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Vivek Ramaswami: ट्रंप के सरकारी कार्यदक्षता विभाग का हिस्सा नहीं होंगे विवेक रामास्वामी, इस कारण दिया इस्तीफा

Tue, 21 Jan 2025 04:02 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 21 Jan 2025 04:02 AM IST
सार

Vivek Ramaswami: भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी अब ट्रंप के सरकारी कार्यदक्षता विभाग के हिस्सा नहीं होंगे। इसकी जानकारी ट्रंप के शपथ ग्रहण के कुछ घंटों के बाद व्हाइट हाउस ने दी।  

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Vivek Ramaswami will not be a part of Trump's Department of Government Efficiency World News In Hindi
विवेक रामास्वामी - फोटो : एक्स@MarioNawfal

विस्तार

डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण के साथ ही एक बड़ी खबर सामने आ रही है कि भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी अब ट्रंप के सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) का हिस्सा नहीं होंगे। इसको लेकर व्हाइट हाउस ने सोमवार को बताया कि विवेक रामास्वामी अब सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) का हिस्सा नहीं हैं। बता दें कि अपने मंत्रीमंडल के चयन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने विवेक रामास्वामी को एलन मस्क के साथ मिलकर सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) का नेतृत्व करने के लिए चुना था।

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इस कारण दिया इस्तीफा
विवेक रामास्वामी के इस्तीफे के कारण पर प्रकाश डालते हुए डीओजीई के प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा कि रामास्वामी ने विभाग में महत्वपूर्ण योगदान दिया था, चूंकि अब उन्होंने ओहियो के गवर्नर के पद के लिए चुनाव लड़ने का इरादा जताया है, इसलिए उन्हें इस विभाग से बाहर होना पड़ रहा है।
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इस पद के लिए चुनाव लड़ना चाहते है रामास्वामी
गौरतलब है कि भारतीय-अमेरिकी उद्यमी विवेक रामास्वामी ने सबसे पहले राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का फैसला किया था। उन्होंने भी रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उम्मीदवारी भी पेश की थी। हालांकि उन्होंने अब ओहियो के गवर्नर के लिए चुनाव लड़ने का इरादा जताया है। इसलिए ट्रंप के राष्ट्रपति पद के लिए शपथ ग्रहण करने के कुछ ही घंटों बाद ही विवेक रामास्वामी को सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) से इस्तीफा देना पड़ा। 
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कौन है विवेक रामास्वामी?
भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी बायोटेक कारोबार में जाना-माना चेहरा हैं। रामास्वामी दवाओं को विकसित करने के लिए बायोटेक कंपनी रोइवेंट साइंसेज चलाते हैं। उन्होंने 2016 की सबसे बड़ी जैव प्रौद्योगिकी फर्म मायोवैंट साइंसेज की स्थापना की थी। अप्रैल में कंपनी बनाने के बाद उन्होंने प्रोस्टेट कैंसर की दवा और महिला बांझपन की दवा के लिए टाकेडा फार्मास्युटिकल्स के साथ एक सौदा किया था।
 
वह बायोफार्मा स्पेस में कई अन्य कंपनियों के संस्थापक भी हैं, जिनमें मायोवैंट साइंसेज, यूरोवेंट साइंसेज, एंजीवेंट थेराप्यूटिक्स, अल्टावेंट साइंसेज और स्पिरोवैंट साइंसेज शामिल हैं। 37 वर्षीय दूसरी पीढ़ी के भारतीय अमेरिकी ने कम ही समय में बायोटेक क्षेत्र में उनका नाम हो गया। 2015 में फोब्स पत्रिका के कवर पर उन्हें फीचर किया गया। फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार, 2014 में 30 से कम उम्र वाले सबसे अमीर उद्यमियों में विवेक 30वें स्थान पर थे। वहीं 2016 में 40 से कम उम्र वाले 24वें सबसे अमीर उद्यमी थे।


भारतीय मूल के हैं रामास्वामी
1985 में अमेरिका के दक्षिण पश्चिम ओहियो के सिनसिनाटी में जन्मे विवेक रामास्वामी के पिता वीजी रामास्वामी मूलत: केरल के पलक्कड़ के रहने वाले है। केरल के एक स्थानीय कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद उनके पिता वी.जी. रामास्वामी, ओहियो के इवेंडेल में जनरल इलेक्ट्रिक प्लांट में काम करने गए। विवेक की मां सिनसिनाटी में एक मनोचिकित्सक थीं। उनकी पत्नी अपूर्वा तिवारी रामास्वामी ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्सनर मेडिकल सेंटर में डॉक्टर हैं। 

 

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