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ASEAN महासचिव-जयशंकर की मुलाकात: 2026-2030 तक की कार्ययोजना पर मंथन, आसियान में सहयोग पर भारत की नीति क्या?

Thu, 23 Jul 2026 12:20 AM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, मनीला।
एएनआई, मनीला। Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 23 Jul 2026 12:20 AM IST
सार

मनीला में 59वीं आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आसियान महासचिव डॉ. काओ किम हॉर्न से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने 2026-2030 की कार्ययोजना, समुद्री सहयोग, व्यापार, सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, AI, हरित विकास और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

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What India policy regarding ASEAN Jaishankar meeting with Secretary-General find out which issues discussed
आसियान के महासचिव डॉ. काओ किम हॉर्न के साथ विदेश मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित 59वीं आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर आसियान के महासचिव डॉ. काओ किम हॉर्न से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही वर्ष 2026-2030 के भारत-आसियान कार्ययोजना के तहत भविष्य में सहयोग बढ़ाने के रोडमैप पर भी विस्तार से चर्चा की।

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क्या बोले एस. जयशंकर?
एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने आसियान सचिवालय द्वारा भारत-आसियान संबंधों को मजबूत बनाने में लगातार दिए जा रहे सहयोग के लिए महासचिव डॉ. काओ किम हॉर्न का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने 2026-2030 की भारत-आसियान कार्ययोजना के प्रमुख स्तंभों पर विचार-विमर्श किया, ताकि राजनीतिक, आर्थिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
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जयशंकर ने अपनी पोस्ट में क्या लिखा?
आज मनीला में आसियान के महासचिव डॉ. काओ किम हॉर्न से मुलाकात कर खुशी हुई। भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में आसियान सचिवालय के निरंतर सहयोग के लिए उनका धन्यवाद किया। साथ ही 2026-2030 की भारत-आसियान कार्ययोजना के प्रमुख स्तंभों पर विचार साझा किए, जिससे राजनीति, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और संस्कृति के क्षेत्रों में हमारी साझेदारी और मजबूत हो सके।
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आसियान सचिवालय ने क्या कहा?
आसियान सचिवालय ने भी एक्स पर जारी बयान में कहा कि महासचिव डॉ. काओ किम हॉर्न ने 59वीं आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक और उससे जुड़े कार्यक्रमों के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से द्विपक्षीय बैठक की। बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई तथा आपसी हितों के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।

ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा पर जयशंकर ने क्या कहा?
मनीला में आयोजित आसियान पोस्ट-मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस विथ इंडिया- 2026 को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आज के समय में ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में ये सभी क्षेत्र पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।

समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कानून क्यों हैं अहम?
जयशंकर ने कहा कि भारत और आसियान दोनों ही समुद्री व्यापार पर काफी हद तक निर्भर हैं। ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि संयोग से वर्ष 2026 को भारत-आसियान समुद्री सहयोग वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जो एक अधिक सुरक्षित और स्थिर भविष्य के निर्माण का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि भारत और आसियान दोनों अपने भविष्य को लेकर आशावान हैं। आज दोनों के बीच सहयोग का दायरा व्यापार और निवेश, प्रतिभा एवं लोगों की आवाजाही, प्रौद्योगिकी, डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हरित विकास, सतत विकास और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों तक फैल चुका है। उन्होंने कहा कि जोखिम कम करने और आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने के लिए दोनों पक्षों के बीच गहरा सहयोग आवश्यक है।

ये भी पढ़ें: US-Iran War: ट्रंप बोले- ईरान पर हमले बंद नहीं होंगे, अमेरिकी जनता जंग के खिलाफ नहीं; महंगे ईंधन पर क्या कहा?


फिलीपींस की भूमिका क्यों है खास?
विदेश मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब फिलीपींस ने वर्ष 2026 के लिए आसियान की अध्यक्षता संभाल ली है। ऐसे में भारत और आसियान के बीच सहयोग को नई दिशा देने के लिहाज से यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

11 देशों का संगठन है आसियान
आसियान वर्तमान में 11 सदस्य देशों का क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम और तिमोर-लेस्ते (पूर्वी तिमोर) शामिल हैं। तिमोर-लेस्ते आसियान का सबसे नया सदस्य देश है। यह संगठन दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक, सुरक्षा, व्यापार, सांस्कृतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्य करता है।

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