एंटी शिप बैलिस्टिक मिसाइलें: चीनी नौसेना की क्षमताओं पर ताजा रिपोर्ट से अमेरिकी जानकारों के हुए कान खड़े
कई अमेरिकी विश्लेषकों ने ताइवान जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने की सलाह दी है। लेकिन अंदेशा यह है कि अगर अमेरिका ने ऐसा करना शुरू किया, तो चीन भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है। उससे दोनों देशों के बीच सैनिक टकराव की स्थिति पैदा हो जाएगी...
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अमेरिकी संसद से जुड़ी कॉन्ग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की एक रिपोर्ट ने अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों के कान खड़े कर दिए हैँ। हालांकि सीआरएस ने ये रिपोर्ट बीते आठ मार्च को ही सौंप दी थी, लेकिन इसके बारे में मीडिया में रिपोर्ट अब आई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने ऐसी जहाज भेदी (एंटी शिप) बैलिस्टिक मिसाइलें (एएसबीएम) तैयार कर ली है, जो चलते-फिरते वाहनों पर सटीक निशाना साध सकती है। चीन अपने तट से समुद्र में एक हजार किलोमीटर दूरी तक ऐसा हमला करने में सक्षम हो गया है।
हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन बना रहा चीन
रिपोर्ट में कहा गया है- ‘दिसंबर 2020 में अमेरिका की इंडो-पैसिफिक कमान के कमांडर एडमिरल फिलिप डेविडसन ने पहली बार ये पुष्टि की थी कि चीन की सेना ने चलते हुए जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइल दागने का सफल परीक्षण किया है।’ रिपोर्ट में इस खबर का भी जिक्र है कि चीन हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन बना रहा है। अगर इन वाहनों को एएसबीएम के साथ जोड़ दिया गया, तो फिर चीनी मिसाइलों को इंटरसेप्ट (हमले के बाद रोक) कर पाना और भी अधिक कठिन हो जाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक सीआरएस की रिपोर्ट से पहली बार चीन की ऐसी क्षमताओं की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में अमेरिकी सेना के कई कमांडरों और अन्य बड़े अधिकारियों का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि अगर चीन इन मिसाइलों के जरिए अपने तट से अमेरिकी बेड़ों को 1,500 किलोमीटर दूर रखने में सफल हो जाता है, तो अमेरिका के पास ताइवान की रक्षा करने का कोई प्रभावी उपाय नहीं बचेगा।
बारूदी सुरंगें बिछाने की सलाह
वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी आशंकाओं के कारण ही कई अमेरिकी विश्लेषकों ने ताइवान जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने की सलाह दी है। इनमें ‘स्ट्रेटेजी ऑफ डिनायल’ नाम की किताब के लेखक एलब्रिज कोल्बी भी शामिल हैं। लेकिन अंदेशा यह है कि अगर अमेरिका ने ऐसा करना शुरू किया, तो चीन भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है। उससे दोनों देशों के बीच सैनिक टकराव की स्थिति पैदा हो जाएगी।
वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मुताबिक फिलहाल चीन के पास 750 से 1500 तक छोटी दूरी तक मार कर सकने वाली एएसबीएम हैं। उसके पास 150 से 450 तक मध्य दूरी तक मार करने में सक्षम ऐसी मिसाइलें हैं। इन दोनों तरह की मिसाइलों को दागने के लिए उसने 150- 150 लॉन्चर तैयार कर रखे हैं। चीन के पास मौजूद लंबी दूर तक मार करने वाली ऐसी मिसाइलों की संख्या 80 से 100 तक मानी जा रही है। इन मिसाइलों को दागने के लिए उसके पास 80 लॉन्चर हैं। इस थिंक टैंक का अनुमान है कि चीन के पास लंबी दूरी तक मार करने वाली डीएफ-26 मिसाइलें भी हैं। ये मिसाइलें चार हजार किलोमीटर दूरी तक निशाना साध सकती हैं।
सीआरएस की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि चीनी नौसेना अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। इससे पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के लिए अपने युद्ध मकसदों को हासिल करना आसान नहीं रह गया है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2030 तक चीन के पास 425 लड़ाकू जहाज मौजूद होंगे, जबकि उस समय अमेरिका के पास ऐसे जहाजों की संख्या 300 के करीब ही होगी।