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Military Drills: अमेरिका समेत 8 देश मिलकर कर रहे 'सबसे बड़ा' सैन्य अभ्यास, फिलीपींस-चीन तनाव बढ़ने की आशंका

Tue, 03 Oct 2023 06:46 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन डीसी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन डीसी Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 03 Oct 2023 06:46 PM IST
सार

फिलीपींस और चीन की तनातनी के बीच अमेरिका ने संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया है। दक्षिण चीन सागर में प्रभुत्व की इस लड़ाई में चीन और फिलीपींस का तनाव बढ़ने का खतरा है।

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US Philippines military drill south china sea dispute tension escalate
फिलीपींस अमेरिका युद्धाभ्यास - फोटो : ANI Reuters

विस्तार

फिलीपींस और चीन के बीच टकराव बढ़ने का खतरा है। दक्षिण चीन सागर में क्षेत्राधिकार को लेकर जारी विवाद के बीच अमेरिका ने संयुक्त सैन्य अभ्याास शुरू किया है। फिलीपींस की राजधानी मनीला और चीन की राजधानी बीजिंग में दोनों देशों की तल्खी का साफ असर देखा जा सकता है।
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युद्धाभ्यास का नाम क्या?
एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने दो सप्ताह तक चलने वाला सैन्य अभ्यास सोमवार को शुरू किया। इस बहुस्तरीय सैन्य अभ्यास में फिलीपींस और अमेरिका के साथ ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, कनाडा जैसे देश भी भाग ले रहे हैं। अमेरिकी नौसेना ने बताया कि सैन्य अभ्यास को समा-समा 2023 नाम दिया गया है।
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अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास
सैन्य अभ्यास का यह छठा संस्करण अब तक का सबसे बड़ा आयोजन है। इस संयुक्त मिलिट्री अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जापान, यूनाइटेड किंगडम और मलेशया जैसे देश भाग ले रहे हैं। अमेरिकी नौसेना के अधिकारी कैप्टन सीएन लेविस ने बताया कि 'समा-समा' का अर्थ एक साथ होता है और इस अभ्यास की भावनाओं को देखते हुए इससे बेहतर नाम नहीं हो सकता। कैप्टन सीएन अमेरिकी नौसेना के डिस्ट्रॉयर स्क्वाड्रन 7 को कोमोडोर हैं।
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इनोवेशन के साथ संयुक्त सुरक्षाबल तैयार करने की कवायद
उन्होंने कहा कि संयुक्त युद्धाभ्यास के दौरान सुरक्षा से जुड़े बड़े मुद्दों का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पहली बार इतनी बड़ी संख्या में देश संयुक्त अभ्यास कर रहे हैं। ऐसे में संयुक्त ऑपरेशन के लिहाज से देशों का परस्पर सहयोग बढ़ने की पूरी संभावना है। इससे इनोवेशन और दक्षिण चीन सागर और आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत करने के मकसद से संयुक्त सुरक्षाबल तैयार करने में भी मदद मिलेगी।

इन देशों के 1800 जवान करेंगे अभ्यास
समा-समा में आठ देशों के लगभग 1800 सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं। इनमें से कई अधिकारियों की पोस्टिंग युद्धपोत पर की गई है। फिलीपींस, अमेरिका, जापान, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम के युद्धपोत भाग ले रहे हैं।

क्यों बढ़ रहा है खतरा
रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार चीनी तटरक्षक बल और फिलीपींस के युद्धपोतों का टकराव बढ़ रह है। इसके साथ ही साउथ चाइना सी के पास मरीन मिलिशिया का खतरा भी बढ़ रहा है। बढ़ते तनाव और टकराव को न केवल दक्षिण चीन सागर, बल्कि इसके आसपास के क्षेत्रों में शांति के लिहाज से भी चिंताजनक माना जा रहा है।

8 देशों का संयुक्त मिलिट्री अभ्यास बेहद अहम
फिलीपींस की नौसेना के प्रमुख वाइस एडमिरल टोरिबो अडासी जूनियर ने एक न्यूज रिपोर्ट में कहा, समा-समा युद्धाभ्यास के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा के सााथ-साथ अंतरदेशीय अपराधों पर नकेल कसने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि कई बडे़ खतरों से मिलकर निपटने के लिहाज से 8 देशों का संयुक्त मिलिट्री अभ्यास काफी अहमियत रखता है।

सेना तक रसद पहुंचने से रोकने का प्रयास
मीडिया रिपोर्ट में फिलीपींस और चीन के टकराव से जुड़े कई विचलित करने वाले विजुअल सामने आ चुके हैं। कई जगहों पर वॉटर कैनन के इस्तेमाल का भी दावा किया गया है। टूटे युद्धपोत वाले फिलीपींस के मिलिट्री स्टेशन तक रसद की पहुंच को रोकने की कोशिश कर रहे चीनी सैनिकों के बीच फिलीपींस का एक गोताखोर जा घुसा था।

चीन क आरोप- टकराव फिलीपींस के कारण
फिलीपींस के तटरक्षक दल ने आरोप लगाया है कि चीनी पक्ष की तरफ से 'मिलिट्री ग्रेड' लेजर क इस्तेमाल किया गया, जिससे उनके कई सैनिकों को आंखें गंवानी पड़ी। फिलीपींस और चीन का तनाव और टकराव कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। दूसरी तरफ चीन का आरोप है कि तनाव के लिए फिलीपींस जिम्मेदार है।


कितना इलाका विवादित, किन देशों का दावा
दरअसल, दक्षिण चीन सागर के विस्तृत भू-भाग पर चीन अपना दावा ठोकता है। चीन की दलील है कि दक्षिण चीन सागर के  कई द्वीपों पर उसकी संप्रभुता को लेकर कोई विवाद नहीं है। जिस क्षेत्र को लेकर चीन दावा करता है, इसमें साउथ चाइना सी के अधिकांश द्वीपों के अलावा बालू वाले क्षेत्र समेत करीब 1.3 मिलियन वर्गमील क्षेत्र का इलाका कवर होता है। कई ऐसे इलाके भी हैं जो चीन की सीमा से सैकड़ों किलोमीटर दूर हैं। विवादित इलाकों पर चीन और फिलीपींस के अलावा मलेशिया, वियतनाम, ब्रूनेई और ताइवान भी दावा ठोकते हैं।
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