अमेरिका: चीन के कहने में आकर अमेरिकी कंपनी ने अपने देश के पत्रकारों को ही किया सेंसर!
जानकारों के मुताबिक लिंक्डइन उन गिनी-चुनी अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनियों में शामिल है, जिन्हें चीन में कारोबार करने की अनुमति है। अब वह उसने गतिविधियों की रिपोर्टिंग को सेंसर करने का फैसला किया है, जिन्हें चीन की सरकार विध्वंसकारी मानती है...
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अमेरिका की बड़ी कंपनी पर ये आरोप लगा है कि चीन में कारोबार करने के लिए वह खुद अमेरिकी पत्रकारों की सेंसरशिप करने पर राजी हो गईं। इस मामले में अमेरिकी कंपनियों माइक्रोसॉफ्ट और लिंक्डइन के खिलाफ संसदीय जांच शुरू हो सकती है। रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर रिक स्कॉट ने दोनों कंपनियों को भेजे पत्र में लिंक्डइन के मामले में उनसे जवाब तलब किया है।
लिंक्डइन कंपनी की मालिक माइक्रोसॉफ्ट ही है। लिंक्डइन ने इसी हफ्ते की अमेरिकी पत्रकारों को सूचना दी कि अब उनके एकाउंट चीन में नहीं देखे जा सकेंगे। कंपनी ने उन पत्रकारों को कहा कि उनके अकाउंट पर ‘प्रतिबंधित कंटेंट’ है। जिन पत्रकारों को ये नोटिस मिला, उनमें वाइस न्यूज की मेलिसा चैन, फ्रीलांस रिपोर्टर ग्रेग ब्रुनो और वेबसाइट एक्सियोस.कॉम के रिपोर्टर बेथनी एलन-इब्राहिमियां शामिल हैँ। इन तीनों पत्रकारों के बारे में बताया गया है कि वे मानव अधिकार हनन के मुद्दे पर चीन के आलोचक हैं।
सीनेटर स्कॉट ने अपने पत्र में लिखा है- ‘मैं इस बात को लेकर बहुत चिंतित हूं कि एक अमेरिकी कंपनी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से काम करते हुए अमेरिकी पत्रकारों को सेंसर कर रही है।’ ये पत्र माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला और लिंक्डइन के सीईओ रयान रोसलांस्की को भेजा गया है। स्कॉट ने कहा है- ‘मीडिया के सदस्य ऐसी सूचनाएं अपनी रिपोर्ट में देते हैं, जिनसे अमेरिकी जनता और सांसदों को यह समझने में मदद मिलती है कि कम्युनिस्ट चीन में किस हद तक मानव अधिकारों का हनन होता है। खास कर शिनजियांग प्रांत में उइघुर मुसलमानों की कैसी निगरानी की जाती है, इस बारे में उन रिपोर्टों से जानकारी मिलती है।’
स्कॉट ने लिखा है- ‘इन पत्रकारों की सेंसरशिप से माइक्रोसॉफ्ट के इरादों और कम्युनिस्ट चीन के खिलाफ उसकी खड़ा होने की वचनबद्धता पर गंभीर सवाल उठे हैं।’ उधर रिपब्लिकन पार्टी की हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के सदस्य जिम ब्लांक्स ने अलग से लिंक्डइन को एक पत्र भेजा है। उसमें अमेरिकी पत्रकारों को सेंसर करने के कंपनी के फैसले की कड़ी आलोचना की गई है।
जानकारों के मुताबिक लिंक्डइन उन गिनी-चुनी अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनियों में शामिल है, जिन्हें चीन में कारोबार करने की अनुमति है। अब वह उसने गतिविधियों की रिपोर्टिंग को सेंसर करने का फैसला किया है, जिन्हें चीन की सरकार विध्वंसकारी मानती है। लिंक्डइन पर दुनियाभर के अनगिनत शिक्षाशास्त्रियों, अनुसंधानकर्ताओं, सरकारी कर्मचारियों और दूसरे लोगों के प्रोफाइल मौजूद हैं। इस साइट का मकसद उन लोगों को आपस में संपर्क बनाने की सुविधा देना है।
विश्लेषकों के मुताबिक लिंक्डइन अब उन बड़ी कंपनियों में शामिल हो गई है, जो चीन सरकार की मांगों के मुताबिक कंटेन्ट सेंसर करने को राजी हुई है। लेखन स्वतंत्रता के लिए काम करने वाली संस्था पेन अमेरिका की सीईओ सुजैन नोसेल इस घटना पर जारी एक बयान में कहा है- ‘अगर लिंक्डइन के व्यवहार को सामान्य हो जाने दिया गया, तो उससे दुनिया भर की कंपनियों को संदेश जाएगा कि चीन की सेंसरशिप की मांगों को मान लेने से कोई फर्क नहीं पड़ता है।’ लिंक्डइन ने पत्रकारों को इस बारे में ई-मेल पिछले 27 सितंबर को भेजा था।