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लॉस एंजेलिस में बवाल: ट्रंप ने अमेरिका की धरती पर ही क्यों तैनात कर दी सेना, 60 साल बाद किस परंपरा को तोड़ा?
Tue, 10 Jun 2025 08:35 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 10 Jun 2025 08:35 PM IST
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सार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अवैध प्रवासियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को पहली बार कड़ी चुनौती मिलती दिख रही है। दरअसल, अमेरिकी इमिग्रेशन और कस्टम प्रवर्तन विभाग (आईसीई) के अधिकारियों ने हालिया दिनों में सबसे अमीर राज्य कैलिफोर्निया में अवैध प्रवासियों को पकड़ने और अप्रवासियों के दस्तावेजों की जांच के लिए अभियान चलाया। यह अभियान कैलिफोर्निया के लॉस एंजेलिस तक पहुंच गया, जिसे अमेरिका में रहने वाले अप्रवासियों का अहम केंद्र माना जाता है। ऐसे में आईसीई के अधिकारियों के खिलाफ शहर में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। हजारों की संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन शुरू कर दिए। कुछ जगहों पर आगजनी और हिंसा की घटनाएं भी दर्ज की गईं। अब ट्रंप ने इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए अमेरिका की जमीन पर ही सेना के जवानों को उतारने का फैसला किया है।
ट्रंप के अमेरिकी धरती पर सैन्यबलों को उतारने के फैसले को लेकर पूर्व सैनिकों और कानूनी मामलों के जानकारों ने चिंताएं जताई हैं। हालांकि, ट्रंप ने आलोचकों को अनसुना कर दिया है। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर लॉस एंजेलिस में इन प्रदर्शनों के भड़कने की वजह क्या है? शहर में ताजा हालात क्या हैं और ट्रंप ने अमेरिकी धरती पर ही सेना को उतारने का फैसला क्यों किया है? ऐसा पहले कब हुआ है? अमेरिका के राष्ट्रपति और कैलिफोर्निया के गवर्नर के बीच इसे लेकर क्यों विवाद उठा है? और आखिर ट्रंप के सेना उतारने के फैसले से पूर्व सैन्यकर्मी और कानून के जानकार चिंतित क्यों हैं? आइये जानते हैं...
पहले जानें- लॉस एंजेलिस में क्यों भड़के प्रदर्शन?
अवैध प्रवासियों को पकड़ने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद से ही अमेरिका में आव्रजन के रिकॉर्ड रखने वाली संघीय एजेंसी- इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट ने कई राज्यों में छापेमारी की है। अमेरिका के सबसे अमीर कैलिफोर्निया राज्य में भी आईसीई अधिकारियों की तरफ से अवैध प्रवासियों के खिलाफ छापेमारी जारी थी। रिपोर्ट्स की मानें तो आईसीई के अधिकारी अवैध प्रवासियों को पकड़ने वाली छापेमारी के दौरान कई बार वैध तरीके से अमेरिका में रह रहे प्रवासियों की भी तलाशी लेते थे और इन पर सार्वजनिक तौर पर बल प्रयोग करने लगे।
ऐसा एक मौका तब आया, जब करीब 238 लोगों को वेनेजुएला के एक गैंग का सदस्य बताकर सीधा अल-साल्वाडोर भेज दिया गया, जहां उन्हें अमेरिका की ही बनाई बड़ी जेल में रखा गया। इस मामले में कोर्ट ने ट्रंप सरकार को फटकार भी लगाई है।
