ह्यूस्टन में हाउडी मोदी कार्यक्रम के हैं कई मायने, ट्रंप-मोदी व दोनों देशों के लिए कैसे है फायदेमंद
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अमेरिका के एनआरजी फुटबाल स्टेडियम में हाउडी मोदी कार्यक्रम के लिए ह्यूस्टन को इसलिए चुना गया क्योंकि न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को और वाशिंगटन डीसी में मोदी के बड़े कार्यक्रम हो चुके हैं। टेक्सास इंडिया फोरम लोकसभा चुनाव से पहले मोदी को बुलाना चाहता था, लेकिन संभव नहीं हो सका।
ह्यूस्टन में तेल व प्राकृतिक गैस की बड़ी कंपनियों के मुख्यालय हैं। मोदी का सभी से मुलाकात का कार्यक्रम है। ह्यूस्टन दुनिया के सबसे बड़े मेडिकल सेंटर में शुमार है। टेक्सास मेडिकल सेंटर से बीते कुछ महीनों में एम्स समेत भारत के कई अस्पतालों के करार हुए हैं।
आयुष्मान भारत के तहत भारतीयों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्त्य सेवाएं उपलब्ध कराने की चर्चा भी पीएम के एजेंडे में है। इसके अलावा मोदी अमेरिकी सांसदों से मिलेंगे। भारतीय-अमेरिकी समुदाय के 800 पदाधिकारी पीएम से व्यक्तिगत मुलाकात करेंगे।
ट्रंप-मोदी व दोनों देशों के लिए भी फायदेमंद है ‘हाउडी मोदी’
अमेरिकी संगठन यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम ने कहा है कि ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम न सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए बल्कि दोनों देशों के लिए भी फायदेमंद है। फोरम के अध्यक्ष मुकेश अघी ने कहा, ‘कुल मिलाकर, संदेश बेहद स्पष्ट है कि भारत और अमेरिका स्वाभाविक सहयोगी हैं और ये रिश्ते समय के साथ और मजबूत होंगे।’
मुकेश अघी ने कहा, ‘अमेरिका के सबसे समृद्ध अल्पसंख्यक भारतीय-अमेरिकी पहली बार इतनी बड़ी संख्या में कहीं एकत्रित होंगे। यह एक ऐसे राज्य में हो रहा है जो चुनाव के लिहाज से हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप के लिए ह्यूस्टन आना और प्रधानमंत्री मोदी के साथ सभा को संबोधित करना दोनों के लिए फायदेमंद है।’ उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी के नजरिए से ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां उन्हें अमेरिका की जरूरत है। उनमें से एक मुद्दा क्षेत्र की भू-राजनीति है।
प्रधानमंत्री के साथ ट्रंप जब सभा को संबोधित करेंगे तो उससे यह संदेश जाएगा कि अमेरिका और भारत भू-राजनीति के मुद्दे पर भी एक हैं। यह दोनों देशों के लिए भी फायदे की बात है।’ अघी ने कहा कि कश्मीर मसले पर अमेरिकी सरकार का रुख भारत के पक्ष में ही है क्योंकि वह इसे एक द्विपक्षीय और आंतरिक मामला मानता है।