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नेपाल: सिरिंज की कमी होने से टीकाकरण अभियान पर पड़ा बुरा असर, विशेषज्ञ बोले- 2022 में बढ़ेंगे कोरोना केस
Fri, 24 Dec 2021 03:48 PM IST
प्रशांत कुमार झा
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: प्रशांत कुमार झा
Updated Fri, 24 Dec 2021 03:48 PM IST
सार
बिराटनगर के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन सेंटर में गुरुवार तक वैक्सीन के तीन लाख 12 हजार डोज मौजूद थे, लेकिन वहां इन डोज को लगाने के लिए सिर्फ लगभग दस हजार सिरिंज ही उपलब्ध थीं। इस कारण टीकाकरण अभियान रोकना पड़ा है।
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कोरोना टीका
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे के बीच नेपाल को एक अलग तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन वैरिएंट नेपाल भी पहुंच चुका है। इसलिए यहां कोरोना वैक्सीनेशन अभियान को तेज कर दिया गया है, लेकिन वैक्सीन की तो कमी नहीं, सिरिंज की है बड़ी किल्ल हो गई है । इस बीच कई जगहों पर सिरिंज की कमी हो जाने से लोगों को टीका नहीं लगाया जा रहा है।
नेपाली मीडिया में छप रही खबरों से सिरिंज की कमी से पैदा हो रही दिक्कतों का अंदाजा लगता है। अखबार काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, बिराटनगर के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन सेंटर में गुरुवार तक वैक्सीन के तीन लाख 12 हजार डोज मौजूद थे, लेकिन वहां इन डोज को लगाने के लिए सिर्फ लगभग दस हजार सिरिंज ही उपलब्ध थीं। उस सेंटर की प्रमुख चंद्रकांता ठाकुर ने कहा है कि सिरिंज की कमी की वजह से पूरे बिराटनगर प्रांत में टीकाकरण अभियान पर खराब असर पड़ रहा है।
नेपाल में सिरिंज की भारी किल्लत
नेपाल सरकार के सूत्रों ने बताया है कि नेपाल में विभिन्न कंपनियों के वैक्सीन के लगभग एक करोड़ 20 लाख डोज देश में मौजूद हैं, लेकिन देश में उपलब्ध सिरिंज की संख्या लगभग साठ लाख ही है। यानी लगभग आधे डोज को लगाने के लिए सिरिंज उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी डॉ. सुरेंद्र चौरसिया ने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘फिलहाल तो टीकाकरण अभियान सिरिंज की कमी से प्रभावित नहीं हुआ है। लेकिन आगे अगर सिरिंज की सप्लाई में दिक्कत हुई, तो एक बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।’
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विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना के ज्यादातर वैक्सीन को लगाने के लिए 0.5 मिलीलीटर की ऑटो डिस्पोजेबल सिरिंज का इस्तेमाल होता है। फाइजर-बायोएनटेक कंपनी के वैक्सीन को लगाने के लिए 0.3 मिलीलीटर की सिरिंज का उपयोग होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक 2019 में कोरोना महामारी फैलने के बाद से दुनिया के कई हिस्सों में सिरिंज की कमी महसूस की गई है। इस समय दुनिया में वैक्सीन के जितने डोज मौजूद हैं, उस अनुपात में सिरिंज निर्माता कंपनियां सिरिंज नहीं बना पाई हैँ।
नेपाल के सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के कोवाक्स कार्यक्रम के तहत वैक्सीन के साथ-साथ सिरिंज की सप्लाई भी की जा रही है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र सिरिंज सप्लाई करने के लिए अनुदान पर निर्भर है। इसलिए वह पर्याप्त मात्रा में सिरिंज उपलब्ध नहीं करवा पाया है। इसलिए नेपाल जैसे देशों को अंतरराष्ट्रीय बाजार सिरिंज की खरीदारी करनी पड़ी है। नेपाल में टीकाकरण कार्यक्रम के प्रमुख सागर दहल ने कहा है- ‘वैक्सीन निर्माता कंपनियां सिरिंज का उत्पादन नहीं करतीं। इसलिए हमें उनकी खरीदारी अलग से करनी पड़ती है।’
सिरिंज नहीं होने से बढ़ेगी महामारी
