US: ‘शांति-सद्भावना के लिए दोनों देशों के संबंध महत्वपूर्ण’, PM मोदी की यात्रा से पहले अमेरिकी सांसद का बयान
जॉर्जिया सांसद फर्ग्यूसन ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच वैश्विक स्तर पर रणनीतिक संबंध हैं। दोनों देशों के संबंधों की नींव लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानूनों के सम्मान पर आधारित है। 2022 में भारत ने आजादी के 75 साल पूरे किए।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दौरे पर जा रहे हैं। पीएम मोदी की आधिकारिक यात्रा से पहले जॉर्जिया सांसद ड्रू फर्ग्यूसन ने कहा कि भारत-अमेरिका के संबंध खास तौर से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सद्भावना और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने आधिकारिक यात्रा के लिए पीएम मोदी को आमंत्रित किया है। पीएम मोदी 21 से 25 जून तक अमेरिका के दौरे पर रहेंगे। यात्रा से पहले भारतीय राजदूत ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें कांग्रेसी फर्ग्यूसन ने अपने विचार व्यक्त किए।
जॉर्जिया सांसद फर्ग्यूसन ने वीडियो में आगे कहा कि अमेरिका और भारत के बीच वैश्विक स्तर पर रणनीतिक संबंध हैं। दोनों देशों के संबंधों की नींव लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानूनों के सम्मान पर आधारित है। 2022 में भारत ने आजादी के 75 साल पूरे किए और अमेरिका-भारत के संबंधों की वर्षगांठ मनाई। फर्ग्यूसन ने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारत-अमेरिका की साझेदारी में बढ़ोत्तरी हुई है। मुझे आशा है कि इस साझेदारी को बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद।
कुछ दिनों पहले भारतीय प्रवासियों ने जाहिर की थी खुशी
नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में नौ सालों में अमेरिका के तीन राष्ट्रपतियों से मुलाकात की है। इस बार पीएम को रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया गया है। पीएम मोदी दूसरी बार संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे। इससे पहले 2016 में पीएम मोदी ने कांग्रेस को संबोधित किया था। कुछ दिनों पहले, इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के संस्थापक जगदीप अहलूवालिया ने कहा था कि भारतीय प्रवासी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजकीय दौरे और अमेरिकी कांग्रेस में संयुक्त संबोधन के वजह से काफी रोमांचित हैं। यात्रा भारत में आर्थिक संबंधों और निवेश को मजबूत करने के साथ-साथ दोनों देशों के नेताओं के बीच दोस्ती मजबूत करेगी।
भारत कभी दबाव में नहीं आता
पद्मश्री विजेता काक ने कहा था कि राजकीय यात्रा के दौरान, भारत का ध्यान व्यापार पर रहेगा। भारत में टेक कंपनियों द्वारा निवेश की सुविधा होगी। अमेरिका चीन के कारण भारत को अपने पक्ष में करने के लिए समर्थन चाहता है। भारत का रुख हमेशा साफ रहता है, जिस तरह भारत ने रूस का विरोध किया न यूक्रेन के खिलाफ कोई बयान बाजी की। भारत ने रूस, अमेरिका सहित सभी देशों के दबाव से हटकर तीसरा रास्ता अपनाया और शांति स्थापित करने की कोशिश की।