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हैकरों से अमेरिका ने वापस वसूली फिरौती, लेकिन मंडरा रहा है साइबर हमलों का खतरा

Tue, 08 Jun 2021 04:45 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 08 Jun 2021 04:45 PM IST
सार

अमेरिका में कुछ समय पहले न्याय मंत्रालय के तहत आपराधिक साइबर हमलों की जांच के लिए डिजिटल फिरौती टास्कफोर्स का गठन किया गया था। डार्कसाइड से जुड़े व्यक्तियों को फिरौती लौटाने के लिए मजबूर करना इस टास्कफोर्स की पहली कामयाबी है...

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US Secretary of State Antony Blinken told Joe Biden would raise the issue in talks with Russian President Vladimir Putin next week
एफबीआई - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

यह संभवततया पहली बार हुआ है कि किसी देश ने साइबर हमला करने वाले अपराधी गुट को दी गई फिरौती वापस करने को मजबूर किया हो। इसे अमेरिका की एक बड़ी कामयाबी माना जाएगा। लेकिन इस बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई की एक ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि देश पर साइबर हमलों का एक बड़ा खतरा उस पर मंडरा रहा है।

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अमेरिका पूर्वी तटीय राज्यों में पिछले महीने साइबर हमले के कारण गैस की सप्लाई कई दिनों तक रुकी रही थी। ये हमला डार्कसाइड नाम के एक गुट ने किया था, जिसने कहा था कि उसका किसी देश से संबंध नहीं है। उसका मकसद सिर्फ फिरौती वसूल करना है। अमेरिकी सरकार ने ये फिरौती चुकाई थी। तब जाकर उस गुट ने पाइपलाइन के कंप्यूटर संचालित सप्लाई सिस्टम को अपने रैनसमवेयर अटैक से मुक्त किया था। सोमवार को अमेरिका के न्याय मंत्रालय ने एलान किया कि डार्कसाइड को बिटकॉइन के जरिए हुए लगभग 23 लाख डॉलर के भुगतान को वापस जब्त कर लिया है। इस मामले में कुल 44 लाख डॉलर की फिरौती दी गई थी।   
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डार्कसाइड ने कॉलोनियल पाइपलाइन कंपनी को निशाना बनाया था। बाद में इस हमले की जांच अमेरिकी की खुफिया एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (एफबीआई) ने की। फिरौती का भुगतान डार्कसाइड से जुड़े कुछ व्यक्तियों को किया गया था। उन व्यक्तियों को ही बाद में उस रकम को वापस करने को मजबूर किया गया। एफबीआई ने कहा है कि डार्कसाइड मैलवेयर (एक प्रकार के सॉफ्टवेयर) के जरिए हैकिंग करती है। उसने कुछ दूसरे अपराधी हैकरों को भी इसे उपलब्ध कराया है।
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अमेरिका में कुछ समय पहले न्याय मंत्रालय के तहत आपराधिक साइबर हमलों की जांच के लिए डिजिटल फिरौती टास्कफोर्स का गठन किया गया था। डार्कसाइड से जुड़े व्यक्तियों को फिरौती लौटाने के लिए मजबूर करना इस टास्कफोर्स की पहली कामयाबी है। कोलोनियल पाइपलाइन कंपनी के सीईओ जोसेफ ब्लाउंट ने पिछले महीने अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि कंपनी ने 44 लाख डॉलर की फिरौती दी थी। उनके मुताबिक कंपनी ने फिरौती देने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि उसे नहीं मालूम था कि हैकरों ने किस हद तक उसके सिस्टम में पैठ बना ली है और उससे मुक्त होने में कितना वक्त लगेगा।

एफबीआई और नए बने टास्कफोर्स ने अपेक्षाकृत तेज गति से हैकरों की पहचान कर ली। उनसे फिरौती की रकम आशिंक रूप से वापस ले लेना एक बड़ी कामयाबी है। लेकिन एफबीआई की जांच से यह भी सामने आया है कि आपराधिक साइबर हमले अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं। हैकरों ने ऐसी क्षमता हासिल कर ली है, जिसेस वे अमेरिका में भोजन, गैस और पानी की सप्लाई और अस्पताल और परिवहन की व्यवस्थाओं निशाना बना सकते हैं।

एफबीआई ने बीते रविवार साइबर हमलों की तुलना नाइन इलेवन (11 सितंबर 2001 को हुए आतंकवादी हमलों) से करते हुए कहा था कि हैकरों से देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने सोमवार को एक संसदीय समिति के सामने कहा था कि राष्ट्रपति जो बाइडन अगले हफ्ते रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के साथ होने वाली बातचीत में इस मसले को उठाएंगे। गौरतलब है कि अमेरिका का आरोप है कि डार्कसाइड को चलाने वाले लोग रूसी भाषी हैं।


इसके पहले अमेरिकी की ऊर्जा मंत्री जेनिफर ग्रैनहोल्म ने टीवी चैनल सीएनएन से बातचीत में देश को आगाह किया था कि ‘दुर्भावना रखने वाली’ कुछ ताकतों की नजर अमेरिका की गैस पाइलाइन, सरकारी एजेंसियों, फ्लोरिडा की जल प्रणाली, स्कूलों, हेल्थ केयर संस्थानों आदि पर है। उन्होंने कहा था कि ऊर्जा क्षेत्र और प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों आदि पर साइबर हमलों की लगातार कोशिश हो रही है।

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