अवैध प्रवासियों को पकड़ने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद से ही अमेरिका में आव्रजन के रिकॉर्ड रखने वाली संघीय एजेंसी- इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट ने कई राज्यों में छापेमारी की है। अमेरिका के सबसे अमीर कैलिफोर्निया राज्य में भी आईसीई अधिकारियों की तरफ से अवैध प्रवासियों के खिलाफ छापेमारी जारी थी। रिपोर्ट्स की मानें तो आईसीई के अधिकारी अवैध प्रवासियों को पकड़ने वाली छापेमारी के दौरान कई बार वैध तरीके से अमेरिका में रह रहे प्रवासियों की भी तलाशी लेते थे और इन पर सार्वजनिक तौर पर बल प्रयोग करने लगे।
ऐसा एक मौका तब आया, जब करीब 238 लोगों को वेनेजुएला के एक गैंग का सदस्य बताकर सीधा अल-साल्वाडोर भेज दिया गया, जहां उन्हें अमेरिका की ही बनाई बड़ी जेल में रखा गया। इस मामले में कोर्ट ने ट्रंप सरकार को फटकार भी लगाई है।
संघीय एजेंसी के अधिकारी कुछ इसी तरह का बर्ताव करते हुए शुक्रवार (6 जून) को लॉस एंजेलिस में भी अवैध प्रवासियों को पकड़ने की कोशिश करने लगे। आईसीई अफसरों के इस रवैये पर लॉस एंजेलिस की मेयर कैरेन बेस ने साफ किया था कि इससे आम लोगों के मन में आतंक पैदा हो सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज किया। इस बीच शुक्रवार को ही देर रात लॉस एंजेलिस के पैरामाउंट इलाके में एक हार्डवेयर स्टोर पर फेडरल एजेंट्स ने छापेमारी की। इस स्टोर से कई प्रवासी गिरफ्तार हुए। स्थानीय लोगों की शिकायत थी कि आईसीई के अधिकारियों की यह छापेमारी सैन्य अंदाज में हुई। कई सरकारी अधिकारियों हथियार लिए हुए थे और कुछ ने भीड़ को नियंत्रित करने वाले डंडे और शील्ड ली हुई थीं। बताया गया है कि इन अधिकारियों को देखते ही पूरे इलाके में भगदड़ मच गई और लोग सकते में आ गए। आईसीई ने बाद में बताया कि शुक्रवार को 118 लोगों को आव्रजन से जुड़े अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, उसने किसी हार्डवेयर स्टोर पर छापेमारी की बात से इनकार किया।
इन घटनाओं के कई वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। अमर उजाला इन वीडियोज की पुष्टि नहीं करता। कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया कि गिरफ्तार किए गए अप्रवासियों को लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में एडवर्ड आर रॉयबल फेडरल बिल्डिंग में रखा गया है। इसके बाद प्रदर्शनकारी सैकड़ों की संख्या में इस इमारत के बाहर ही जुट गए। इन लोगों ने बिल्डिंग के गेटों को बंद कर दिया और गिरफ्तार लोगों को छुड़ाने के लिए नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान कुछ उपद्रवियों ने आईसीई की गाड़ियों को रोकने की कोशिश की और अधिकारियों से भिड़ गए।
बाद में जब लॉस एंजेलिस पुलिस विभाग (एलएपीडी) ने प्रदर्शनकारियों को बिल्डिंग से दूर हटने और वापस लौटने की सलाह दी तो लोग भड़क गए। पुलिसकर्मियों ने उन्हें नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और रबड़ बुलेट से फायरिंग की। हालांकि, इससे स्थितियां नियंत्रण में आने की जगह और बिगड़ गईं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी की। आईसीई एजेंट्स ने भी रबड़ बुलेट्स और मिर्च स्प्रे से जवाब दिया। एक समय हालात ऐसे हो गए कि कई जगहों पर आगजनी देखी गई। हालांकि, जब एलएपीडी ने एलान किया कि प्रदर्शन अब गैरकानूनी जुटाव के वर्ग में रखे जाएंगे और घर न लौटने वालों को गिरफ्तार किया जाएगा, वैसे ही स्थिति नियंत्रण में लौटने लगी। हालांकि, चीजों को पूरी तरह सामान्य होने में समय लग गया।
