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US: चीन के छात्रों पर जासूसी का आरोप, विश्वविद्यालयों से चाइनीज छात्रवृत्ति को खत्म करने की मांग
Thu, 10 Jul 2025 08:31 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 10 Jul 2025 08:31 AM IST
सार
कई विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि उन्होंने चीन की सरकार द्वारा समर्थित छात्रवृत्ति कार्यक्रम को बंद करने की योजना शुरू कर दी है। सांसदों ने विश्वविद्यालयों से चीनी घुसपैठ की जांच करने की भी मांग की है।
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अमेरिकी विश्वविद्यालयों में चीनी छात्र
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
अमेरिका की सत्ताधारी पार्टी रिपब्लिकन के कई सांसदों ने विश्वविद्यालयों से चीन समर्थित छात्रवृत्ति कार्यक्रम को खत्म करने की मांग की है। रिपब्लिकन सांसदों का दावा है कि चीनी छात्रवृत्ति कार्यक्रम की आड़ में चीन ने अमेरिकी तकनीक चुराने का कुटिल तंत्र बनाया हुआ है। रिपब्लिकन सांसदों ने सात विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा है, जिनमें नोट्रे डेम विश्वविद्यालय, डार्टमाउथ भी शामिल हैं। चीन द्वारा समर्थित छात्रवृत्ति कार्यक्रम के जरिए हर साल सैंकड़ों चीनी छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों से स्नातक होते हैं।
चीनी छात्रों पर प्रौद्योगिकी चुराने का आरोप
चीनी छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत चीनी छात्रों को अमेरिकी विश्वविद्यालयों से स्नातक होने के बाद चीन वापस जाना होता है और वहां दो साल काम करना होता है। कार्यक्रम के तहत चीन की सरकार अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए 50 फीसदी खर्च वहन करती हैं और साथ ही डॉक्ट्रेट की पढ़ाई करने के लिए स्टाइपेड भी देती है। मंगलवार को रिपब्लिकन सांसदों द्वारा भेजे गए पत्र में चीन की इस योजना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया। अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन में रिपब्लिकन सांसद जॉन मूलेनार की अध्यक्षता वाली समिति ने पत्र में लिखा कि 'सीएससी कार्यक्रम, अमेरिकी और चीनी संस्थानों के बीच एक संयुक्त छात्रवृत्ति कार्यक्रम होने का दावा करता है। हालांकि, वास्तव में यह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा बनाया गया एक प्रौद्योगिकी चुराने का प्रयास है, जो अमेरिकी संस्थानों का शोषण करता है और सीधे तौर पर चीन के सैन्य और वैज्ञानिक विकास को मदद करता है।'
ये भी पढ़ें- Donald Trump: नासा के अंतरिम प्रशासक नियुक्त किए गए सीन डफी, राष्ट्रपति ट्रंप ने किए एलान
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रिपब्लिकन सांसदों ने अमेरिका के सात विश्वविद्यालयों को लिखा पत्र
जिन सात विश्वविद्यालयों को रिपब्लिकन सांसदों ने पत्र लिखा है, उनमें नोट्रे डेम विश्वविद्यालय, डार्टमाउथ, यूनिवर्सिटी ऑफ टेनेसी, टेंपल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डेविस, इर्विन और रिवरसाइड स्थित कैंपस शामिल हैं। कई विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि उन्होंने चीन की सरकार द्वारा समर्थित छात्रवृत्ति कार्यक्रम को बंद करने की योजना शुरू कर दी है। सांसदों ने विश्वविद्यालयों से चीनी घुसपैठ की जांच करने की भी मांग की है। साथ ही ये भी मांग की गई है कि चीन की छात्रवृत्ति योजना के तहत पढ़ाई करने वाले चीनी छात्र क्या अमेरिकी सरकार की फंडिंग से होने वाले रिसर्च कार्यक्रमों से तो नहीं जुड़े हैं, इसकी भी जांच की जाए।
ट्रंप प्रशासन ने भी बढ़ाई चीनी छात्रों के खिलाफ सख्ती
