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UNSC: भारत का आह्वान- महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएं सदस्य देश, सुनिश्चित हो भागीदारी

Wed, 08 Mar 2023 10:54 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 08 Mar 2023 10:54 AM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने मंगलवार को कहा कि सदस्य देशों को राजनीतिक प्रक्रियाओं और फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी और समावेश के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करना चाहिए।

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Violence against women girls perpetrated by terrorists remains rampant India at UNSC
रुचिरा कंबोज - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को जहां दुनियाभर में मनाया जा रहा है। वहीं, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से जोर देकर कहा है कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ आतंकवादियों के द्वारा हिंसा बड़े पैमाने पर जारी है। भारत ने सभी प्रकार के आतंकवाद से निपटने के लिए जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाने का आह्वान किया और कहा कि इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। 

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संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने मंगलवार को कहा कि सदस्य देशों को राजनीतिक प्रक्रियाओं और फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी और समावेश के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि आतंकवाद और हिंसक अतिवाद, मानवाधिकारों के सबसे बड़े उल्लंघनकर्ता और वैश्विक शांति व सुरक्षा के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं, यह कहने की जरूरत नहीं है। महिलाएं और लड़कियां असमान रूप से पीड़ित हैं।
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प्रस्ताव 1325 (महिला, शांति और सुरक्षा) की 25वीं वर्षगांठ पर यूएनएससी की खुली बहस में कंबोज ने कहा कि आतंकवादियों द्वारा महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा जारी है। इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। उन्होंने आतंकवाद के सभी रूपों के लिए जीरो-टॉलरेंस नीति अपनाने का आह्वान किया। सुरक्षा परिषद ने अक्तूबर 2000 में प्रस्ताव 1325 को अपनाया था।
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यह प्रस्ताव संघर्षों की रोकथाम और समाधान, शांति वार्ता, शांति-निर्माण, शांति स्थापना, मानवीय प्रतिक्रिया और संघर्ष के बाद के पुनर्निर्माण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका की पुष्टि करता है। प्रस्ताव शांति और सुरक्षा के रखरखाव और संवर्धन के लिए सभी प्रयासों में महिलाओं की समान भागीदारी और पूर्ण भागीदारी के महत्व पर जोर देता है। मार्च के महीने के लिए मोजाम्बिक की अध्यक्षता में आयोजित परिषद की बहस को संबोधित करते हुए कंबोज ने कहा, इस तरह के एक सक्षम वातावरण को बढ़ावा देने के लिए लोकतंत्र, बहुलवाद और कानून के शासन के सिद्धांत आवश्यक शर्तें हैं।


अफगानिस्तान की स्थिति का जिक्र करते हुए कंबोज ने कहा कि भारत यूएनएससी के प्रस्ताव 2593 के अनुसार महिलाओं की सार्थक भागीदारी के साथ अफगानिस्तान में समावेशी और प्रतिनिधि शासन के महत्व पर जोर दे रहा है, जिसे अगस्त 2021 में भारत की अध्यक्षता में परिषद द्वारा अपनाया गया था। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय संगठनों को राष्ट्रीय अधिकारियों के अनुरोध पर उनके राष्ट्रीय कानूनी ढांचे और संबंधित संस्थागत ढांचे को मजबूत करने की क्षमताओं को विकसित करने में सहायता करनी चाहिए ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके और महिलाओं के खिलाफ हिंसा करने वालों की जांच की जा सके।

कंबोज ने आगे कहा, सदस्य देशों को संघर्ष के बाद की स्थितियों में क्षमता निर्माण के लिए सहायता प्रदान करनी जानी चाहिए, ताकि महिलाओं द्वारा सामना की जाने वाली असमानताओं और हिंसा को सार्थक और संस्थागत रूप से संबोधित किया जा सके और निर्णय लेने में उनकी पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि शांति निर्माण के प्रयासों में महिलाओं पर फोकस करना जरूरी है।



 
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