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने पिछले महीने कहा था कि अगर 2022 में कोरोना टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करना है, तो उसके लिए पर्याप्त संख्या में सिरिंज की सप्लाई भी करनी होगी। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि अगर वैक्सीन और सिरिंज की सप्लाई पर्याप्त मात्रा में नहीं की गई, तो 2022 में भी कोरोना महामारी पर काबू नहीं पाया जा सकेगा। गैर-सरकारी संस्थाओं का आरोप है कि धनी देशों ने जरूरत से ज्यादा संख्या में सिरिंज की जमाखोरी कर रखी है। इसका नुकसान विकासशील देशों को उठाना पड़ रहा है।
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नेपाली मीडिया में छप रही खबरों से सिरिंज की कमी से पैदा हो रही दिक्कतों का अंदाजा लगता है। अखबार काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, बिराटनगर के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन सेंटर में गुरुवार तक वैक्सीन के तीन लाख 12 हजार डोज मौजूद थे, लेकिन वहां इन डोज को लगाने के लिए सिर्फ लगभग दस हजार सिरिंज ही उपलब्ध थीं। उस सेंटर की प्रमुख चंद्रकांता ठाकुर ने कहा है कि सिरिंज की कमी की वजह से पूरे बिराटनगर प्रांत में टीकाकरण अभियान पर खराब असर पड़ रहा है।
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नेपाल में सिरिंज की भारी किल्लत
नेपाल सरकार के सूत्रों ने बताया है कि नेपाल में विभिन्न कंपनियों के वैक्सीन के लगभग एक करोड़ 20 लाख डोज देश में मौजूद हैं, लेकिन देश में उपलब्ध सिरिंज की संख्या लगभग साठ लाख ही है। यानी लगभग आधे डोज को लगाने के लिए सिरिंज उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी डॉ. सुरेंद्र चौरसिया ने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘फिलहाल तो टीकाकरण अभियान सिरिंज की कमी से प्रभावित नहीं हुआ है। लेकिन आगे अगर सिरिंज की सप्लाई में दिक्कत हुई, तो एक बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।’
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विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना के ज्यादातर वैक्सीन को लगाने के लिए 0.5 मिलीलीटर की ऑटो डिस्पोजेबल सिरिंज का इस्तेमाल होता है। फाइजर-बायोएनटेक कंपनी के वैक्सीन को लगाने के लिए 0.3 मिलीलीटर की सिरिंज का उपयोग होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक 2019 में कोरोना महामारी फैलने के बाद से दुनिया के कई हिस्सों में सिरिंज की कमी महसूस की गई है। इस समय दुनिया में वैक्सीन के जितने डोज मौजूद हैं, उस अनुपात में सिरिंज निर्माता कंपनियां सिरिंज नहीं बना पाई हैँ।
नेपाल के सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के कोवाक्स कार्यक्रम के तहत वैक्सीन के साथ-साथ सिरिंज की सप्लाई भी की जा रही है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र सिरिंज सप्लाई करने के लिए अनुदान पर निर्भर है। इसलिए वह पर्याप्त मात्रा में सिरिंज उपलब्ध नहीं करवा पाया है। इसलिए नेपाल जैसे देशों को अंतरराष्ट्रीय बाजार सिरिंज की खरीदारी करनी पड़ी है। नेपाल में टीकाकरण कार्यक्रम के प्रमुख सागर दहल ने कहा है- ‘वैक्सीन निर्माता कंपनियां सिरिंज का उत्पादन नहीं करतीं। इसलिए हमें उनकी खरीदारी अलग से करनी पड़ती है।’
सिरिंज नहीं होने से बढ़ेगी महामारी
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने पिछले महीने कहा था कि अगर 2022 में कोरोना टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करना है, तो उसके लिए पर्याप्त संख्या में सिरिंज की सप्लाई भी करनी होगी। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि अगर वैक्सीन और सिरिंज की सप्लाई पर्याप्त मात्रा में नहीं की गई, तो 2022 में भी कोरोना महामारी पर काबू नहीं पाया जा सकेगा। गैर-सरकारी संस्थाओं का आरोप है कि धनी देशों ने जरूरत से ज्यादा संख्या में सिरिंज की जमाखोरी कर रखी है। इसका नुकसान विकासशील देशों को उठाना पड़ रहा है।