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US Election 2020: चुनाव से एक दिन पहले ट्रंप के लिए उम्मीद की किरण, फ्लोरिडा और आयोवा में बढ़ा समर्थन
Mon, 02 Nov 2020 02:42 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 02 Nov 2020 02:42 PM IST
सार
- कोरोना की वजह से अब तक डाक से नौ करोड़ मतदाताओं ने ड्रॉप बॉक्स में डाले वोट
- तीन नवंबर तक ही सारे वोटों की गिनती कराने की कोशिश, लेकिन डाक में देरी की भी आशंका
- अगर तीन नवंबर के बाद भी मतगणना जारी रही तो ट्रंप देंगे कानूनी चुनौती
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Donald trump and Melania trump
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
विस्तार
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान से एक दिन पहले जनमत सर्वेक्षणों से दो अहम बैटल ग्राउंड राज्यों- फ्लोरिडा और आयोवा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए समर्थन बढ़ने का संकेत मिला। फ्लोरिडा में ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान लगाया गया है। फ्लोरिडा से इलेक्ट्रॉल कॉलेज के 29 सदस्य चुने जाते हैं, इसलिए इसे निर्णायक राज्यों में एक माना जाता है। ऐसा ही एक बैटल ग्राउंड राज्य पेंसिल्वेनिया है, जहां से 20 सदस्य चुने जाते हैं और वहां भी ट्रंप की स्थिति सुधरने के संकेत मिले हैं।
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आयोवा से हालांकि इलेक्ट्रॉल कॉलेज के सिर्फ छह सदस्य चुने जाते हैं, लेकिन चुनाव विशेषज्ञों ने वहां से आए इस संकेत को अहम माना है कि वहां बिडेन को मिल रहा समर्थन उससे भी कम है, जितना चार साल पहले डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को मिला था। अगर सर्वे एजेंसी सेल्जर एंड कंपनी पोल्स का ये अंदाजा सही हुआ, तो उसका यह मतलब हो सकता है कि दूसरे बैटल ग्राउंड राज्यों में भी ट्रंप की स्थिति उतनी कमजोर ना हो, जैसा पहले के ओपिनियन पोल्स में बताया जा रहा था। इससे डेमोक्रेटिक पार्टी की चिंताएं बढ़ी हैं।
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इस बीच चुनाव नतीजों पर अपनी संभावित प्रतिक्रिया को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को संशय और बढ़ा दिया। उन्होंने इस बात से तो इंकार किया कि वे मतगणना पूरी होने के पहले अपनी जीत का एलान कर देंगे, लेकिन यह भी साफ किया कि उनकी रिपब्लिकन पार्टी चुनाव के दिन के बाद भी मतगणना जारी रखने को कानूनी चुनौती देगी। उन्होंने कहा कि मतदान के दिन के बाद भी मतपत्रों को इकट्ठा करना और राज्यों को उनकी गिनती करने की इजाजत देना एक भयानक सोच है।
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इस बार कोरोना महामारी के कारण नौ करोड़ से ज्यादा मतदाता चुनाव से पहले मतदान कर चुके हैँ। ऐसा उन्होंने डाक से अपना वोट भेज कर या चुनाव की तारीख से पहले मतदान के लिए बनाए गए ड्रॉप बॉक्स में मतपत्र डालकर किया है। संभावना यह है कि डाक से भेजे गए बहुत से वोट तीन नवंबर के बाद भी पहुंचते रहेंगे। डेमोक्रेटिक पार्टी इस बात पर जोर डाल रही है कि उन सभी वोटों की गिनती करने के बाद ही चुनाव नतीजों का एलान हो।
इसीलिए ये संभावना काफी समय से जताई जा रही है कि हर बार की तरह इस बार मतदान वाली रात में ही शायद नतीजा मालूम ना पड़े। जबकि रिपब्लिकन पार्टी डाक से आए वोटों की सख्त जांच कराने, उनकी वैधता को चुनौती देने और तीन नवंबर की रात तक ही सारी प्रक्रिया पूरी कराने की तैयारियों में जुटी है।
वह इस मामले को कोर्ट में भी ले गई है, हालांकि वहां उसे अभी तक कामयाबी नहीं मिली है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते फैसला दिया था कि पेंसिल्वेनिया और नॉर्थ कैरोलाइना राज्यों में जिन वोटों पर तीन नवंबर तक भेजे जाने की मुहर होगी और मतदान के दिन के बाद क्रमशः तीन और नौ दिन के अंदर जो वोट पहुंच जाएंगे, उनकी गिनती की जाएगी।
लेकिन विस्कोंसिन राज्य के हाई कोर्ट ने फैसला दिया है कि सिर्फ वो वोट ही गिने जाएंगे, जो तीन नवंबर तक पहुंच जाएंगे। अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में अलग चुनाव नियमों से कारण इस मामले में भी भ्रामक स्थिति है। इसीलिए इस बार चुनाव परिणाम और मतदान के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के व्यवहार और रुख को लेकर अटकलें बढ़ती चली गई हैं। ये आशंका जताई गई है कि ट्रंप बिना पूरी मतगणना के ही खुद को विजेता घोषित कर सकते हैं, जिससे देश अस्थिरता और उथल-पुथल में फंस सकता है।