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Pakistan: सिंधु नदी में कम होने लगा पानी, कटने लगा तट; परेशान मछुआरों की सरकार ने भी नहीं सुनी फरियाद

Sat, 13 Sep 2025 01:54 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कराची
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कराची Published by: बशु जैन Updated Sat, 13 Sep 2025 01:54 PM IST
सार

फिशरफोक फोरम की केंद्रीय नेता यासमीन शाह ने खुलासा किया कि सिंध के तटीय क्षेत्रों में भूमि का कटाव पहली बार 1950 में रिपोर्ट किया गया था। अब तक लगभग 3.5 मिलियन एकड़ जमीन समुद्र में खो चुकी है। इससे मछुआरा समुदाय को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।

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Water in Indus River started decreasing, government did not listen to the complaints of distressed fishermen
पाकिस्तान मछुआरा समुदाय। - फोटो : ANI

विस्तार

पाकिस्तान की सिंधु नदी में पानी कम होने लगा है। साथ ही सिंध के तट पर कटाव होने से मछुआरा समुदाय की चिंता बढ़ गई है। अपनी जमीन और आजीविका नष्ट होते देख मछुआरों से सरकार से गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई है। 
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फिशरफोक फोरम की केंद्रीय नेता यासमीन शाह ने खुलासा किया कि सिंध के तटीय क्षेत्रों में भूमि का कटाव पहली बार 1950 में रिपोर्ट किया गया था। अब तक लगभग 3.5 मिलियन एकड़ जमीन समुद्र में खो चुकी है। इससे मछुआरा समुदाय को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। तब उनके गांव समुद्र में बह गए थे। इसके कारण हजारों परिवारों को रोजगार की तलाश में पलायन करना पड़ा था।
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शाह ने कहा कि सिंध सरकार की नीतियों के कारण मत्स्य पालन क्षेत्र में अनुबंध प्रणाली को मजबूत किया गया है। इसने गरीब मछुआरों के रोजगार को बुरी तरह प्रभावित किया है। यह नीति मत्स्य पालन क्षेत्र में फलने-फूलने की चाहत रखने वाली बड़ी कंपनियों के हितों की रक्षा करके मछुआरों के रोज़गार को और खतरे में डाल देगी।
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आपदा प्रबंधन और पुनर्वास विशेषज्ञ नसीर मेमन ने कहा कि कोटरी बैराज और नई नहरों के निर्माण के बाद निचले सिंध इलाकों में रहने वाले लाखों लोग न केवल पीने के पानी से वंचित हो रहे हैं, बल्कि जल प्रवाह में कमी से सिंधु डेल्टा प्रणाली भी प्रभावित होगी। इससे समुद्र का लगातार अतिक्रमण होगा।

मछुआरा सहकारी समिति की नवनिर्वाचित अध्यक्ष फ़ातिमा मजीद ने कहा कि मछुआरा समुदाय लंबे समय से समस्याओं का सामना कर रहा है। मछुआरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और उनके कल्याणकारी परियोजनाओं को शुरू करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। हम मछली के निर्यात को भी बढ़ाने का प्रयास करेंगे ताकि मछुआरों को रोज़गार के अधिक अवसर प्रदान किए जा सकें।
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