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Hindi News ›   World ›   Uyghurs forced to eat pork on Fridays as China pushes to expand pig farms in Xinjiang

उइगुर मुस्लिमों के इलाके को 'सूअर पालन हब' बना रहा चीन, शुक्रवार को शिविरों में खिला रहा इसका मांस

Fri, 04 Dec 2020 03:39 PM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, स्टॉकहोम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, स्टॉकहोम Published by: अनवर अंसारी Updated Fri, 04 Dec 2020 03:39 PM IST
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Uyghurs forced to eat pork on Fridays as China pushes to expand pig farms in Xinjiang
सूअर - फोटो : पेक्सेल्स

चीन में उइगुर मुस्लिमों के साथ जिस तरह का बर्ताव होता है, इसकी जानकारी सारी दुनिया को है। वहीं, बताया गया है कि चीनी 'री-एजुकेशन' शिविरों में उइगुर मुस्लिमों को हर शुक्रवार को पोर्क (सूअर का मांस) खाने को मजबूर किया जा रहा है। चीनी सरकार द्वारा किए जा रहे अत्याचारों की शिकार रही एक महिला सेरागुल सौतबे ने इसकी जानकारी दी। 

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कतरी न्यूज चैनल अल जजीरा को दिए एक साक्षात्कार में सेरागुल ने कहा, हर शुक्रवार को हमें सूअर का मांस खाने के लिए मजबूर किया जाता था। उन्होंने जानबूझकर एक दिन चुना है जो मुसलमानों के लिए पवित्र है और यदि आप इसे अस्वीकार करते हैं, तो आपको कठोर दंड दिया जाता है। 
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फिलहाल स्वीडन में रह रही हैं सेरागुल सौतबे
सेरागुल सौतबे एक डॉक्टर और शिक्षिका हैं, जो वर्तमान में स्वीडन में रह रही हैं। सौतबे ने कहा, मुझे लग रहा था कि मैं एक अलग व्यक्ति हूं। मेरे चारों तरफ अंधेरा छा गया। इसे स्वीकार करना वास्तव में कठिन था।
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शौचालय तक पीछा करते हैं अधिकारी
ऐसे ही एक और पीड़ित उइगुर महिला हैं बिजनेवुमेन जुम्रेत दाऊत, जिन्हें मार्च 2018 में उरुमकी से हिरासत में लिया गया था। दाऊत ने बताया कि दो महीनों तक अधिकारियों ने उनके पाकिस्तान से लिंक होने को लेकर पूछताछ की। दरअसल, उनके पति पाकिस्तान के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने उनसे पूछा कि उनके कितने बच्चे हैं और क्या उन्होंने धर्म और कुरान को पढ़ा है या नहीं। 

उन्होंने आगे कहा कि एक बार उन्हें शौचालय जाने की अनुमति देने के लिए शिविर के पुरुष अधिकारियों से भीख मांगनी पड़ी। उन्हें हथकड़ी पहनकर जाने दिया गया और पुरुष अधिकारियों ने शौचालय में पीछा तक किया।

जिंदा रहने के लिए खाना पड़ता है सूअर का मांस
शिविरों में उइगुर मुसलमानों को परोसे जा रहे पोर्क पर बात करते हुए उन्होंने कहा, जब आपको शिविरों में ले जाया जाता है, तो आप यह नहीं तय कर सकते हैं कि क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। जीवित रहने के लिए हमें हमारे लिए परोसा गया मांस खाना ही पड़ता था।  

शिनजियांग को बनाया जा रहा सूअर पालन का हब

अल जजीरा के पास उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, जर्मन मानवविज्ञानी और उइगुर विद्वान एड्रियन जेनेज ने कहा कि चीन में कृषि विकास को भी धर्मनिरपेक्षता की नीति बना दिया है। दस्तावेजों और देश द्वारा मिली मंजूरी के बाद छपे समाचार लेखों का हवाला देते हुए जेनेज ने बताया है कि सूअर पालन को बढ़ावा देने और विस्तार करने के लिए क्षेत्र में सक्रिय प्रयास हो रहे हैं। 

2019 में, शिनजियांग के शीर्ष प्रशासक शोहरात जाकिर ने कहा था कि शिनजियांग क्षेत्र को सूअर पालने वाले हब में बदल दिया जाएगा। चीनी वेबसाइट सिना के अनुसार, कासगार के कोनाक्साहार काउंटी के एक औद्योगिक पार्क में 25,000 वर्ग मीटर (82 वर्ग फुट) क्षेत्र में इस परियोजना के कब्जे की उम्मीद है, जिसका नाम शुफू रखा गया है। 

यह भी पढ़ें: चीन के जिनजियांग प्रांत में मस्जिद को तोड़कर उस पर बनाया गया सार्वजनिक शौचालय: रिपोर्ट

अल जजीरा कि रिपोर्ट में बताया गया कि इस साल 23 अप्रैल को औपचारिक रूप से इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। जेनेज ने कहा कि यह शिनजियांग में लोगों की संस्कृति और धर्म को पूरी तरह से खत्म करने की कोशिश का हिस्सा है।

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