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US Election 2020: अमेरिका में चुनाव नतीजों के बाद बन सकते हैं हिंसक हालात
Tue, 03 Nov 2020 04:08 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 03 Nov 2020 04:08 PM IST
सार
- टेक्सास में सोमवार को बिडेन समर्थकों के काफिले पर हुए हमले से बढ़ी आशंका
- ट्रंप ने हमलावरों को बताया ‘देशभक्त’, हथियारबंद गुटों की गतिविधियां बढ़ीं
- हिंसा की आशंका को देखते हुए वामपंथी और दक्षिणपंथी गुटों ने की तैयारियां
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Donald Trump during Election campaign
- फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
ऐसी खबरें हैं कि अमेरिका में धुर दक्षिणपंथी और धुर वामपंथी दोनों गुटों ने राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा आने के बाद हिंसा की आशंका को देखते हुए अपनी-अपनी तैयारियां की हैं। सोमवार को टेक्सास राज्य में जो बिडेन समर्थकों के काफिले पर ट्रंप समर्थकों के हमले की घटना सामने आने के बाद हिंसा की आशंकाओं को और गंभीरता से लिया जाने लगा है। इस घटना में प्रचार अभियान पर जा रहे डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन के समर्थकों के काफिले के एक वाहन को ट्रंप समर्थकों के बस ने जानबूझ कर टक्कर मार दी।
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सोमवार को फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (एफबीआई) ने टेक्सास की घटना की जांच करने का एलान किया। लेकिन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने हमला करने वाले को ‘देशभक्त’ बताकर उनकी तारीफ की है। ट्रंप के ऐसे रवैये ने अंदेशों को और गहरा बना दिया है।
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एक धुर वामपंथी एंटिफा (एंटी-फासिस्ट) गुट के ट्विटर हैंडल पर चली चर्चाओं के बारे में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छपी खबर से पता चला कि दक्षिणपंथियों की तरह ऐसे गुट भी हथियार जुटा रहे हैं। ‘डिसेंट्रलाइज्ड अनार्किस्ट कॉलेक्टिव’ नामक एंटिफा गुट के ट्विटर हैंडल पर अपने कार्यकर्ताओं को सलाह दी गई है कि हिंसा की हालत में क्या करना चाहिए। बताया गया है कि प्रदर्शनकारियों को कैसे प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था करनी होगी ताकि आम जख्मों का तुरंत इलाज किया जा सके। अगर बंदूक की गोली लगती है, तब क्या करना होगा, ऐसे सुझाव भी दिए गए हैं।
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स्टडी ग्रुप आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डाटा प्रोजेक्ट (एसीएलईडी) की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरे अमेरिका में हथियारबंद गुटों की गतिविधियां बढ़ी हैं। इसीलिए चुनाव नतीजों के बाद हिंसक मुठभेड़ होने की आशंका है। ऐसा खासकर उस हाल में हो सकता है, अगर मतगणना लंबी खिंचे और इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप खुद को विजेता घोषित कर दें।
वेबसाइट हफिंगटन पोस्ट के एक विश्लेषण के मुताबिक यह लगभग तय है कि मतगणना सामान्य से अधिक लंबी खिंचेगी। साढ़े नौ करोड़ लोग डाक से वोट भेज चुके हैं। यानी चार साल पहले राष्ट्रपति चुनाव में जितने लोगों ने मतदान किया था, उसके लगभग दो तिहाई हिस्से ने इस बार डाक से अपना वोट भेजा है। इन वोटों की गिनती में काफी समय लगेगा।
राजनीतिक जानकारों की राय है डाक से मतदान करने वाले लोगों में अधिक संख्या डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों की है। जबकि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के ज्यादातर समर्थक बूथ पर मतदान करेंगे। इसलिए संभव है कि आरंभिक मतगणना में ट्रंप आगे निकल जाएं और इस आधार पर वो खुद को विजेता घोषित कर दें। जबकि पूरी मतगणना होने पर उनके हारने की संभावना प्रबल बनी रहेगी।
एसीएलईडी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हथियारबंद गुट अमेरिका में शांति व्यवस्था के लिए खतरा बन गए हैं। पिछले कुछ महीने में देश में हुए प्रदर्शनों के दौरान ऐसे गुटों की गतिविधियां देखने को मिलीं। उन्होंने प्रदर्शनों के बीच दखल दिया और निर्वाचित प्रतिनिधियों का अपहरण करने की साजिश रची।
अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी और एफबीआई दोनों ने ये कहा है कि धुर दक्षिणपंथी और नस्लवादी गुटों की तरफ से राजनीतिक हिंसा की ज्यादा आशंका है। ताजा खबरों के मुताबिक कई राज्यों में अधिकारियों ने चुनाव के बाद भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। कई शहरों में कारोबारियों ने अपनी इमारतों के बाहर सुरक्षा इंतजाम को और चौकस बनाया है। अमेरिका में दूसरे विश्व युद्ध के बाद कभी ऐसी राजनीतिक स्थिति बनी हो, यह लोगों को याद नहीं है।