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अमेरिका का सबसे साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन: दो पायलटों के बचाने से छह विमान खोने तक, 36 घंटे में क्या-क्या हुआ?
Mon, 06 Apr 2026 03:41 PM IST
Kirtivardhan Mishra
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Mon, 06 Apr 2026 03:41 PM IST
सार
अमेरिका ने हाल ही में ईरान में एक जबरदस्त रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देते हुए अपने क्रैश हुए फाइटर जेट के दो क्रू सदस्यों- एक पायलट और एक एयरमैन को बाहर निकाल लिया। इस दौरान अमेरिका के परिवहन एयरक्राफ्ट के साथ-साथ एमएच-6 हेलीकॉप्टर तबाह हुए। दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका के ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर को भी निशाना बनाने का दावा किया है।
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ईरान में अमेरिका का बचाव अभियान।
- फोटो : अमर उजाला/AI
विस्तार
अमेरिका के ईरान से अपने दो पायलटों को बचा लाने से जुड़े सैन्य अभियान की पूरी दुनिया में चर्चा है। अमेरिका ने जिन दो वायुसेना कर्मियों को ईरान के अंदरूनी क्षेत्र से निकाला है, वह एक बेहद मुश्किल पहाड़ी क्षेत्र है, जहां किसी भी तरह के सैन्य ऑपरेशन को अंजाम देना काफी मुश्किल है। इसके बावजूद अमेरिकी सेना ने 36 घंटे के अंदर एक बार नहीं, बल्कि दो बार ईरान के इस कठिन क्षेत्र में घुसकर अपने पायलटों को सुरक्षित निकाल लिया।
आइये अब जानते हैं कि अमेरिकी एफ-15ई के ईरानी हमले में क्षतिग्रस्त होने से लेकर दोनों पायलटों को निकालने तक का क्या घटनाक्रम हुआ और इसकी पूरी टाइमलाइन क्या रही...
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आइये अब जानते हैं कि अमेरिकी एफ-15ई के ईरानी हमले में क्षतिग्रस्त होने से लेकर दोनों पायलटों को निकालने तक का क्या घटनाक्रम हुआ और इसकी पूरी टाइमलाइन क्या रही...
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सवाल-1: एफ-15ई क्रैश कब हुआ और पहले पायलट का रेस्क्यू कैसे हुआ?
जवाब: गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात को ईरान ने एक अमेरिकी एफ-15ई लड़ाकू विमान को मार गिराया गया। हमले से ठीक पहले फाइटर जेट में सवार दोनों क्रू मेंबर्स को इजेक्ट (विमान छोड़ना पड़ा) करना पड़ा।
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सवाल-2: कैसे हुआ पहले पायलट का रेस्क्यू?
जवाब: शुक्रवार की सुबह दक्षिण-पश्चिम ईरान में एफ-15ई लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के कुछ ही घंटों (लगभग छह घंटे) के भीतर पहले पायलट का रेस्क्यू कर लिया गया था। हालांकि, इससे जुड़ी जानकारी को काफी समय बाद सार्वजनिक किया गया।बताया गया है कि जमीन पर उतरने के बाद पहला पायलट अपनी सैन्य यूनिट के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ था।
पहले पायलट को सुरक्षित निकालने के लिए तुरंत एक साहसिक अभियान चलाया गया। इस बचाव दल में अमेरिका की सील टीम 6 और स्पेशल फोर्सेज (विशेष बल, एयररेस्क्यूअर्स), अमेरिकी हमलावर विमान और हेलीकॉप्टर शामिल थे। जब रेस्क्यू हेलीकॉप्टर पायलट को निकालने पहुंचा, तो उस पर दुश्मनों ने भारी गोलीबारी की। इस हमले में हेलीकॉप्टर को काफी नुकसान पहुंचा और उसमें सवार रेस्क्यू टीम के कई सदस्य घायल हो गए।
हेलीकॉप्टर के क्षतिग्रस्त होने और क्रू के घायल होने के बावजूद, यह बचाव दल पायलट को सुरक्षित रूप से निकालने में कामयाब रहा और हेलीकॉप्टर ने एक मित्र देश में सुरक्षित लैंडिंग की। हालांकि, दूसरे पायलट की लोकेशन अब तक स्पष्ट नहीं थी, जिसकी वजह से अमेरिकी सैन्यबल उसे पहले ऑपरेशन में बचा कर नहीं ला पाया।
सवाल-3: जब पहले पायलट को छह घंटे बाद ही बचाया गया तो जानकारी देने में देर क्यों?
जवाब: बताया गया है कि एफ-15ई के पायलटों के ईरान में फंसने के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड विमान के क्रैश होने और पहले पायलट के छह घंटे के अंदर ही रेस्क्यू किए जाने को लेकर एक बयान जारी करने ही वाला था। लेकिन रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने राष्ट्रपति ट्रंप को फोन किया और लापता अधिकारी की सुरक्षा के मद्देनजर इस जानकारी को गुप्त रखने की सलाह दी। अमेरिका को आशंका थी कि ईरान इस अधिकारी का इस्तेमाल अमेरिका के साथ उच्च स्तरीय बातचीत में सौदेबाजी के लिए कर सकता है। ऐसे में ट्रंप ने भी पहले पायलट के रेस्क्यू के पोस्ट को पूरे घटनाक्रम के काफी देर बाद पोस्ट किया।सवाल-4: क्रैश के बाद दूसरा पायलट (वेपन्स सिस्टम ऑफिसर) कहां था?
