ट्रंप हों तो फिर रूस या ईरान की क्या जरूरत! अमेरिका विरोधी देशों ने उनके बयानों पर कसे तंज
ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली खामेनई ने एक ट्वीट में कहा- ‘वाह, क्या तमाशा है! एक पक्ष कह रहा है कि यह अमेरिकी इतिहास का सबसे फर्जी चुनाव है। ये बात आखिर कौन कह रहा है...
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अमेरिका में चुनाव के पहले फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) और दूसरी खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि रूस और ईरान अमेरिकी लोकतंत्र और यहां की चुनाव प्रणाली को संदिग्ध बनाने के लिए दुष्प्रचार अभियान चला सकते हैं। लेकिन मतदान के बाद जब मतगणना लंबी खिंची, तो कुछ खुफिया अधिकारियों और अमेरिकी विशेषज्ञों ने अब कहा है कि रूस और ईरान को ऐसा करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ये काम खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं।
ट्रंप ने कई बार ये आरोप लगाया है कि अवैध वोटों के जरिए उन्हें हराने की कोशिश की जा रही है। अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी की वेबसाइट पर छपी एक खबर के मुताबिक दुष्प्रचार अभियानों पर खास नजर रखने वाले विशेषज्ञ ब्रेट शैफर ने कहा है कि देश के अंदर जैसा प्रचार हो रहा है, उसकी तुलना में विदेशों से होने वाला प्रचार बहुत कमजोर रहा है।
अमेरिका विरोधी देशों के नेताओं ने इस मौके पर तंज जरूर कसे हैं। मसलन, ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली खामेनई ने एक ट्वीट में कहा- ‘वाह, क्या तमाशा है! एक पक्ष कह रहा है कि यह अमेरिकी इतिहास का सबसे फर्जी चुनाव है। ये बात आखिर कौन कह रहा है? राष्ट्रपति जो अभी भी अपने पद पर मौजूद हैं। दूसरी तरफ उनके प्रतिद्वंद्वी का कहना है कि राष्ट्रपति चुनाव धांधली करके चुनाव जीतने का इरादा रखते हैं।’ चीनी मीडिया में ये बात प्रमुखता से कही गई है कि अमेरिकी लोकतंत्र असल में एक धोखा है, जिसके जरिए पूंजीपति वर्ग अपना शासन बनाए रखता है।
ब्रेट शैफर ने कहा है कि रूसी प्रचार तंत्र काफी समय से अमेरिकी लोकतंत्र को संदिग्ध बनाने में जुटा हुआ है। कुछ रूसी वेबसाइटों पर इस चुनाव में हुई कथित धोखाधड़ी की खबरें छापी गई हैं। लेकिन देश के अंदर चुनाव प्रणाली पर जैसे सवाल उठाए गए हैं, उसकी तुलना में वह कुछ नहीं है।
इस बार असल में रूसी वेबसाइटों ने अमेरिकी नेताओं का हवाला देते हुए ही ऐसी ज्यादातर खबरें छापी हैं। रूस की अंग्रेजी भाषा की वेबसाइट स्पुतनिक ने राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान को विस्तार से छापा कि चुनाव के दिन के बाद पहुंचने वाला हर वोट अवैध है। रशिया टीवी ने ट्रंप के इस बयान को प्रमुखता दी कि उनकी बड़ी जीत हुई है, लेकिन उनके विरोधी चुनाव परिणाम को चुराने की कोशिश कर रहे हैं।
एफबीआई के पूर्व एजेंट क्लिंट वाट्स ने एनबीसी चैनल से कहा कि राष्ट्रपति जो निराधार बातें कह रहे हैं, उसकी तुलना में रूस या ईरान ऐसा कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं, जिससे अमेरिकी चुनाव प्रणाली संदिग्ध दिखे। क्लिंट ने कहा- इस बार हम ऐसा कहने की स्थिति में नहीं हैं कि रूस, ईरान या चीन ने अमेरिकी चुनाव में कोई बड़ा दखल दिया। दरअसल, इस बार उन्हें फेक न्यूज (फर्जी खबरों) की जरूरत नहीं है, हम खुद ऐसी बहुत खबरें (दुनिया को) उपलब्ध करवा रहे हैं।
अमेरिकी न्यूज मीडिया और ट्विटर ने राष्ट्रपति के दावों का लगातार खंडन किया है। शुक्रवार को तो जब राष्ट्रपति ट्रंप बोल रहे थे और मतों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने लगे तो एमएसएनबीसी चैनल ने बीच में ही उनका भाषण काट दिया। इसके बदले एंकर ने तुरंत ये कहा कि ट्रंप गलत और झूठी बातें कह रहे हैं।
मतदान के पहले से ट्विटर ने राष्ट्रपति के कई ट्विट्स पर विवादास्पद होने का लेबल लगा दिया। ट्विटर ने ये चेतावनी भी दी कि संबंधित ट्विट में कही गई बात गुमराह करने वाली हो सकती है। लेकिन अमेरिकी मीडिया के इन प्रयासों के बावजूद ट्रंप के आचरण से अमेरिकी लोकतंत्र पर ऐसे लांछन लगे हैं और ऐसे सवाल उठे हैं, जिनके बारे में पहले सोचना भी मुश्किल था।