अमेरिका की ट्रंप सरकार पहले ही अमेरिका पढ़ाई के लिए आने वाले चीनी छात्रों की सघन जांच कर रही है। ट्रंप ने चीन की नागरिक-सैन्य रणनीति से जुड़े छात्रों को भी वीजा नहीं देने का फैसला किया है। अहम और संवेदनशील विषयों की पढ़ाई करने वाले चीनी छात्रों का भी वीजा रद्द करने की बात ट्रंप प्रशासन ने कही है। हालांकि कई विश्वविद्यालयों ने चेताया है कि सभी चीनी छात्र जासूसी में शामिल नहीं हैं। गौरतलब है कि चीन से हर साल लाखों छात्र अमेरिका पढ़ाई के लिए जाते हैं। साल 2023-24 में भी 2,70,000 से ज्यादा चीनी छात्र पढ़ाई के लिए अमेरिका पहुंचे और अधिकतर की पढ़ाई का खर्च उनके परिजनों ने उठाया न कि चीन की सरकार ने। कई छात्र अभी भी अमेरिका में रहकर काम कर रहे हैं और कई वापस चीन लौट चुके हैं। रिपब्लिकन सांसदों ने कहा कि उनका उद्देश्य चीन और अमेरिकी विश्वविद्यालयों की साझेदारी को खत्म करना है। कई विश्वविद्यालों ने इस दिशा में कदम उठा भी लिए हैं। बीते साल एक संसदीय रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अमेरिकी सरकार ने रिसर्च में जो करोड़ों डॉलर खर्च किए, उनसे चीन को फायदा हुआ और खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर तकनीक, परमाणु हथियार जैसे क्षेत्रों में चीन की प्रौद्योगिकी बेहतर हुई।
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चीनी छात्रों पर प्रौद्योगिकी चुराने का आरोप
चीनी छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत चीनी छात्रों को अमेरिकी विश्वविद्यालयों से स्नातक होने के बाद चीन वापस जाना होता है और वहां दो साल काम करना होता है। कार्यक्रम के तहत चीन की सरकार अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए 50 फीसदी खर्च वहन करती हैं और साथ ही डॉक्ट्रेट की पढ़ाई करने के लिए स्टाइपेड भी देती है। मंगलवार को रिपब्लिकन सांसदों द्वारा भेजे गए पत्र में चीन की इस योजना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया। अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन में रिपब्लिकन सांसद जॉन मूलेनार की अध्यक्षता वाली समिति ने पत्र में लिखा कि 'सीएससी कार्यक्रम, अमेरिकी और चीनी संस्थानों के बीच एक संयुक्त छात्रवृत्ति कार्यक्रम होने का दावा करता है। हालांकि, वास्तव में यह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा बनाया गया एक प्रौद्योगिकी चुराने का प्रयास है, जो अमेरिकी संस्थानों का शोषण करता है और सीधे तौर पर चीन के सैन्य और वैज्ञानिक विकास को मदद करता है।'
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रिपब्लिकन सांसदों ने अमेरिका के सात विश्वविद्यालयों को लिखा पत्र
जिन सात विश्वविद्यालयों को रिपब्लिकन सांसदों ने पत्र लिखा है, उनमें नोट्रे डेम विश्वविद्यालय, डार्टमाउथ, यूनिवर्सिटी ऑफ टेनेसी, टेंपल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डेविस, इर्विन और रिवरसाइड स्थित कैंपस शामिल हैं। कई विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि उन्होंने चीन की सरकार द्वारा समर्थित छात्रवृत्ति कार्यक्रम को बंद करने की योजना शुरू कर दी है। सांसदों ने विश्वविद्यालयों से चीनी घुसपैठ की जांच करने की भी मांग की है। साथ ही ये भी मांग की गई है कि चीन की छात्रवृत्ति योजना के तहत पढ़ाई करने वाले चीनी छात्र क्या अमेरिकी सरकार की फंडिंग से होने वाले रिसर्च कार्यक्रमों से तो नहीं जुड़े हैं, इसकी भी जांच की जाए।
ट्रंप प्रशासन ने भी बढ़ाई चीनी छात्रों के खिलाफ सख्ती
अमेरिका की ट्रंप सरकार पहले ही अमेरिका पढ़ाई के लिए आने वाले चीनी छात्रों की सघन जांच कर रही है। ट्रंप ने चीन की नागरिक-सैन्य रणनीति से जुड़े छात्रों को भी वीजा नहीं देने का फैसला किया है। अहम और संवेदनशील विषयों की पढ़ाई करने वाले चीनी छात्रों का भी वीजा रद्द करने की बात ट्रंप प्रशासन ने कही है। हालांकि कई विश्वविद्यालयों ने चेताया है कि सभी चीनी छात्र जासूसी में शामिल नहीं हैं। गौरतलब है कि चीन से हर साल लाखों छात्र अमेरिका पढ़ाई के लिए जाते हैं। साल 2023-24 में भी 2,70,000 से ज्यादा चीनी छात्र पढ़ाई के लिए अमेरिका पहुंचे और अधिकतर की पढ़ाई का खर्च उनके परिजनों ने उठाया न कि चीन की सरकार ने। कई छात्र अभी भी अमेरिका में रहकर काम कर रहे हैं और कई वापस चीन लौट चुके हैं। रिपब्लिकन सांसदों ने कहा कि उनका उद्देश्य चीन और अमेरिकी विश्वविद्यालयों की साझेदारी को खत्म करना है। कई विश्वविद्यालों ने इस दिशा में कदम उठा भी लिए हैं। बीते साल एक संसदीय रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अमेरिकी सरकार ने रिसर्च में जो करोड़ों डॉलर खर्च किए, उनसे चीन को फायदा हुआ और खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर तकनीक, परमाणु हथियार जैसे क्षेत्रों में चीन की प्रौद्योगिकी बेहतर हुई।
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