US Sanctions on China: चीन पर लगाए अमेरिका के चिप प्रतिबंध की ताइवान पर पड़ी गहरी मार
US Sanctions on China: जानकारों के मुताबिक अमेरिका ने पिछले अक्तूबर में चीन पर चिप और सेमीकंडक्टर संबंधी जो प्रतिबंध लगाए, ताइवान उससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। चिप उद्योग में ताइवान दुनिया में नंबर एक देश है। अक्तूबर के बाद से ताइवान से चीन के लिए चिप के निर्यात में भारी गिरावट आई है...
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चीन के खिलाफ छेड़े गए अमेरिका के व्यापार युद्ध की गहरी मार ताइवान पर पड़ी है। ताजा जारी आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में ताइवान के निर्यात में भारी गिरावट आई। यह गिरावट 2022 के जनवरी की तुलना में 19.3 फीसदी दर्ज हुई। इसके पहले दिसंबर में निर्यात में साल भर पहले की तुलना 23.2 फीसदी गिरावट दर्ज हुई थी।
जानकारों के मुताबिक अमेरिका ने पिछले अक्तूबर में चीन पर चिप और सेमीकंडक्टर संबंधी जो प्रतिबंध लगाए, ताइवान उससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। चिप उद्योग में ताइवान दुनिया में नंबर एक देश है। अक्तूबर के बाद से ताइवान से चीन के लिए चिप के निर्यात में भारी गिरावट आई है। वेबसाइट एशिया टाइम्स पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक 2009 के बाद चीन के लिए ताइवान से इंटीग्रेटेड सर्किट चिप्स के निर्यात में इतनी गिरावट कभी नहीं आई थी। अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद ताइवानी कंपनियों को चीन और हांगकांग से मिलने वाले ऑर्डर में 45.9 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।
एशिया टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों से नुकसान जापान और दक्षिण कोरियाई कंपनियों को भी हुआ है। इससे जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के आर्थिक सुधार पटरी से उतर गए हैं। इस कारण उनकी लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है। किशिदा ने चीन पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों का समर्थन किया था। उस कारण निकॉन कॉर्प, टोक्यो इलेक्ट्रॉन और जापान की अन्य टेक कंपनियों को चीन के साथ अपना चिप कारोबार रोकना पड़ा है।
लेकिन सबसे खराब असर ताइवान पर पड़ा है। 2022 की आखिरी तिमाही में ताइवान की अर्थव्यवस्था में 0.86 फीसदी की सिकुड़न आई। 2008-09 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद किसी तिमाही में ताइवान की अर्थव्यवस्था इतनी नहीं सिकुड़ी थी। ताइवान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने कहा है कि निर्यात बढ़ने की फिलहाल कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है- ‘वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के जोखिम अभी भी बने हुए हैं, जिसका असर ताइवान को निर्यात के लिए मिलने वाले ऑर्डरों पर पड़ सकता है।’
मंत्रालय के सांख्यिकी विभाग के प्रमुख हुआंग यू-लिंग के मुताबिक 2000 कंपनियों के बीच एक सर्वे हुआ, जिनमें से 70 फीसदी ने कहा कि उन्हें चीन से ज्यादा ऑर्डर मिलने की संभावना नहीं है। इस आधार पर मंत्रालय ने अनुमान लगाया है कि फरवरी 2022 की तुलना में इस फरवरी में ताइवान के निर्यात में 10 फीसदी तक गिरावट आ सकती है।
एचएसबीसी बैंक के अर्थशास्त्री फ्रेडरिक नियुमैन ने कहा है- ‘ताइवान की वैश्विक टेक सप्लाई चेन में खास भूमिका है, इसलिए वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर की मुश्किलों का ताइवान पर खास असर होगा।’
उधर दक्षिण कोरिया की टेक कंपनियों को मिल रहे ऑर्डरों में भी भारी गिरावट आई है। इस कारण सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी कंपनियों ने अपने मुनाफे के अनुमान घटा दिए हैं। एशिया टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण कोरिया की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का सबसे बड़ा बाजार चीन था। उसके बूते दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था में इस इंडस्ट्री का सर्व-प्रमुख योगदान रहा है। लेकिन अब सूरत बदल गई है।