लॉस एंजेलिस में नेशनल गार्ड तैनात: कैलिफोर्निया ट्रंप के खिलाफ; राष्ट्रपति ने दी गवर्नर की गिरफ्तारी की सलाह
लॉस एंजेलिस में नेशनल गार्ड तैनात: कैलिफोर्निया ट्रंप के खिलाफ; राष्ट्रपति ने दी गवर्नर की गिरफ्तारी की सलाह
फिर हुई पूरे घटनाक्रम में ट्रंप की एंट्री
लॉस एंजेलिस में जारी इस तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शहर में नेशनल गार्ड भेजने का फैसला कर लिया। ट्रंप का यह फैसला चौंकाने वाला इसलिए था, क्योंकि यह बिना कैलिफोर्निया के गवर्नर की सहमति के लिया गया था। ट्रंप ने खुद ही अपनी राष्ट्रपति की शक्तियों का प्रयोग करते हुए नेशनल गार्ड को लॉस एंजेलिस में तैनाती का आदेश दे दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति इन शक्तियों का इस्तेमाल तभी करते हैं, जब उन्हें अमेरिकी सरकार के खिलाफ बगावत या बगावत का खतरा नजर आए। ट्रंप के आदेश के बाद रविवार (8 जून) को 2000 नेशनल गार्ड लॉस एंजेलिस में तैनात हो गए।
लॉस एंजेलिस में जारी इस तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शहर में नेशनल गार्ड भेजने का फैसला कर लिया। ट्रंप का यह फैसला चौंकाने वाला इसलिए था, क्योंकि यह बिना कैलिफोर्निया के गवर्नर की सहमति के लिया गया था। ट्रंप ने खुद ही अपनी राष्ट्रपति की शक्तियों का प्रयोग करते हुए नेशनल गार्ड को लॉस एंजेलिस में तैनाती का आदेश दे दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति इन शक्तियों का इस्तेमाल तभी करते हैं, जब उन्हें अमेरिकी सरकार के खिलाफ बगावत या बगावत का खतरा नजर आए। ट्रंप के आदेश के बाद रविवार (8 जून) को 2000 नेशनल गार्ड लॉस एंजेलिस में तैनात हो गए।
अमेरिका में 1965 के बाद यह पहली बार था, जब किसी राष्ट्रपति ने गवर्नर की सहमति के बिना ही किसी राज्य में नेशनल गार्ड भेजने का फैसला किया हो। 1965 में तत्कालीन राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन ने अलाबामा में नागरिक अधिकारों की मांग वाले एक मार्च की सुरक्षा के लिए नेशनल गार्ड को भेजने का फैसला किया था।
राष्ट्रपति बनाम गवर्नर में बदला लॉस एंजेलिस में प्रदर्शनों का मामला
गौरतलब है कि अमेरिका में इस वक्त डोनाल्ड ट्रंप की सरकार है, जो कि रिपब्लिकन पार्टी के नेता हैं। दूसरी तरफ कैलिफोर्निया में डेमोक्रेटिक पार्टी के गवर्नर हैं, जो कि प्रतिद्वंद्वी पक्ष है। ट्रंप के नेशनल गार्ड तैनात करने के आदेश के बाद से ही इसे एक विपक्षी पार्टी के गवर्नर की ताकत को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा गया। शुरुआत में तो गवर्नर गेविन न्यूसम ने ट्रंप से नेशनल गार्ड को वापस लेने की अपील की, हालांकि बाद में उन्होंने राष्ट्रपति के फैसले को तानाशाही राष्ट्रपति की मनमानी करार दे दिया। इतना ही नहीं न्यूसम ने एलान किया कि वह एक राज्य की मर्जी के बिना वहां संघीय बल भेजने के लिए राष्ट्रपति पर केस करेंगे।
