पश्चिम एशिया युद्ध: बढ़ते हमलों के बीच देवदूत बनीं भारतीय नर्सें, संघर्ष के साये में निभा रहीं अपना कर्तव्य
पश्चिम एशिया के संघर्ष के बीच भी भारतीय नर्सों का समर्पण अडिग है। अल जाहरा के 53°C तापमान वाले इलाके में जैसमीन थॉमस और साथी नर्सें धमाकों और मिसाइलों के बीच क्लिनिक में मरीजों की देखभाल करती रहीं। खतरे और कर्तव्य के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने साहस और जिम्मेदारी की मिसाल पेश की, जो भारतीय नर्सों की अलग पहचान बनाती है।
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पश्चिम एशिया में ज्यादातर देशों में संघर्ष का साया छाया हुआ लेकिन ऐसे समय में भी भारतीय नर्सों की सेवा और समर्पण में कोई कमी नहीं आई है। इनका काम राजनीतिक या सैन्य तनाव के बावजूद हमेशा की तरह बदस्तूर जारी है। 1990 के दशक का कुवैत युद्ध हो, 2003 का इराक युद्ध, सीरिया या मिस्र के गृह युद्ध या पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा संघर्ष, भारतीय नर्सें हमेशा देवदूत बनकर अपना कर्तव्य निभाती रही हैं।
इसकी मिसाल कुवैत शहर से करीब 32 किलोमीटर पश्चिम में इराक सीमा के पास भट्टी की तरह तप रहे अल जाहरा में दिख जाता है।
इस जगह को धरती पर सबसे गर्म जगहों में एक माना जाता है और यहां का तापमान 53 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक हो जाता है। केरल की एक नर्स जैसमीन थाॅमस (बदला हुआ नाम) अपने भारतीय साथियों के साथ अल जाहरा के एक छोटे से क्लिनिक में आम दिनों की तरह काम कर रही थी। कुछ ही घंटों बाद क्लिनिक के ऊपर आसमान में मिसाइलें और ड्रोन उड़ते नजर आने लगे। देखते-देखते रुक-रुक कर धमाके होने लगे।
भारतीय नर्सो के साहस की कहानी
धमाकों की तीव्रता बढ़ने पर जैसमीन और उनके साथी भागकर अपने हॉस्टल में शरण लेते हैं। हॉस्टल में वे सब हालात के सामान्य होने का इंतजार करते रहे। कर्तव्य और अपनी सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की मशक्कत करते हुए जैसमीन और उनके साथी सोमवार को फिर से अपने काम पर लौट आएं लेकिन इस बार क्लिनिक में वे सब थे लेकिन मरीज नहीं। यह घटना भारतीय नर्सों के साहस, धैर्य और जिम्मेदारी को दिखाता है। ये ऐसी विशेषता है जो इस क्षेत्र में काम करने वाली भारतीय नर्सों को अन्य लोगों से अलग पहचान दिलाती है।
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हम सुरक्षित हैं
जैसमीन और ईरान में फंसी केरल की एक नर्स के अलावा ज्यादातर नर्सों ने कहा कि हम सुरक्षित हैं। संयुक्त अरब अमीरात में कार्यरत एक भारतीय स्वास्थ्यकर्मी ने कहा कि हमें बीच-बीच में चेतावनी सायरन सुनाई देते हैं लेकिन इसके अलावा अभी कोई खतरा महसूस नहीं हुआ है। अस्पताल सामान्य तरीके से काम कर रहे हैं। सरकार हमलों को रोक रही है।
कुवैत में कार्यरत एक नर्स ने भी यही बात कही और कहा कि अभी भारतीय प्रवासियों के लिए चिंता की कोई वजह नहीं है। कई लोगों के लिए, मैसेज एक जैसा है। सऊदी अरब में कार्यरत एक अन्य नर्स ने कहा कि हम पूरी तरह से सुरक्षित हैं। मीडिया के कुछ हिस्सों में जैसा दिखाया जा रहा है, उसके उलट। ड्रोन हमले हो रहे हैं, लेकिन देश अपना बचाव कर रहा है और हमारी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है।
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4 लाख से 5 लाख भारतीय नर्सें कार्यरत
एक अनुमान के मुताबिक, इस इलाके में 4,00,000 से 5,00,000 भारतीय नर्सें काम कर रही हैं। गैर-निवासी केरलवासियों की शिकायतों के समाधान के लिए राज्य की नोडल एजेंसी एनओआरकेए रूट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजीत कोलासेरी ने बताया कि सरकार को राज्य की एक नर्स के जंग प्रभावित ईरान में फंसे होने की सूचना मिली थी। हमें नहीं पता था कि मलयाली नर्सें भी वहां काम कर रही हैं।
हालांकि उन्होंने कहा कि विदेश में रहने वाली नर्सिंग समुदाय के बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। हमें वीजा और दस्तावेज से जुड़े नियमित सवाल मिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन एवं विकास संस्थान (आईआईएमएडी) के अध्यक्ष एस इरुदया राजन के अनुसार, केरल प्रवासन सर्वेक्षण 2023 के आधार पर अनुमान है कि पश्चिम एशिया में लगभग 20 लाख केरलवासी कार्यरत हैं।
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