अमेरिका: राष्ट्रपति बाइडन ने शेफाली राजदान को नीदरलैंड में नामित किया राजदूत
शेफाली राजदान मानवाधिकार निगरानी संस्था के सैन फ्रांसिस्को समिति के अलावा वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी लीडरशिप एंड कैरेक्टर काउंसिल की सदस्य हैं और एमिलीज सूची के लिए राष्ट्रीय निदेशक मंडल में शामिल हैं।
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राष्ट्रपति जो बाइडन ने भारतवंशी राजनीतिक कार्यकर्ता शेफाली राजदान दुग्गल को नीदरलैंड में अपना राजदूत नामित करने की मंशा जाहिर की है। प्रवासी भारतीय 50 वर्षीय दुग्गल मूल रूप से भारत में कश्मीर से हैं। वह सिनसिनाटी, शिकागो, न्यूयॉर्क और बोस्टन में पली बढ़ी हैं। व्हाइट हाउस ने कई अन्य प्रमुख प्रशासनिक और राजनयिक पदों पर नियुक्ति की घोषणा के साथ दुग्गल को लेकर जानकारी दी।
व्हाइट हाउस ने कहा कि दो बच्चों की मां शेफाली एक अनुभवी राजनीतिक कार्यकर्ता, महिला अधिकार की पैरोकार और मानवाधिकार प्रचारक हैं। वे होलोकॉस्ट मेमोरियल संग्रहालय परिषद के लिए पूर्व में राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त की जा चुकी हैं और वेस्टर्न रीजन सलाहकार के रूप में काम कर रही हैं।
शेफाली राजदान मानवाधिकार निगरानी संस्था के सैन फ्रांसिस्को समिति के अलावा वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी लीडरशिप एंड कैरेक्टर काउंसिल की सदस्य हैं और एमिलीज सूची के लिए राष्ट्रीय निदेशक मंडल में शामिल हैं। उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से राजनीति संचार में एमए किया है और मियामी विवि से जनसंचार का भी अध्ययन किया। उन्हें कई नागरिक पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
ओबामा व हिलेरी के चुनाव अभियान से भी जुड़ी रहीं
व्हाइट हाउस ने कहा, शेफाली दुग्गल ने बाइडन के लिए महिलाओं की राष्ट्रीय सह-अध्यक्ष और डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी में उप राष्ट्रीय वित्त अध्यक्ष के रूप में काम किया। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के 2008 के चुनाव अभियान में भी ने सक्रिय थीं और हिलेरी क्लिंटन के राष्ट्रपति चुनाव अभियान से भी जुड़ी थीं।
पूर्व छात्र नेता गेब्रियल बोरिक बने चिली के सबसे युवा राष्ट्रपति
वामपंथी झुकाव वाले पूर्व छात्र नेता गेब्रियल बोरिक ने चिली के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली है। बोरिक ने अपेक्षाकृत विविधतापूर्ण अर्थव्यवस्था होने के बावजूद हाल के वर्षों में असमानता को लेकर बार-बार बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों को झेलने वाले चिली में राजनीतिक और आर्थिक सुधार का संकल्प जताया। दक्षिण अमेरिकी देश के इतिहास में बोरिक (36) सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति हैं।
वह केवल चार साल के थे जब 17 साल की सैन्य तानाशाही के बाद देश में लोकतंत्र बहाल हुआ था, जिसने आधुनिक चिली के लिए आधार तैयार किया। बता दें, चिली को लंबे समय से लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी आर्थिक सफलता वाले देशों में से एक के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन पिछले एक दशक में इसे बार-बार कई बड़े विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा है।