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चुनावी साल में बढ़ेगी ट्रंप की मुश्किलें?: टैरिफ पर सुप्रीम झटके से बढ़ी सियासी हलचल; आर्थिक संकट की भी आहट

Fri, 20 Feb 2026 11:26 PM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 20 Feb 2026 11:26 PM IST
सार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ लगाने के अधिकार पर बड़ा फैसला सुनाया। चुनावी साल में इस निर्णय से अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल बढ़ने की आशंका। पढ़ें पूरी खबर...

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US Supreme Court Rebukes Donald Trump Over Tariffs, Political and Economic Uncertainty Deepens
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब संवैधानिक संकट का रूप लेता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को संयुक्त राज्य अमेरिका का सर्वोच्च न्यायालय (एससीओटीयूएस)  ने एक अहम फैसले में कहा कि राष्ट्रपति को आर्थिक आपातकाल घोषित कर व्यापक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार नहीं है।

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यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ट्रंप ने टैरिफ को अपनी आर्थिक नीति का केंद्र बना रखा था और आगामी चुनावों में इसे मुख्य मुद्दा बनाने की तैयारी कर रहे थे।
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सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश
6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर कदम उठाया। अदालत के इस निर्णय को ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, जब ट्रंप को फैसले की जानकारी दी गई तो उन्होंने इसे शर्मनाक करार दिया। उनका मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर उन्हें टैरिफ लगाने का पूरा अधिकार है।
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चुनावी साल में बढ़ेगी सियासत

  • ट्रंप ने टैरिफ को अपनी आर्थिक उपलब्धि बताते हुए बार-बार कहा था कि इससे अमेरिकी उद्योगों को मजबूती मिली है।
  • हाल ही में जॉर्जिया राज्य में एक स्टील कंपनी में भाषण देते हुए उन्होंने “टैरिफ” शब्द का 28 बार इस्तेमाल किया।
  • उनका दावा था कि बिना टैरिफ के अमेरिका गहरी मंदी में चला जाता।
  • हालांकि, विपक्षी दल डेमोक्रेट्स को अब सरकार को घेरने का बड़ा मौका मिल गया है।
  • डेमोक्रेटिक नेता सुझ़ान डेलबेने ने कहा कि राष्ट्रपति कोई राजा नहीं हैं और उनकी टैरिफ नीति हमेशा से अवैध थी।


ये भी पढ़ें:- US Tariff: 'ट्रंप का टैरिफ गैरकानूनी', अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से सुनाया बड़ा फैसला


जनता की राय भी अहम
जनवरी में हुए एक सर्वे के अनुसार, लगभग 60 प्रतिशत अमेरिकियों का मानना है कि ट्रंप ने दूसरे देशों पर नए टैरिफ लगाकर हद पार कर दी। वहीं, 76 प्रतिशत लोगों ने आशंका जताई कि इन नीतियों से उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी। महंगाई पहले से ही अमेरिकी मतदाताओं के लिए बड़ा मुद्दा बनी हुई है। ऐसे में यह फैसला चुनावी माहौल को और गरमा सकता है।


आगे क्या होगा?
व्हाइट हाउस संकेत दे चुका है कि वह अन्य कानूनी प्रावधानों का सहारा लेकर टैरिफ नीति को बचाने की कोशिश करेगा। लेकिन जानकारों का मानना है कि इससे कानूनी और राजनीतिक लड़ाई और लंबी खिंच सकती है। रिपब्लिकन रणनीतिकार डग हेये का कहना है कि ट्रंप इस फैसले से खुश नहीं होंगे, लेकिन वे अपने व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने का कोई नया रास्ता जरूर तलाशेंगे।

क्या गहराएगा आर्थिक संकट?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैरिफ पूरी तरह हटते हैं तो अमेरिकी उद्योगों पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, अगर कानूनी लड़ाई लंबी चलती है तो निवेशकों में अनिश्चितता बनी रहेगी। चुनावी साल में यह फैसला न केवल ट्रंप की राजनीतिक रणनीति बल्कि अमेरिका की व्यापार नीति की दिशा भी तय कर सकता है।

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