भारत-चीन विवाद के बीच अमेरिकी नौसेना का दक्षिण चीन सागर में अभ्यास
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अमेरिकी नौसेना दक्षिण चीन सागर में स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करते हुए 'ड्यूल कैरियर ऑपरेशन' और अभ्यास कर रही है। भारत और चीन के बीच लद्दाख में महीनों से चल रहे सीमा गतिरोध के बीच अमेरिकी नौसेना का यह अभ्यास दर्शाता है कि वह भारत के साथ है।
रोनल्ड रीगन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के लिए 'एक्रीडीशन इन पब्लिक रिलेशन एंड मिलिट्री पब्लिक अफेयर्स' अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर शॉन ब्रोफी ने कहा, यूएसएस निमित्ज (सीवीएन 68) और यूएसएस रोनल्ड रीगन (सीवीएन 76) दक्षिण चीन सागर में स्वतंत्र और खुले भारत-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करते हुए अभ्यास कर रही है।
USS Nimitz(CVN 68)&USS Ronald Reagan(CVN 76) are conducting dual carrier ops&exercises in South China Sea to support free&open Indo-Pacific: Lt Cmdr Sean Brophy, Accreditation in Public Relations+Military(APR+M)Public Affairs Officer for Ronald Reagan Carrier Strike Group.#USNavy pic.twitter.com/ILrZWEUAnc
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) July 4, 2020
हाल ही में चीनी सैन्य आक्रामकता को मुंहतोड़ जवाब देने और भारत समेत एशियाई क्षेत्रों में अन्य देशों को समर्थन देने के लिए के लिए अमेरिका ने अपने सैनिकों को यूरोप से स्थानांतरित कर यहां तैनात कर दिया था।
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अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा था कि भारत और दक्षिण पूर्ण एशियाई देशों को चीन से खतरे को देखते हुए अमेरिका यूरोप में अपने सैनिकों की मौजूदगी को कम रहा है और उन्हें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तैनात कर रहा है।
पोम्पियो से जब पूछा गया कि आखिर अमेरिका ने जर्मनी में अपने सैनिकों की संख्या कम क्यों कर दी, तो उन्होंने कहा कि वहां सैनिकों की संख्या इसलिए कम है, क्योंकि उन्हें दूसरी जगहों पर तैनात किया जा रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा था कि चीन में सत्ताधारी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की हरकतें भारत, वियतनाम, मलयेशिया, इंडोनेशिया और दक्षिण चीन सागर के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि हम इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि अमेरिकी सेना किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहे।