आखिर क्यों अमेरिका के लोग फिनलैंड में बसना चाहते हैं, 53 हजार से अधिक लोगों ने भेजी अर्जियां
- 5,300 से ज्यादा तकनीकी कर्मियों ने बसने के लिए भेजी अर्जी
- 800 से ज्यादा उद्यमियों ने फिनलैंड में बसने की जताई इच्छा
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ऐसा लगता है कि कोरोना महामारी के बाद दुनिया के विकसित देशों के लोगों में भी दूसरे देशों में जाकर बसने का चाव पैदा हो गया है। इसकी एक ताजा मिसाल फिनलैंड की एक योजना से देखने को मिली है। फिनलैंड ने विकसित देशों के तकनीकी कर्मियों को अपने देश में लाने की योजना कुछ समय पहले घोषित की थी। उसमें कहा गया कि ये कर्मी पहले 90 दिन के लिए फिनलैंड आकर वहां की जिंदगी देख सकते हैं। उसके बाद वे वहां बसने या न बसने का फैसला कर सकते हैं। पिछले एक महीने के दौरान इस 55 लाख आबादी वाले देश में आने के लिए 5,300 से ज्यादा तकनीकी कर्मियों ने अर्जी भेजी है।
हेलसिंकी बिजनेस हब से जुड़े योहाना हुरे ने लंदन के अखबार द गार्जियन से कहा, ''हमें मालूम है कि हम उन देशों में नहीं हैं, जहां आकर लोग बसना चाहते हों। आज दुनिया में प्रतिभाओं को आकर्षित करने की बहुत कड़ी होड़ है। इसलिए हमने ये योजना निकाली। हमें भरोसा है कि जो एक बार आकर यहां के हालात देखेगा, वह यहां जरूर बसना चाहेगा। हुरे के मुताबिक जिन देशों से फिनलैंड को सबसे ज्यादा अर्जियां मिली हैं, उनमें अमेरिका और कनाडा प्रमुख हैं। कुल अर्जियों में इन दोनों देशों का हिस्सा 30 फीसदी से ज्यादा है। ब्रिटेन और यहां तक कि दक्षिण प्रशांत के द्वीप वनुआतू से भी लोगों ने आवेदन भेजे हैं।''
आठ सौ उद्यमियों ने बसने के लिए भेजी अर्जी
आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी के मुताबिक, जितनी अर्जियां आई हैं। उनमें 800 से ज्यादा उद्यमियों की है। ये वो लोग हैं, जो स्टार्ट अप कंपनियां शुरू करना चाहते हैं। 60 निवेशकों ने भी अर्जी भेजी है। बाकी तमाम वो लोग हैं, जिन्होंने यहां नौकरी करने के लिए आवेदन किया है।
डिजिटल कंपनियों ने फिनलैंड में खोले अपने कैंपस
फिनलैंड की कंपनी नोकिया एक समय मोबाइल फोन के कारोबार में दुनिया की सबसे अग्रणी कंपनी थी। इसके अलावा एसएमएस, 5-जी और लाइनक्स जैसी तकनीकों की शुरुआत का श्रेय भी फिनलैंड के उद्यमियों को दिया जाता है। प्रति व्यक्ति स्टार्ट अप कंपनियों की संख्या के लिहाज से फिनलैंड दुनिया में पहले नंबर पर है। वहां की वर्तमान स्टार्ट कंपनियों का कुल मूल्य छह अरब यूरो आंका गया है। हाल ही में गूगल, बेयर और जीई हेल्थकेयर जैसी बड़ी डिजिटल कंपनियों ने अपने कैंपस फिनलैंड में खोले हैं।
ये सुविधाएं मुहैया कराईं जाएंगी
90 दिन की योजना के लिए आवेदन की तारीख निकल चुकी है। इसके तहत फिनलैंड आने वाले लोगों को सभी जरूरी सरकारी दस्तावेज, अच्छा आवास, स्कूल और बच्चों के डे-केयर की सुविधा, रिमोट वर्किंग सुविधा और टेक हब्स एवं नेटवर्कों से उनका परिचय कराने की सुविधा दी जाएगी। अगर वे यहां स्थायी रूप से बसना चाहेंगे, तो उसकी पूरी सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी।
हेल्थ केयर सुविधा से प्रभावित हैं लोग
अमेरिका से जिन लोगों ने आवेदन किया है, उनके बारे में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्होंने सिर्फ अच्छी नौकरी की संभावना के कारण ऐसा नहीं किया। बल्कि फिनलैंड की यूनिवर्सल हेल्थ केयर की व्यवस्था, मातृ एवं पितृ अवकाश की उदार व्यवस्था, काम और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन की परिपाटी और प्रकृति से निकट रहते हुए जीने की संभावना ने उन्हें आकर्षित किया है। इसके साथ ही फिनलैंड की सरकार ने जिस कुशलता से कोरोना महामारी का सामना किया, उससे भी वे प्रभावित हुए हैं। फिनलैंड में कोरोना संक्रमण के कारण मृतकों की संख्या प्रति दस लाख आबादी पर सिर्फ 85 है। यह दुनिया के न्यूनतम दरों में एक है। इस तथ्य ने भी लोगों को आकर्षित किया है कि ग्लोबल हैपिनेस इंडेक्स में पिछले लगातार तीन वर्षों से फिनलैंड पहले नंबर पर आया है।