जवाब: इजेक्शन की अफरातफरी के दौरान एयरमैन, जिसकी पहचान कर्नल रैंक के अधिकारी के तौर पर हुई, वह मुख्य पायलट से अलग हो गया था। वह ईरान के क्षेत्र में अकेला था और उसके पास केवल एक पिस्तौल, अपनी बचाव किट, कुछ संचार उपकरण और एक लोकेशन बीकन था। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह एयरमैन दुर्घटना के बाद घायल हो गया था। इसके बावजूद वह ईरान की पकड़ से बचने के लिए 20 किलोमीटर चलते हुए जग्रोस पहाड़ों पर 7,000 फुट ऊंची चोटी पर चढ़ गया। यहां उसने पहाड़ी दरार में खुद को छिपा लिया और बीच-बीच में अपने लोकेशन बीकन के जरिए कमांड बेस को सिग्नल भेजता रहा।सवाल-5: शुक्रवार और शनिवार को इस लापता अधिकारी को बचाने के लिए क्या-क्या हुआ?
जवाब: शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने अन्य अभियानों को रोककर पूरा ध्यान इस रेस्क्यू पर लगा दिया। वहीं, अमेरिका की विदेश मामलों की खुफिया एजेंसी- सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) ने ईरानियों को भ्रमित करने के लिए यह झूठी खबर फैलाई कि अमेरिकी बलों ने अधिकारी को खोज लिया है और उसे सड़क मार्ग से देश के बाहर निकाला जा रहा है। सीआईए के इस भ्रम अभियान का मकसद एयरमैन की खोज में जुटी ईरान की सेना और ईनाम के लिए पहाड़ियों के पास जुटे ईरानी नागरिकों को भ्रमित करने का था, ताकि वह सीमाई इलाकों पर चौकसी बढ़ा दें और पहाड़ियों पर खोज अभियान से दूर हट जाएं।
वहीं, शनिवार को ईरानियों ने एयरमैन को पकड़ने के लिए 60,000 डॉलर का इनाम रखा और अपनी खोज तेज कर दी। इस दौरान अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन अधिकारी की स्थिति के दो मील के दायरे में आने वाले किसी भी ईरानी सुरक्षा बल पर मिसाइलों से हमला कर रहे थे। शनिवार तक सीआईए ने एक विशेष तकनीक और बीकन के सिग्नल की मदद से उसकी सटीक लोकेशन का पता लगा लिया था।
सवाल-6: ईरान में फंसे दूसरे पायलट के रेस्क्यू ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया गया?
जवाब: शनिवार को दर्जनों विमानों और लगभग 100 विशेष बलों, जिनमें सील टीम 6, रेस्क्यूट्रूपर्स शामिल थे, के साथ यह जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन दिन के उजाले में ही शुरू कर दिया गया। बताया गया है कि रेस्क्यू के दौरान पहाड़ी के दर्रे में छिपे हुए एयरमैन ने अपनी लोकेशन से अमेरिकी युद्धक विमानों को उन क्षेत्रों को निशाना बनाने का निर्देश दिया, जहां से ईरानी बल उस तक पहुंचने के लिए आगे बढ़ रहे थे। नेवी सील्स ने अधिकारी को सुरक्षित रूप से पहाड़ से निकाला और ईरान के अंदर स्थित एक कच्ची, रेतीली हवाई पट्टी पर ले गए।सवाल-7: हवाई पट्टी पर रेस्क्यू के दौरान क्या मुश्किलें आई?
जवाब: ईरान से दूसरे पायलट को रेस्क्यू करने के बाद अमेरिकी सेना ने निकलने की योजना के तहत दो सी-130, जिनमें एमसी-130जे ट्रांसपोर्ट विमानों का इस्तेमाल किया जाना था, को शामिल किया। लेकिन दोनों विमानों के पहिए रेतीली मिट्टी में फंस गए। ऐसे में पहले तो इन परिवहन विमानों को निकालने की कोशिश की गई, लेकिन जब घंटों की कोशिश के बाद भी विमान नहीं निकले, तो तीन नए विमान मंगाए गए, जिनमें बैठकर घायल अधिकारी और कमांडो कुवैत के लिए रवाना हुए। अमेरिका का दावा है कि उनके विमान ईरानियों के हाथ न लगें, इसलिए अमेरिकी बलों ने फंसे हुए दोनों सी-130 विमानों और चार एमएच-6 विशेष हेलीकॉप्टरों को बम से उड़ा दिया। हालांकि, ईरान का कहना है कि भागने की कोशिश के दौरान ईरानी सेना ने अमेरिकी विमानों को ध्वस्त कर दिया। उसने अमेरिका के ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों को मार गिराने की भी बात कही है।
सवाल-8: इस मिशन का अंत कब और कैसे हुआ?
जवाब: शनिवार-रविवार की दरमियानी रात जैसे ही विमानों ने ईरानी हवाई क्षेत्र पार किया, राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर वी गॉट हिम (हमने उसे निकाल लिया) लिखकर मिशन की सफलता की घोषणा की। उन्होंने बताया कि अधिकारी घायल है लेकिन सुरक्षित है और इस मिशन में कोई भी अमेरिकी हताहत नहीं हुआ।रेस्क्यू किए गए घायल एयरमैन (वेपन्स सिस्टम ऑफिसर) और बचाव अभियान में शामिल सैनिकों को सुरक्षित निकालकर कुवैत ले जाया गया। मिशन के पूरा होने के बाद, घायल एयरमैन को चिकित्सा उपचार (मेडिकल ट्रीटमेंट) के लिए रेस्क्यू विमान के जरिए कुवैत के एक एयरफील्ड में पहुंचाया गया। वहीं, शुक्रवार को जिस पहले पायलट को बचाया गया था और उसे बचाते समय हेलीकॉप्टर पर हुए हमले में जो क्रू मेंबर्स घायल हुए थे, उस हेलीकॉप्टर ने भी एक सुरक्षित क्षेत्र में लैंडिंग की थी।
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