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ईरानी युद्धपोत IRIS डेना पर अमेरिकी हमला: एक नाविक ने अपने पिता को किया था फोन, चेतावनियों की दी थी जानकारी

Sun, 08 Mar 2026 06:33 PM IST
Shubham Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Shubham Kumar Updated Sun, 08 Mar 2026 06:33 PM IST
सार

भारतीय महासागर में चार मार्च को अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना को टॉरपीडो से डुबो दिया। इस हमले में 87 नाविक मारे गए। इस मामले में अब एक बड़ा दावा सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी चेतावनियों के बाद और हमले से कुछ मिनट पहले एक नाविक ने पिता को फोन कर बताया कि अमेरिकी बलों ने जहाज खाली करने को कहा।

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US attack on Iranian warship IRIS Dena A sailor called his father informing him of the warnings
जहाज पर हमला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार है जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने दुश्मन के जहाज को डुबोया। अमेरिकी युद्ध विभाग ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आईआरआईएस डेना ने कुछ दिन पहले ही विशाखापत्तनम में अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू और मिलान 2026 बहुदेशीय अभ्यास में हिस्सा लिया था। स्वदेश वापसी के दौरान भारत के समुद्री इलाके में एक अंडरवाटर हंटर ने उसे निशाना बनाकर डुबो दिया। परमाणु क्षमता वाली हमलावर सबमरीन यही करती है।

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इस बात को ऐसे समझिए कि भारतीय महासागर में 4 मार्च को ईरानी नौसेना के युद्धपोत आईआरआईएस डेना को अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से मार गिराया। हमले में कम से कम 87 नाविकों की मौत हो गई, जबकि करीब 32 नाविक अपने दम पर लाइफबोट तक पहुंचकर जिंदा बच गए। इस युद्धपोत में कुल लगभग 180 नाविकों की टीम थी। अमेरिका का यह हमला दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। 
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नाविक ने अपने पिता को किया था फोन?

जारी सवाल जवाब के दौर के बीच अब एक बड़ा दावा सामने आ रहा है। खबरों के अनुसार, हमला होने से कुछ मिनट पहले, एक नाविक ने अपने पिता को फोन किया और बताया कि अमेरिकी बलों ने दो बार जहाज खाली करने का आदेश दिया। बावजूद इसके, जहाज के कमांडर ने नाविकों को बचने का आदेश नहीं दिया। कई नाविक कमांडर से बहस कर खुद जीवनरक्षक नाव तक पहुंचे और जिनकी जीवित वापसी हुई, उनमें ज्यादातर वही लोग थे जिन्होंने आदेश न मानकर खुद लाइफबोट तक पहुंचे।


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कुल मिलाकर इस हमले ने यह भी दिखाया कि संघर्ष अब खाड़ी से बहुत दूर तक फैल चुका है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि जहाज ईरान से 3,000 किलोमीटर से अधिक दूर था और हमला होने से कुछ दिन पहले ही यह भारतीय नौसेना का अतिथि था और MILAN 2026 बहुपक्षीय अभ्यास में हिस्सा ले रहा था।

मौके पर पहुंची थी श्रीलंकाई नौसेन
गौरतलब है कि इस हमले के बाद जब दुनियाभर में बातचीत तेज हुई, तब श्रीलंका की नौसेना आपातकालीन कॉल पर वहां पहुंची। हालांकि नौसेना ने हमले के स्थान पर जहाज नहीं पाया, केवल तेल का धब्बा, खाली जीवनरक्षक नावें और पानी में तैरते नाविक मिले। यह हमला पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संबंधों में नई गंभीरता को दर्शाता है।

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