फिलीपींस: मार्कोस की जीत की संभावना से बढ़ गई है अमेरिका की चिंता
दुतेर्ते ने 2016 में चीन की यात्रा की थी। तब वहां दिए एक महत्त्वपूर्ण भाषण में उन्होंने कहा- ‘अमेरिका अब पिछड़ गया है। मैंने आपकी वैचारिक धारा के साथ तालमेल बैठा लिया है।’ बाद में दुतेर्ते ने सफाई दी थी कि वे अमेरिका के साथ हुई संधि को रद्द नहीं करेंगे। लेकिन उनकी सरकार के कई कदम अमेरिकी अपेक्षाओं के मुताबिक नहीं रहे हैं...
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फिलीपींस के राष्ट्रपति चुनाव में दिख रहे ट्रेंड को लेकर अमेरिकी सुरक्षा हलकों में चिंता है। इस बात का संकेत अमेरिकी मीडिया में छपी टिप्पणियों से मिला है। अमेरिका मौजूदा राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते की विदेश नीति से भी खुश नहीं था। लेकिन अब उसे अंदेशा है कि अगले संभावित राष्ट्रपति फर्डिनैंड मार्कोस जूनियर की नीति पहले भी ज्यादा चीन की तरफ झुक सकती है।
परंपरागत रूप से फिलीपींस को अमेरिकी खेमे का देश समझा जाता रहा है। दो दशक पहले दोनों देशों के बीच एक संधि हुई थी, जिसमें फिलीपींस में अमेरिकी सेना की तैनाती का प्रावधान था। अमेरिका चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की अपनी कोशिश में फिलीपींस की महत्त्वपूर्ण भूमिका मानता रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ सीमाई विवाद के कारण पहले फिलीपींस के चीन के साथ रिश्ते तनावपूर्ण थे। लेकिन दुतेर्ते के शासनकाल में इसमें बदलाव आया।
चीन में की थी अमेरिका बुराई
दुतेर्ते ने 2016 में चीन की यात्रा की थी। तब वहां दिए एक महत्त्वपूर्ण भाषण में उन्होंने कहा- ‘अमेरिका अब पिछड़ गया है। मैंने आपकी वैचारिक धारा के साथ तालमेल बैठा लिया है।’ बाद में दुतेर्ते ने सफाई दी थी कि वे अमेरिका के साथ हुई संधि को रद्द नहीं करेंगे। लेकिन उनकी सरकार के कई कदम अमेरिकी अपेक्षाओं के मुताबिक नहीं रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने दक्षिण चीन सागर के सीमा विवाद में फिलीपींस के पक्ष में फैसला दिया था। लेकिन उसे लागू करवाने में दुतेर्ते ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई।
न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स में सीनियर फेलॉ जोशुआ कुर्लांत्जिक ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘फिलीपींस अमेरिका और चीन दोनों के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्त्वपूर्ण है। चीन हालांकि अभी अपने घरेलू मामलों में उलझा हुआ है, लेकिन उसने दक्षिण चीन सागर में अपनी गतिविधियां जारी रखी हैं।’
इसी अंतरराष्ट्रीय खींचतान के बीच नौ मई को फिलीपींस के मतदाता दुतेर्ते के उत्तराधिकारी का चुनाव करेंगे। चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों में मार्कोस जूनियर सबसे आगे चल रहे हैं। उन्हें चीन की तरफ झुकाव रखने वाला उम्मीदवार समझा जा रहा है। उनका मुख्य मुकाबला वर्तमान उप राष्ट्रपति लेनी रोब्रेडो से है, जिनका अधिक झुकाव अमेरिका की तरफ है।
सामरिक महत्व रखता है फिलीपींस
अमेरिकी विश्लेषकों ने कहा है कि सोमवार को होने वाले चुनाव का असर फिलीपींस की सीमाओं के बाहर भी महसूस किया जाएगा। कुर्लांत्जिक ने कहा है- ‘चुनाव जो भी जीते, अमेरिका उसके साथ गहरा संबंध बनाने में अपनी काफी ऊर्जा लगाएगा। फिलीपींस के अति सामरिक महत्त्व वाला देश है।’
मार्कोस के साथ दुतेर्ते की बेटी सारा दुतेर्ते उप राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं। सारा ने राय जताई है कि फिलीपींस को सीमाई विवाद पर चीन के साथ द्विपक्षीय स्तर पर ही बातचीत करनी चाहिए। यानी इसमें वे अमेरिकी दखल से बचने की पक्षधर हैं। मार्कोस के आलोचकों का कहना है कि उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान ही चीन के राजदूत हुआंग शिलियान से मुलाकात अपने चीन समर्थक रुख का संकेत दे दिया है। इस मुलाकात के बाद चीनी राजदूत ने कहा था- ‘मार्कोस से मिलना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात थी। हम साथ मिल कर एक उज्ज्वल भविष्य का दरवाजा खोलने जा रहे हैं।’ अमेरिकी विश्लेषकों के मुताबिक ऐसे ही संकेतों की वजह से अमेरिकी सुरक्षा प्रतिष्ठान की चिंता बढ़ी हुई है।