राष्ट्रपति बनाम गवर्नर में बदला लॉस एंजेलिस में प्रदर्शनों का मामला
गौरतलब है कि अमेरिका में इस वक्त डोनाल्ड ट्रंप की सरकार है, जो कि रिपब्लिकन पार्टी के नेता हैं। दूसरी तरफ कैलिफोर्निया में डेमोक्रेटिक पार्टी के गवर्नर हैं, जो कि प्रतिद्वंद्वी पक्ष है। ट्रंप के नेशनल गार्ड तैनात करने के आदेश के बाद से ही इसे एक विपक्षी पार्टी के गवर्नर की ताकत को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा गया। शुरुआत में तो गवर्नर गेविन न्यूसम ने ट्रंप से नेशनल गार्ड को वापस लेने की अपील की, हालांकि बाद में उन्होंने राष्ट्रपति के फैसले को तानाशाही राष्ट्रपति की मनमानी करार दे दिया। इतना ही नहीं न्यूसम ने एलान किया कि वह एक राज्य की मर्जी के बिना वहां संघीय बल भेजने के लिए राष्ट्रपति पर केस करेंगे।
ट्रंप ने और बढ़ाई लॉस एंजेलिस में हलचल
कैलिफोर्निया के गवर्नर से विवाद के बीच लॉस एंजेलिस के अधिकतर इलाकों में रविवार के बाद से लगातार शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी हैं। कुछ जगहों पर उपद्रव की खबरें सामने आईं। ऐसे में न्यूसम ने राज्य के 800 पुलिसकर्मियों को लॉस एंजेलिस भेजने का फैसला किया उन्होंने साफ किया कि स्थानीय सुरक्षा टीमों के जरिए वे अपने समुदाय की रक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं।
हालांकि, इसी दौरान अमेरिकी सेना की पूर्वी कमान ने एलान किया कि वह संघीय कर्मियों और संपत्तियों को बचाने के लिए 700 मरीन्स को भेजने जा रही है। इस पर गेविन न्यूसम के दफ्तर की तरफ से कहा गया कि सैन्यकर्मियों की लॉस एंजेलिस में तैनाती बिल्कुल जरूरी नहीं है। न्यूसम ने कहा कि ट्रंप बेवजह स्थिति को और खराब कर रहे हैं। सक्रिय ड्यूटी से जुड़े और बेहतरीन सैन्यकर्मियों को अपने ही देश के एक शहर में अपने ही लोगों के खिलाफ खड़ा करना ठीक नहीं है। इससे स्थिति और खराब हो सकती है।
US: ट्रंप की बढ़ीं मुश्किलें, अप्रवासन नीति के खिलाफ सड़कों पर लोग, लॉस एंजेलिस के एक और शहर में हुई हिंसा
कैलिफोर्निया के गवर्नर से विवाद के बीच लॉस एंजेलिस के अधिकतर इलाकों में रविवार के बाद से लगातार शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी हैं। कुछ जगहों पर उपद्रव की खबरें सामने आईं। ऐसे में न्यूसम ने राज्य के 800 पुलिसकर्मियों को लॉस एंजेलिस भेजने का फैसला किया उन्होंने साफ किया कि स्थानीय सुरक्षा टीमों के जरिए वे अपने समुदाय की रक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं।
हालांकि, इसी दौरान अमेरिकी सेना की पूर्वी कमान ने एलान किया कि वह संघीय कर्मियों और संपत्तियों को बचाने के लिए 700 मरीन्स को भेजने जा रही है। इस पर गेविन न्यूसम के दफ्तर की तरफ से कहा गया कि सैन्यकर्मियों की लॉस एंजेलिस में तैनाती बिल्कुल जरूरी नहीं है। न्यूसम ने कहा कि ट्रंप बेवजह स्थिति को और खराब कर रहे हैं। सक्रिय ड्यूटी से जुड़े और बेहतरीन सैन्यकर्मियों को अपने ही देश के एक शहर में अपने ही लोगों के खिलाफ खड़ा करना ठीक नहीं है। इससे स्थिति और खराब हो सकती है।
US: ट्रंप की बढ़ीं मुश्किलें, अप्रवासन नीति के खिलाफ सड़कों पर लोग, लॉस एंजेलिस के एक और शहर में हुई हिंसा