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US: चाबहार पोर्ट पर अमेरिका ने दिया बड़ा झटका, छूट खत्म करने का एलान; भारत समेत इन देशों पर पड़ेगा सीधा असर

Thu, 18 Sep 2025 11:32 PM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 18 Sep 2025 11:32 PM IST
सार

अमेरिका ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर बड़ा झटका दिया है। ट्रंप प्रशासन ने 2018 में दी गई प्रतिबंधों से छूट को खत्म करने का एलान किया है, जो 29 सितंबर से लागू होगी। ऐसे में इसका सीधा असर भारत पर पड़ेगा। कारण है कि भारत लगातार इस बंदरगाह को विकसित कर मध्य एशिया तक व्यापारिक संपर्क बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है।

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US has announced the end of the exemption on Iran Chabahar port affect these countries including India
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : PTI

विस्तार

अमेरिका ने ईरान के चाबहार पोर्ट को लेकर एक बड़ा झटका दिया है। इसके तहत ट्रंप प्रशासन ने ईरान के चाबहार पोर्ट से जुड़ी छूट को खत्म करने का एलान कर दिया है, जिससे इस रणनीतिक बंदरगाह पर काम कर रहे देशों और कंपनियों पर अब प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। ऐसे में इसका सीधा असर भारत समेत कई देशों पर भी होगा। कारण है कि भारत लगातार इस पोर्ट को विकसित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

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अमेरिकी विदेश मंत्रालय का बयान
अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता थॉमस पिगॉट ने कहा कि ईरानी शासन को अलग-थलग करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की अधिकतम दबाव नीति के अनुरूप उसने अफगानिस्तान पुनर्निर्माण सहायता और आर्थिक विकास के लिए ईरान स्वतंत्रता और प्रसार-रोधी अधिनियम (आईएफसीए) के तहत 2018 में जारी प्रतिबंध अपवाद को रद्द कर दिया है। यह फैसला 29 सितंबर से प्रभावी होगा।

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बयान में आगे कहा गया कि एक बार प्रतिबंध प्रभावी होने के बाद जो भी लोग चाबहार बंदरगाह का संचालन करते हैं या आईएफसीए में वर्णित अन्य गतिविधियों में शामिल होते हैं वे आईएफसीए के तहत प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं। बता दें कि भारतीय कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन (आईपीजीसीएफजेड) के माध्यम से 24 दिसंबर 2018 से चाबहार बंदरगाह का संचालन कर रही है।
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2018 में अमेरिका ने चाबहार पोर्ट पर दी थी छूट
2018 में अमेरिका ने चाबहार पोर्ट पर छूट दी थी, क्योंकि इसका इस्तेमाल अफगानिस्तान को सहायता भेजने के लिए किया जा रहा था। इसके बाद भारत ने इस पोर्ट के जरिए 2023 में अफगानिस्तान को 20,000 टन गेहूं और 2021 में ईरान को पर्यावरण-अनुकूल कीटनाशक भेजे थे।

लेकिन अब अमेरिका की अधिकतम दबाव नीति के तहत इस छूट को खत्म किया जा रहा है। इसका एक बड़ा कारण ये भी है कि 2021 में अमेरिका की सेना की वापसी के बाद अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार आ गई थी। इसके बाद से अमेरिका की अफगान नीति में भी बदलाव आया है।


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भारत पर क्यों पड़ेगा असर, समझिए
चाबहार पोर्ट ईरान के सिस्तान-बालोचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित है। ऐसे में भारत और ईरान मिलकर इस पोर्ट को विकसित कर रहे हैं ताकि अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक संपर्क को बढ़ाया जा सके। बीते साल 13 मई 2024 को भारत ने इस पोर्ट को 10 साल तक ऑपरेट करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर भी किए थे।  

भारत ने 2003 में रखा था प्रस्ताव
गौरतलब है कि इससे काफी पहले भारत ने चाबहार पोर्ट का प्रस्ताव 2003 में रखा था, ताकि पाकिस्तान को बाईपास करते हुए भारत, अफगानिस्तान और मध्य एशिया को जोड़ने वाला एक वैकल्पिक व्यापार मार्ग बनाया जा सके। इसके लिए भारत, ईरान और रूस मिलकर एक बड़ा प्रोजेक्ट चला रहे हैं जिसे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) कहा जाता है। यह करीब 7,200 किलोमीटर लंबा सड़क, रेल और समुद्री मार्ग है।

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