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तालिबान का राज: अफगानिस्तान से निकाले गए लोगों को 12 देश देंगे शरण

Sun, 22 Aug 2021 01:24 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन Published by: Kuldeep Singh Updated Sun, 22 Aug 2021 01:24 AM IST
सार

  • अफगानी लोगों को कम से कम 13 देशों ने अस्थायी तौर पर शरण देंगे शरण
  • 12 देशों ने लोगों को ले जाने के लिए पारगमन केंद्रों के तौर पर उनका इस्तेमाल किए जाने पर सहमति जताई

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US Foreign Minister Antony Blinken says 12 countries will give refuge to those expelled from Afghanistan
बच्ची को पानी पिलाते जवान - फोटो : पीटीआई

विस्तार

विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि अफगानिस्तान से निकाले गए और खतरों का सामना कर रहे अफगानी लोगों को कम से कम 13 देशों ने अस्थायी तौर पर शरण देने पर सहमति जताई है और अमेरिका एवं अन्य समेत 12 देशों ने निकाले गए लोगों को ले जाने के लिए पारगमन केंद्रों के तौर पर उनका इस्तेमाल किए जाने पर सहमति जताई है।

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इनके अलावा 13 अन्य देश अस्थायी तौर पर शरण देने पर हुए सहमत
ब्लिंकन ने कहा कि संभावित अफगान शरणार्थियों, जिनकी अमेरिका में पुनर्वास की पहले से व्यवस्था नहीं की गई है, उन्हें अल्बानिया, कनाडा, कोलंबिया, कोस्टा रिका, चिली, कोसोवो, उत्तरी मकदूनिया, मेक्सिको, पोलैंड, कतर, रवांडा, यूक्रेन और यूगांडा में केंद्रों में जगह दी जाएगी।
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पारगमन देशों में बहरीन, ब्रिटेन, डेनमार्क, जर्मनी, इटली, कजाखस्तान, कुवैत, कतर, ताजिकिस्तान, तुर्की, यूएई और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। ब्लिंकन ने कहा, विदेशों में अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा और सहयोगी देशों के नागरिकों तथा जोखिम वाले अफगानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने से बड़ी हमारी कोई अन्य प्राथमिकता नहीं है।
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पाक झुग्गी बस्ती में बढ़ी तालिबान शासन से भागे अफगानियों की आमद
पाकिस्तान के घनी आबादी वाले कराची शहर के बाहरी क्षेत्र स्थित एक झुग्गी बस्ती में उत्तरी कुंदुज प्रांत के अफगान परिवार तालिबान शासन से भागकर यहां आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में ऐसे लोगों की आमद बढ़ गई है। कराची के बाहर राजमार्ग से कुछ दूर उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्र में ये परिवार तिरपाल तंबू लगाकर रह रहे हैं। 

 कराची में पिछले 25 वर्षों से रह रहे एक बुजुर्ग अफगान हाजी अब्दुल्ला ने कहा, पिछले दो हफ्तों में यहां 500 से 600 परिवार आए हैं, जिसका मतलब है कि महिलाओं और बच्चों समेत करीब चार से पांच हजार लोग होंगे जो हमारे साथ बस्ती में रहने आए हैं। इन परिवारों के पास कहीं और जाने के लिए विकल्प नहीं है।


ये बलूचिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में तस्करी के रास्ते से आए हैं। करीब 2,00,000 अफगान झुग्गी बस्ती में रहते हैं, जबकि दक्षिणी कराची में भी 5,00,000 अफगान शरणार्थियों का घर है। ये ज्यादातर शहर में मजदूरों के रूप में काम करते हैं या पख्तून बहुल क्षेत्रों में अपनी छोटी दुकानें और व्यवसाय चलाते हैं।

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