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US-Iran Tension: विरोध, चुप्पी और समर्थन..., ईरान पर बमबारी करने वाले ट्रंप के फैसले पर बंटा अमेरिकी विपक्ष

Sun, 22 Jun 2025 12:20 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु चंदेल Updated Sun, 22 Jun 2025 12:20 PM IST
सार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर बमबारी की घोषणा के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी में भारी मतभेद उभर आए हैं। प्रगतिशील नेताओं ने इस हमले को गैरकानूनी और खतरनाक बताया, जबकि कुछ मुख्यधारा डेमोक्रेट्स ने चुप्पी साधी या सीमित समर्थन जताया।

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US opposition Democrats response President Donald Trump announces bombing US entered Israel-Iran conflict
Donald Trump - फोटो : X/@WhiteHouse

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमले की घोषणा के बाद अमेरिका की सियासत में बवाल मच गया है। एक ओर ट्रंप के समर्थन वाले रिपब्लिकन नेता खामोश हैं या थोड़ा-थोड़ा समर्थन जता रहे हैं, वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर इस फैसले को लेकर गंभीर मतभेद उभर आए हैं। खासकर प्रोग्रेसिव धड़ा इस कार्रवाई को बिना मंजूरी युद्ध की घोषणा मानते हुए कड़ी आपत्ति जता रहा है। इसमें कई नेताओं ने तो अमेरिकी राष्ट्रपति पर ईरान-इस्राइल संघर्ष में बिना वजह कूदने का आरोप लगाया।
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डेमोक्रेटिक नेता और वर्मोंट के सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने इस बमबारी को खतरनाक गलती बताते हुए कहा कि अमेरिका को इस्राइल के संघर्ष में शामिल होना विनाशकारी होगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद खुद को शांति दूत बताया था, लेकिन अब वह उसी वादे को तोड़कर एक नए युद्ध की शुरुआत कर बैठे हैं। इसी तरह सांसद रो खन्ना ने संसद की मंजूरी के बिना सैन्य कार्रवाई को असंवैधानिक करार देते हुए इसके खिलाफ प्रस्ताव भी पेश किया।
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ईरान-इस्राइल संघर्ष में अमेरिकी सियासत की एंट्री

ईरान-इस्राइल संघर्ष में अब अमेरिकी सिसासत की एंट्री हो गई है। यहां डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी के प्रमुख केन मार्टिन ने बयान जारी कर कहा कि ट्रंप ने खुद कहा था कि सफलता का पैमाना युद्ध जीतना नहीं, बल्कि उनसे बचना है। लेकिन आज वही राष्ट्रपति ईरान पर हमला कर अमेरिका को युद्ध में झोंक रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि अमेरिकी जनता युद्ध नहीं चाहती।
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किसी ने किया समर्थन तो कोई कर रहा विरोध

वहीं सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर और वर्जीनिया के सीनेटर टिम केन जैसे मुख्यधारा के नेता इस मुद्दे पर सतर्क प्रतिक्रिया दे रहे हैं। टिम केन ने ट्रंप की कार्रवाई को खराब फैसला बताते हुए कहा कि वे सीनेट में इस मुद्दे पर वोटिंग की मांग करेंगे। वहीं शूमर ने कहा कि अमेरिका को इस्राइल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहना होगा, हालांकि उन्होंने सीधी भागीदारी पर कोई बयान नहीं दिया। ऐसे में माना जा रहा है कि ये फैसला कहीं न कहीं ट्रंप के लिए फायदेमंद भी है. क्यों कि उनकी विपक्षी पार्टी इससे दो धड़ में बट गई है.

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डेमोक्रेटिक वाली गलती तो नहीं कर रहे ट्रंप
बाइडेन-हैरिस प्रशासन की ओर से पहले ही गाजा युद्ध में इस्राइल को समर्थन देने के कारण डेमोक्रेटिक पार्टी को मुस्लिम-अरब और प्रोग्रेसिव वोटरों में भारी विरोध झेलना पड़ा था। उस समय ट्रंप ने इसका फायदा उठाते हुए अरब-अमेरिकी और ऑर्थोडॉक्स यहूदी समुदाय का समर्थन जुटाया। अब ईरान-इस्राइल  युद्ध में अमेरिका की भागीदारी ने पार्टी की अंदरूनी दरारों को और गहरा कर दिया है। कई प्रतिनिधि भी ट्रंप के इस फैसले नाखुश हैं। हालांकि बावजूद इसके वो खुलकर नहीं बोल रहे हैं। ऐसे में कई का मानना ये भी है कि कहीं अगली बार ट्रंप को अरब-अमेरिकी और ऑर्थोडॉक्स यहूदी जैसे समुदायों का विरोध न झेलना पड़े।

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