैं। नए ढांचे के तहत मुनीर के पास अब थल, जल और वायु सेना, तीनों अंगों पर पूर्ण नियंत्रण है। मुनीर के पास किसी भी अधिकारी या जवान को सेवा से बर्खास्त करने और जबरन रिटायर करने के अधिकार आ गए हैं। इससे जूनियर और अधीनस्थ रैंकों के अधिकारी घुटन महसूस कर रहे हैं। जूनियर अधिकारियों में असंतोष से सैन्य नेतृत्व को संभावित बगावत की आशंका भी सता रही है।
विज्ञापन


असीमित ताकत ने बढ़ाई चिंता
पाकिस्तान में हालिया संशोधनों के बाद फील्ड मार्शल मुनीर का कम से कम 2030 तक पद पर बने रहने का रास्ता साफ हो गया है। यही नहीं, उन्हें आजीवन कानूनी छूट तथा अभियोजन से सुरक्षा भी हासिल हो गई है। इससे सेनाओं के भीतर आंतरिक असंतोष को और हवा मिली है। दरअसल तीनों सेनाओं के कर्मियों को लग रहा है कि उनकी स्थिति बंधुआ मजदूर जैसी हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सुरक्षा बलों पर हमले को बताया कारण
रावलपिंडी में सेना की यह ताजा तैनाती ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले शहर के मॉल रोड पर सुरक्षा बलों पर एक हमला हुआ था, जिसमें एक संदिग्ध को मार गिराया गया। सरकारी हलकों में उसे इमरान खान की पार्टी पीटीआई से जोड़ने की कोशिशें हुईं, जिसे पार्टी ने सिरे से खारिज किया। रावलपिंडी में ही सेना का मुख्यालय भी स्थित है और अडियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह एहतियात बरत रहा है।

ये भी पढ़ें: वोदका, चुटकुले और डाइट टिप्स से डील: ट्रंप के खास दूत ने बेलारूस से ऐसे छुड़ाए 500 कैदी; क्या है पूरी कहानी?


पूर्व सैनिकों के संगठनों में भी बढ़ी नाराजगी
पाकिस्तान की सेना के भीतर पहला विभाजन तब सुलगना शुरू हुआ जब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ दुर्व्यवहार और राजनीतिक कार्रवाइयों को अंजाम दिया गया। हालात यह है कि पूर्व सैनिकों के संगठन भी स्थिति से बेहद खफा हैं। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों को विभिन्न भत्तों और विशेषाधिकारों के जरिये शांत रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सैनिकों के परिवारों में भारी रोष है।

खौफजदा शरीफ सरकार : सरकार के ताजा फैसले के बाद स्थानीय मीडिया में इस तरह के सवाल भी उठाए जाने लगे हैं कि क्या शरीफ सरकार इमरान खान की पार्टी से इस कदर खौफजदा है कि उसे सेना की अतिरिक्त तैनाती जैसा कदम उठाना पड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed