अमेरिका : राष्ट्रपति ट्रंप की युद्ध शक्तियों में कटौती का प्रस्ताव निचले सदन में पास
- डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमला करने की नहीं होगी खुली छूट
- प्रस्ताव के पक्ष में तीन रिपब्लिकन सांसदों ने भी किया मतदान
- 224 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में प्रस्ताव के पक्ष में 194 वोट
- ऊपरी सदन सीनेट सीनेट में प्रस्ताव का पास होना मुश्किल है
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ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी संसद ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध शक्तियों पर अंकुश लगाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए ट्रंप के अधिकार सीमित करने वाले प्रस्ताव को पारित कर दिया है। अब ट्रंप को ईरान पर हमला करने की खुली छूट नहीं होगी।
डेमोक्रेट सांसदों के बहुमत वाले 224 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में प्रस्ताव के पक्ष में 194 वोट पड़े। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के तीन सांसदों ने भी प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। अब प्रस्ताव को ऊपरी सदन सीनेट में पेश किया जाएगा। हालांकि, रिपब्लिकन सांसदों के बहुमत वाले सीनेट में प्रस्ताव का पास होना थोड़ा मुश्किल है। इस प्रस्ताव को सांसद एलिसा स्लोटकिन ने सदन में पेश किया। स्लोटकिन ने पहले शिया मिलिशिया में विशेष रूप से सीआईए एनालिस्ट के पद पर काम किया है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के लिए वह रक्षा सहायक सचिव भी रहीं हैं।
सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान ने बुधवार को इराक में दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 22 मिसाइलें दागी थीं। ईरानी के जवाबी हमले के एक दिन बाद यह प्रस्ताव लाया गया। ईरानी ने दावा किया था उसकी इस कार्रवाई में अमेरिका के 80 सैनिक मारे गए थे। इसके बाद ट्रंप ने कहा था कि ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
बिना जानकारी दिए हमले की अनुमति
डेमोक्रेटिक पार्टी का आरोप है कि ट्रंप ने संसद को जानकारी दिए बिना ही इराक में ईरानी जनरल सुलेमानी पर ड्रोन हमले की इजाजत दे दी थी। इसके बाद प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी ने अमेरिकी सांसदों को चिट्ठी लिखकर राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई को सीमित करने का प्रस्ताव रखा था। नैंसी ने कहा था कि ट्रंप प्रशासन ने ईरानी जनरल सुलेमानी की हत्या की और तेहरान के साथ तनाव बढ़ाकर हमारे अधिकारियों, राजनयिकों और अन्य लोगों को खतरे में डाल दिया है।
पोम्पियो ने यूएन महासचिव गुटरेस से की बातचीत
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटरेस से मध्य पूर्व एशिया के हालात और ईरान के साथ बढ़ते तनाव पर चर्चा की। पोम्पियो ने ट्वीट किया, ‘यूएन महासचिव से ईरान के साथ बढ़ते पर तनाव और मध्य पूर्व एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। यूएन चार्टर के महत्व पर भी बात हुई।’
इराक से अपने सैनिक वापस बुलाए अमेरिका: महदी
इराक के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अदेल अब्देल महदी ने अमेरिका पर अपने सैनिकों को वापस बुलाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। महदी ने सैनिकों को इराक से वापस बुलाने के लिए ट्रंप प्रशासन से जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल भेजने को कहा है। महदी ने बृहस्पतिवार देर रात अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो से बात की और इराक से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का आग्रह किया। ईरानी जनरल सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले में हत्या के बाद अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने को लेकर इराकी संसद में एक प्रस्ताव पारित हुआ था।
शीर्ष धर्मगुरु सिस्तानी ने की अमेरिका की आलोचना
इराक के शीर्ष शिया धर्मगुरु अयातुल्ला अली अल-सिस्तानी ने शुक्रवार को अमेरिका की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘इराक की जमीन पर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं, इसका देश की सुरक्षा पर असर पड़ेगा। अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई में इराक पिस रहा है। किसी भी विदेशी शक्तियों को इराक के भाग्य का फैसला करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हमला इराक की संप्रुभता का उल्लंघन है।’
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव पर यूरोपीय देश चिंतित
ब्रुसेल्स। यूरोपीय देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जाहिर की है। यूरोपीय देशों ने वाशिंगटन और तेहरान दोनों से शांति बनाए रखने की अपील की है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव कैसे कम हो, इसका रास्ता निकालने के लिए यूरोपीय यूनियन के मंत्रियों ने आपात बैठक बुलाई है। ईयू के एक शीर्ष राजनयिक ने कहा कि ईरान ने तनाव कम करने की बात कही है, जो अच्छे संकेत हैं।