ताक पर प्रतिबंध: लगातार नई मिसाइलों को परीक्षण कर अपनी क्षमताएं बढ़ा रहा उत्तर कोरिया, क्षेत्र में बढ़ा असंतुलन
अमेरिकी गैर सरकारी संगठन न्यूक्लीयर थ्रेट इनिशिएटिव के मुताबिक गुरुवार को दागी गई मिसाइल उसके पहले दागी गई तमाम मिसाइलों की तुलना में अधिक ऊंचाई तक गई। ह्वांसोंग-17 6,248 किलोमीटर ऊंचाई तक गई। उसने 1,090 किलोमीटर की दूरी तय की। जबकि इसके पहले उत्तर कोरिया की कोई मिसाइल 4,500 किलोमीटर से अधिक ऊंचाई तक नहीं पहुंच सकी थी...
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जब दुनिया का ध्यान यूक्रेन युद्ध पर टिका हुआ है, उत्तर कोरिया ने नई मिसाइलों का लगातार परीक्षण कर एक नया संकट खड़ा कर दिया है। इस स्थिति पर विचार के लिए पश्चिमी देशों की पहल पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई गई है। खबरों के मुताबिक इसमें अमेरिका उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध और सख्त करने का प्रस्ताव रखेगा। लेकिन ये संभावना बनी हुई है कि चीन या रूस इस प्रस्ताव को वीटो कर दें।
उत्तर कोरिया ने गुरुवार को अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) ह्वांसोंग-17 का परीक्षण किया। पास-पड़ोस के देशों से लेकर अमेरिका तक को इससे खासी चिंता हुई है। जापान के रक्षा मंत्री नोबुओ किशी ने शुक्रवार को कहा कि इससे खतरा अब एक नए मुकाम पर पहुंच गया है। इस बीच ताजा परीक्षण के बारे में जुटाई गईं सैटेलाइट तस्वीरों और जानकारियों से संकेत मिला है कि उत्तर कोरिया ने आईसीबीएम के निर्माण में क्रमिक रूप से प्रगति की है।
पहले से उन्नत हैं नई मिसाइल
उत्तर कोरिया के मीडिया ने गुरुवार को हुए परीक्षण की तस्वीरें शुक्रवार को जारी कीं। इससे संकेत मिला कि ये परीक्षण देश के दक्षिण-पश्चिम में स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सुनान से किया गया। यह जगह राजधानी प्योंगयांग के करीब ही है। अमेरिका स्थित जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉन-प्रोलिफरेशन स्टडीज के शोधकर्ताओं ने उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण किया है। वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि उत्तर कोरिया की नई मिसाइल उसके पहले की मिसाइलों से अधिक उन्नत है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक 2017 तक उत्तर कोरिया देश के कई ठिकानों से मिसाइल परीक्षण करता था। लेकिन अब ऐसा लगता है कि उसने सुनान को ही परीक्षण स्थल बना लिया है। जेम्स मार्टिन सेंटर से जुड़े विशेषज्ञ जेफरी लुइस ने कहा है- एक को छोड़ कर आईसीबीएम के सभी परीक्षण सुनान से ही किए गए हैँ। एक परीक्षण प्योंगयांग से किया गया था।
अमेरिकी गैर सरकारी संगठन न्यूक्लीयर थ्रेट इनिशिएटिव के मुताबिक गुरुवार को दागी गई मिसाइल उसके पहले दागी गई तमाम मिसाइलों की तुलना में अधिक ऊंचाई तक गई। ह्वांसोंग-17 6,248 किलोमीटर ऊंचाई तक गई। उसने 1,090 किलोमीटर की दूरी तय की। जबकि इसके पहले उत्तर कोरिया की कोई मिसाइल 4,500 किलोमीटर से अधिक ऊंचाई तक नहीं पहुंच सकी थी।
उत्तर कोरिया के निशाने पर होगा अमेरिका
जापान के रक्षा मंत्री किशी ने शुक्रवार को कहा कि किसी मिसाइल से कितना नुकसान होता है, यह उस पर तैनात हथियार से तय होता है। लेकिन उत्तर कोरियाई मिसाइलें 15 हजार किलोमीटर तक दूरी तय करने में सक्षम हो सकती हैं। इसका मतलब हुआ कि पूरा अमेरिका उत्तर कोरिया के निशाने पर होगा।
जानकारों का कहना है कि उत्तर कोरिया 2016 से ही सुनान स्थित हवाई अडडे से कुछ दूरी पर कई इमारतें बना रहा है। इस बात की पुष्टि गूगल अर्थ से हुई है। 2019 में उपग्रह से ली गई तस्वीरों से मालूम हुआ था कि हवाई अड्डे के आसपास कई नई इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। जानकारों के मुताबिक इन इमारतों का संबंध मिसाइलों के जरिए हमला करने की तैयारी से हो सकता है।
अब अमेरिका और पश्चिमी देश उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंध लगाने का इरादा दिखा रहे हैं। जबकि कई विशेषज्ञों की राय है कि अब तक लगाए गए प्रतिबंध बेअसर साबित हुए हैं।