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वजीरिस्तान में बढ़ी हिंसा: तालिबान और पाक सरकार की वार्ता से लोगों में उम्मीद नहीं, दहशत लौटने का अंदेशा गहराया

Sun, 12 Dec 2021 08:02 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 12 Dec 2021 08:02 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों का कहना है कि उस क्षेत्र में बढ़ी हिंसा के लिए सिर्फ पाकिस्तानी तालिबान जिम्मेदार नहीं है, बल्कि समर्पण कर चुके तालिबान दहशतगर्द भी दोषी हैं, जिनकी पीठ पर पाकिस्तान सरकार का हाथ है। ये दोनों ही गुट यहां नागरिकों की हत्या, लूट-खसोट, और सुरक्षा बलों पर हमलों में शामिल हैं।

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Violence increased in Waziristan: There is no hope among the people due to the talks between the Taliban and Pakistan government Latest News Update
इमरान खान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान के दक्षिणी वजीरिस्तान और उसके आसपास के उत्तरी वजीरिस्तान के जिलों में हाल में हिंसा काफी बढ़ोतरी हुई है। यही इलाका तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (जिसे बोलचाल में पाकिस्तानी तालिबान कहा जाता है) की जन्म स्थली है। अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद से इस इलाके में पाकिस्तानी तालिबान की गतिविधियां बढ़ गई हैँ। इससे यहां के बाशिंदों में फिर से पुराने दिनों जैसी दहशत लौटने का अंदेशा गहरा गया है।

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पर्यवेक्षकों का कहना है कि उस क्षेत्र में बढ़ी हिंसा के लिए सिर्फ पाकिस्तानी तालिबान जिम्मेदार नहीं है, बल्कि समर्पण कर चुके तालिबान दहशतगर्द भी दोषी हैं, जिनकी पीठ पर पाकिस्तान सरकार का हाथ है। ये दोनों ही गुट यहां नागरिकों की हत्या, लूट-खसोट, और सुरक्षा बलों पर हमलों में शामिल हैं। टीवी चैनल अल-जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां हिंसा में इजाफा इस साल के आरंभ से ही होने लगा। इस वर्ष जनवरी से लेकर अब तक दक्षिणी और उत्तरी वजीरिस्तान के जिलों में हथियारबंद गुटों ने 37 हमले किए हैं। उनमें 69 लोगों की जान गई है। अल-जजीरा ने ये आंकड़े आतंकवादी गतिविधियों पर नजर रखने वाली वेबसाइट साउथ एशिया टेररिज्म पॉर्टल के हवाले से दिए हैं।
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हमलों का ज्यादा शिकार तालिबान विरोधी नागरिक बने हैं। इनके अलावा कई जगहों पर लूट-खसोट के मकसद से हमले किए गए और बम विस्फोट किए गए। बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों को भी निशाना बनाया गया है। इस वर्ष हिंसा में जो लोग मारे गए, उनमें 84 प्रतिशत सुरक्षाकर्मी हैं। पाकिस्तान की सेना ने बढ़ी हिंसा की वजह अफगानिस्तान में बनते हालात को बताया है। एक सुरक्षा अधिकारी ने अपना नाम ना जाहिर करने की शर्त पर अल-जजीरा से कहा- ‘अफगानिस्तान में बनी स्थिति के झटके पाकिस्तान में भी महसूस किए गए। लेकिन ये हाल थोड़े समय ही रहा, क्योंकि पाकिस्तान के सुरक्षा बल किसी भी अंदरूनी या बाहरी खतरे का मुकाबला करने के लिए चुस्त-दुरुस्त हैं।’
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इस साल अक्टूबर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एलान किया था कि उनकी सरकार पाकिस्तानी तालिबान से बातचीत करेगी, ताकि शांतिपूर्ण समाधान ढूंढा जा सके। नवंबर में अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुट्टाकी ने इस बात की पुष्टि की कि वे ऐसी बातचीत शुरू कराने के लिए मध्यस्थता कर रहे हैं। बाद में खबर आई कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता शुरू हो गई है। लेकिन वजीरिस्तान में इस खबर से ज्यादा उत्साह पैदा नहीं हुआ। वहां के निवासियों का कहना है कि उन्हें शक है कि इससे कोई ठोस नतीजा हासिल होगा।


उस क्षेत्र के पर्यवेक्षकों ने अल-जजीरा से बातचीत में ध्यान दिलाया कि अतीत में जब कभी कोई समझौता हुआ है, तो पाकिस्तानी तालिबान ने उसका इस्तेमाल खुद मजबूत करने के लिए किया है। बाद में उसे जब स्थिति अपने अनुकूल लगती है, तो वह फिर हिंसा शुरू कर देता है। एक पर्यवेक्षक ने कहा- अंत में होगा यह कि पाकिस्तानी तालिबान कबीलाई इलाकों में अपने ब्रांड का शरिया कानून लागू करने की कोशिश करेगा। उस पर सरकार एतराज करेगी। और वहां से फिर बात बिगड़ जाएगी।

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