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Hindi News ›   World ›   US Played Tibet card against China US special envoy Robert A Destro met with head of Tibetan exile government

तिब्बती निर्वासित सरकार के प्रमुख से मिले अमेरिकी दूत, चीन तिलमिलाया

Sat, 17 Oct 2020 01:43 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, ल्हासा
एजेंसी, ल्हासा Published by: देव कश्यप Updated Sat, 17 Oct 2020 01:43 AM IST
सार

  • फेसबुक पर फोटो साझा कर लोबसांग सांग्ये ने अमेरिका के प्रति आभार जताया।
  • छह दशक बाद तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख को मिला बुलावा।

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US Played Tibet card against China US special envoy Robert A Destro met with head of Tibetan exile government
रॉबर्ट ए डेस्ट्रो से लोबसांग सांग्ये ने की मुलाकात - फोटो : Facebook@dr.lobsangsangay

विस्तार

अमेरिका में चीन के विरोध के बावजूद अमेरिकी विदेश मंत्रालय के सहायक सचिव रॉबर्ट ए डेस्ट्रो को चीन-तिब्बत के मामलों के लिए विशेष समन्वयक नियुक्त करने के बाद निर्वासित तिब्बती सरकार के राष्ट्रपति लोबसांग सांग्ये को छह दशक में पहली बार विदेश मंत्रालय द्वारा आमंत्रित किया गया है। सांग्ये ने एक ट्वीट में इस बुलावे पर आभार जताते हुए इसे एक बड़ा सम्मान बताया जबकि चीन इस पर तिलमिला गया है।

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इस मुलाकात को लेकर सांग्ये ने फेसबुक पर मुलाकात का फोटो भी साझा किया। उन्होंने तिब्बत के लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए नेता को यात्रा की मंजूरी देने पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय को धन्यवाद कहा। सांग्ये ने एक फेसबुक पोस्ट में यह भी कहा कि अमेरिकी दूत और तिब्बती मुद्दों के लिए अमेरिका के विशेष समन्वयक रॉबर्ट ए डेस्ट्रो के साथ बैठक एक ऐतिहासिक क्षण रही क्योंकि छह दशक में यह मौका पहली बार मिला।
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बता दें कि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने 14 अक्तूबर को ही डेस्ट्रो को तिब्बती मुद्दों के लिए विशेष अमेरिकी समन्वयक नामित किया था। चीन ने बौखलाते हुए तीखी प्रतिक्रिया जताई और तिब्बत को अस्थिर करने के लिए अमेरिकी कार्रवाई को राजनीतिक जालसाजी करार दिया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा है कि अमेरिका उसके आंतरिक मामलों में दखल न दे। 
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दलाई लामा से संवाद बढ़ाएंगे डेस्ट्रो : पोम्पियो
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि चीन-तिब्बत मामलों के विशेष समन्वयक रॉबर्ट डेस्ट्रो चीन के लोगों और दलाई लामा या उनके प्रतिनिधियों के बीच संवाद को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। ऐसा करने से तिब्बत की विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई पहचान की रक्षा की जा सकेगी।


चीन बौखलाया, बैठक को नहीं देंगे मान्यता
तिब्बत 1950 से ही चीन के कब्जे में है और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी तिब्बत के मामले पर अमेरिकी समन्वयक से लगातार बात करने से मना करती रही है। इस पर डेस्ट्रो से तिब्बत के निर्वासित राष्ट्रपति की बैठक को चीन ने मान्यता देने से इनकार किया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा कि चीन दृढ़ता से इसका विरोध करता है और आग्रह करता है कि अमेरिका हमारे अंदरूनी मामलों में दखल न दे।

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