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US Election 2020: नतीजे पक्ष में नहीं आए तो भी कुर्सी आसानी से नहीं छोड़ेंगे ट्रंप

Wed, 28 Oct 2020 06:53 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 28 Oct 2020 06:53 PM IST
सार

  • चुनावी धांधली की आशंका वाले ट्रंप के ट्वीट को ट्विटर ने विवादास्पद करार दिया
  • ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी लगातार मेल-इन वोटिंग मतपत्रों की वैधता पर उठा रही सवाल

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US Election 2020: Trump will not vacate the President post easily even if the results are not in favor
डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस सवाल पर संशय बढ़ा दिया है कि क्या 3 नवंबर होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में जो भी नतीजा आएगा, उसे वे स्वीकार कर लेंगे? ट्रंप ने मंगलवार को पहले एक ट्वीट में डाक से हो रहे मतदान की वैधता पर शक जताया। उन्होंने कहा है कि पूरे अमेरिका में मेल-इन बैलेट में बड़ी समस्याएं और विसंगतियां उभरी हैं। उनके इस दावे को ट्विटर ने तुरंत विवादास्पद मार्क कर दिया और ये चेतावनी दी कि इस ट्वीट में कही गई कुछ बातें गुमराह करने वाली हो सकती हैं। ये ट्वीट करने के बाद ट्रंप चुनाव प्रचार पर निकले तो एक रैली में उन्होंने कहा कि ये चुनाव वे सिर्फ तभी हार सकते हैं, जब बड़े पैमाने पर चुनावी धोखाधड़ी हो। इससे पहले ट्रंप चुनाव नतीजों के बाद सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण का वादा करने से इंकार कर चुके हैं।

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कोरोना महामारी के कारण इस बार के चुनाव में मेल-इन वोटिंग की निर्णायक भूमिका है। मंगलवार तक सात करोड़ मतदाता अपने वोट डाक से भेज चुके थे। ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से लगातार इन मतपत्रों की वैधता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा रिपब्लिकन पार्टी ऐसी कानूनी लड़ाइयों में जुटी है, ताकि इन वोटों की गिनती में रुकावट आए। मसलन, पेनसिल्वेनिया राज्य की अदालत ने ये फैसला दिया कि जो भी वोट 3 नवंबर तक भेजे जाएंगे, उनकी गिनती अनिवार्य होगी।
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रिपब्लिकन पार्टी ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां कंजर्वेटिव जजों का बहुमत है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि 3 नवंबर तक पहुंचे वोट ही गिने जाएंगे। ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि मतगणना 3 नवंबर को पूरी करनी होगी। जबकि ज्यादातर जानकार मानते हैं कि उस रोज तक डाक मतपत्रों का पहुंचना जारी रहेगा, जिनकी गिनती में कई दिन और लग सकते हैं। इन संभावनाओं के आधार पर ये अटकलें लगाई गई हैं कि इस बार शायद चुनाव नतीजा मतदान की रात तक ही घोषित ना हो सके।
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अमेरिका में मतदान को सीमित रखने की जानबूझ कर की जाने वाली कोशिशें पहले से चर्चित रही हैं। इस बार ये शिकायत ज्यादा उठी है। मतदान सीमित रखने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों में मतदाता की पहचान में अड़चनें डालना, बूथों की संख्या सीमित रखना, कुछ वर्ग के मतदाताओं के लिए टैक्स अदायगी के प्रमाण लाने जैसी शर्तें लगाना आदि शामिल रहे हैं। ऐसी कोशिशें करने के ज्यादातर आरोप रिपब्लिकन पार्टी पर ही लगते हैं।

इसी हफ्ते स्विट्जरलैंड की संस्था वेराइटी ऑफ डेमोक्रेसी (वी-डेम) की तरफ से जारी एक अध्ययन रिपोर्ट से ऐसे आरोपों को और बल मिला है। इस रिपोर्ट में कहा गया कि रिपब्लिकन पार्टी ‘लोकतांत्रिक नियमों का पालन करने से पीछे हट गई है’ और यह तेजी से तानाशाही की दिशा में बढ़ रही है- खासकर ऐसा डॉनल्ड ट्रंप के उदय के बाद हुआ है। अब वह ब्रिटेन की कंजरवेटिव पार्टी या जर्मनी की क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी के बजाय तुर्की के एकेपी (राष्ट्रपति एर्दोआन की पार्टी) या हंगरी की फिड्ज जैसी ज्यादा दिखने लगी है।


अमेरिकी सियासत में उभरे ऐसे ही रुझानों के कारण मशहूर दक्षिणपंथी ब्रिटिश अखबार द फाइनेंशियल टाइम्स ने ये कहा है कि अमेरिकी चुनाव में असल में लोकतंत्र दांव पर लगा हुआ है। ऐसी राय रखने वाले लोगों की कमी नहीं है। उनके मुताबिक अगर ट्रंप फिर जीते, तो अमेरिका का लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा। साथ देश सामाजिक अशांति का शिकार हो सकता है, जिसके लक्षण अभी से दिखने लगे हैं।

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