अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो और रक्षा मंत्री एस्पर का भारत दौरा, 2+2 वार्ता के लिए सोमवार को पहुंचेंगे दिल्ली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और रक्षा मंत्री मार्क टी एस्पर ‘टू प्लस टू’ मंत्री स्तरीय वार्ता के लिए सोमवार को नई दिल्ली पहुंचेंगे। दोनों नेता भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद और अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावों से एक सप्ताह पहले मंगलवार को होने वाली वार्ता के तीसरे संस्करण में हिस्सा लेने यहां आ रहे हैं।
वार्ता में भारतीय पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इस दौरान कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने का चीन के प्रयास और पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रखा पर उसका आक्रामक व्यवहार भी शामिल है।
Wheels up for my trip to India, Sri Lanka, Maldives, and Indonesia. Grateful for the opportunity to connect with our partners to promote a shared vision for a free and open Indo-Pacific composed of independent, strong, and prosperous nations: US Secretary of State, Mike Pompeo pic.twitter.com/Ugx8KZ92Ae
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) October 25, 2020
पिछले कुछ महीनों से अमेरिका कई मुद्दों को लेकर चीन पर हमलावर रहा है। इसमें भारत के साथ सीमा विवाद, दक्षिण चीन सागर में इसकी सैन्य उग्रता, हांगकांग में सरकार विरोधी प्रदर्शनों से निपटने के तरीके और कोरोना वायरस महामारी जैसे मुद्दे शामिल हैं। कुछ वर्षों से भारत-अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों में भी तेजी आई है।
इस टू प्लस टू वार्ता के साथ पोम्पियो और एस्पर अपने भारतीय समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका के रक्षा मंत्री एस्पर को सोमवार की दोपहर रायसीना हिल्स के साउथ ब्लॉक के लॉन में सलामी गारद पेश किया जाएगा।
उम्मीद है कि दोनों पक्ष काफी समय से लंबित बेका (बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट) को भी अंतिम रूप देंगे ताकि द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और मजबूत बनाया जा सके। बेका के तहत दोनों देशों के बीच अत्याधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी, साजो-सामान और भूस्थानिक मानचित्रों का आदान-प्रदान करना शामिल है।