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US Navy: क्या दक्षिण चीन सागर में कम हो रहा बीजिंग का दबदबा? अमेरिकी नौसेना कमांडर ने दी चेतावनी
Fri, 11 Jul 2025 09:03 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उझाला, मनीला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उझाला, मनीला।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 11 Jul 2025 09:03 PM IST
सार
US Navy: अमेरिकी नौसेना के कमांडर एडमिरल स्टीफन कोहलर ने कहा कि चीन दक्षिण चीन सागर में अपने पड़ोसी देशों को डराने में नाकाम रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी बीजिंग की आक्रामकता रोकने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। चीन की मनमानी के खिलाफ फिलीपींस समेत कई देशों ने समुद्री अधिकारों की रक्षा के लिए साहसिक रुख अपनाया है।
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दक्षिण चीन सागर (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
अमेरिकी नौसेना के प्रशांत क्षेत्र के बेड़े के कमांडर एडमिरल स्टीफन कोहलर ने कहा है कि चीन दक्षिण चीन सागर में अपने विरोधी पड़ोसी देशों को डराने और उनके समुद्री अधिकार छीनने में असफल रहा है। उन्होंने शुक्रवार को मनीला में एक सम्मेलन में कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश बीजिंग की आक्रामकता को रोकने के लिए और भी मजबूत कदम उठाने को तैयार हैं। कोहलर ने बताया कि चीन की रणनीति लगातार आक्रामक होती जा रही है, जिसमें जहाजों से टक्कर मारना, पानी की तेज धारें छोड़ना, लेजर का इस्तेमाल करना आदि शामिल है। लेकिन इन तरीकों के बावजूद चीन दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों को उनकी समुद्री संप्रभुता छोड़ने के लिए मजबूर नहीं कर सका।
उन्होंने कहा कि अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अमेरिकी नौसेना प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता को रोकने और जरूरत पड़ने पर संघर्ष में जीत हासिल करने के लिए तैयार है। कोहलर ने यह भी बताया कि इंडोनेशिया, मलयेशिया और वियतनाम जैसे देश अब भी अपने विशेष आर्थिक क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज और उत्पादन जारी रखे हुए हैं, जबकि चीन उन्हें रोकने की कोशिश कर रहा है।
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कोहलर ने फिलीपींस की भी तारीफ की, जिसने चीन की आक्रामक हरकतों को दुनिया के सामने लाकर साहस दिखाया है। इसमें चीन की ओर से पानी की तेज धार और लेजर किरणों के इस्तेमाल की घटनाएं भी शामिल हैं। कोहलर ने कहा कि फिलीपींस और अन्य देशों ने अपने समुद्री अधिकारों की रक्षा के लिए साहसिक रुख अपनाया है और अब लगभग सभी दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों ने अपनी समुद्री ताकत को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। सम्मेलन में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, यूरोपीय संघ, जापान और न्यूजीलैंड के राजनयिक भी मौजूद थे। यह सम्मेलन उस अंतरराष्ट्रीय फैसले के नौ साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था, जिसमें 2016 में चीन के दक्षिण चीन सागर पर लगभग पूरे दावे को खारिज कर दिया गया था। फिलीपींस 2013 में दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन के साथ चल रहे विवाद को अंतरराष्ट्रीय अदालत में ले गया था। हालांकि चीन ने फैसले को 'ढकोसला' बताते हुए खारिज कर दिया था।
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अमेरिका की फिलीपींस में राजदूत मैरीके कार्लसन ने कहा कि फिलीपींस के लिए वह फैसला एक जीत थी और यह दिखाता है कि कोई ताकतवर देश दूसरे देशों के अधिकारों को नहीं कुचल सकता। उन्होंने चीन पर आरोप लगाया कि वह अब भी उस फैसले को नजरअंदाज कर रहा है और जबरदस्ती, आक्रामकता और धोखेबाजी का सहारा ले रहा है। कार्लसन ने यह चेतावनी भी दोहराई कि 1951 की परस्पर रक्षा संधि के तहत अगर दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस पर हमला होता है, तो अमेरिका उसे अपनी सुरक्षा पर हमला मानेगा। चीन की मनमानी और फैसले से इनकार के चलते फिलीपींस ने अपने सैन्य ढांचे और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं।
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उन्होंने कहा कि अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अमेरिकी नौसेना प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता को रोकने और जरूरत पड़ने पर संघर्ष में जीत हासिल करने के लिए तैयार है। कोहलर ने यह भी बताया कि इंडोनेशिया, मलयेशिया और वियतनाम जैसे देश अब भी अपने विशेष आर्थिक क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज और उत्पादन जारी रखे हुए हैं, जबकि चीन उन्हें रोकने की कोशिश कर रहा है।
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कोहलर ने फिलीपींस की भी तारीफ की, जिसने चीन की आक्रामक हरकतों को दुनिया के सामने लाकर साहस दिखाया है। इसमें चीन की ओर से पानी की तेज धार और लेजर किरणों के इस्तेमाल की घटनाएं भी शामिल हैं। कोहलर ने कहा कि फिलीपींस और अन्य देशों ने अपने समुद्री अधिकारों की रक्षा के लिए साहसिक रुख अपनाया है और अब लगभग सभी दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों ने अपनी समुद्री ताकत को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। सम्मेलन में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, यूरोपीय संघ, जापान और न्यूजीलैंड के राजनयिक भी मौजूद थे। यह सम्मेलन उस अंतरराष्ट्रीय फैसले के नौ साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था, जिसमें 2016 में चीन के दक्षिण चीन सागर पर लगभग पूरे दावे को खारिज कर दिया गया था। फिलीपींस 2013 में दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन के साथ चल रहे विवाद को अंतरराष्ट्रीय अदालत में ले गया था। हालांकि चीन ने फैसले को 'ढकोसला' बताते हुए खारिज कर दिया था।
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अमेरिका की फिलीपींस में राजदूत मैरीके कार्लसन ने कहा कि फिलीपींस के लिए वह फैसला एक जीत थी और यह दिखाता है कि कोई ताकतवर देश दूसरे देशों के अधिकारों को नहीं कुचल सकता। उन्होंने चीन पर आरोप लगाया कि वह अब भी उस फैसले को नजरअंदाज कर रहा है और जबरदस्ती, आक्रामकता और धोखेबाजी का सहारा ले रहा है। कार्लसन ने यह चेतावनी भी दोहराई कि 1951 की परस्पर रक्षा संधि के तहत अगर दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस पर हमला होता है, तो अमेरिका उसे अपनी सुरक्षा पर हमला मानेगा। चीन की मनमानी और फैसले से इनकार के चलते फिलीपींस ने अपने सैन्य ढांचे और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं।