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क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बीच छिड़ी है कड़ी होड़

Mon, 15 Mar 2021 06:47 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 15 Mar 2021 06:47 PM IST
सार

चीन ने 2016 में दुनिया का पहला क्वांटम साइंस सैटेलाइट-मिसियस को लॉन्च किया। 2018 में अमेरिकी थिंक टैंक द सेंटर फॉर अ न्यू अमेरिकन सिक्युरिटी ने एक रिपोर्ट में कहा कि ये साफ है कि चीन अब क्वांटम क्रांति का अगुआ बनना चाहता है...

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US and China are focusing now on Quantum Computing, china ahead in race
क्वांटम कंप्यूटिंग - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अमेरिका और चीन में फिलहाल जारी चर्चाओं का संकेत है कि टेक्नोलॉजी को लेकर दोनों देशों की होड़ अब एक नए स्तर पर में पहुंच गई है। अब ध्यान का केंद्र क्वांटम टेक्नोलॉजी है। जानकारों के मुताबिक इस तकनीक का असर मध्यम और दीर्घ काल में आर्थिक प्रतिस्पर्धा क्षमता पर पड़ेगा। मशहूर ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स से जुड़ी वेबसाइट निक्कई एशिया में छपे एक विश्लेषण के मुताबिक अमेरिका परंपरागत रूप से विभिन्न प्रकार की तकनीकों में सबसे आगे रहा। लेकिन क्वांटम तकनीक के मामले में चीन ने उससे बढ़त ले ली है। इस विश्लेषण के मुताबिक अब चीन का मुकाबला करने के लिए यह जरूरी है कि अमेरिका जापान जैसे अपने सहयोगी देशों को साथ लेकर जरूरी कोशिश करे।

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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने बीते तीन मार्च को अपनी अंतरिम राष्ट्रीय सुरक्षा निर्देशिका जारी की। उसमें कहा गया कि अमेरिका को वैज्ञानिक और तकनीकी बढ़त हासिल करने के लिए फिर से निवेश करना होगा और फिर से उसे दुनिया का नेतृत्व करना होगा। इसके लिए अपने सहयोगी देशों के साथ मिल कर उसे नए नियम और कायदे बनाने होंगे। निर्देशिका में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था, सेना और रोजगार की स्थिति पर क्वांटम कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों का व्यापक असर होगा।
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बीते पांच मार्च को चीन ने एलान किया कि अगली पंचवर्षीय योजना में वह रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर औसतन हर साल सात फीसदी खर्च बढ़ाएगा। उसने कहा कि क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर इसके लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र होंगे। क्वांटम तकनीक अगली पीढ़ी के कंप्यूटरों में इस्तेमाल होगा। बताया जाता है कि इससे औद्योगिक चीजों और दवाओं के विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग के लिहाज से क्रांतिकारी बदलाव आ जाएगा। ये तकनीक इंटरनेट के इंस्क्रिप्शन को ब्रेक करने में भी सक्षम होगी। यानी इसके जरिए दूसरे दशों के इंटरनेट संवाद के गुप्त संकेतों (कोड) को पढ़ा जा सकेगा।
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वैल्यूनेक्स नामक एजेंसी के क्वांटम तकनीक संबंधी पेटेंट के विश्लेषण से जाहिर हुआ है कि अमेरिकी कंपनियों के बीच इस क्षेत्र में सबसे आगे आईबीएम है। उसने क्वांटम कंप्यूटर हार्डवेयर के 140 पेटेंट हासिल किए हैं। उसके बाद माइक्रोसॉफ्ट का नंबर है, जिसके पास 81 पेटेंट हैं। 65 पेटेंट के साथ गूगल तीसरे नंबर पर है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी में भी अमेरिका की बढ़त बनी हुई है। सभी कंपनियों के बीच दुनिया में हुवावे दूसरे नंबर पर है, जिसके पास 100 पेटेंट हैं। बीजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ पोस्ट्स एंड टेलीकम्युनिकेशन्स के पास 84 पेटेंट हैं। सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भी कई चीनी कंपनियों ने पेटेंट हासिल कर लिए हैं।

लेकिन जहां तक क्वांटम कम्यूनिकेशन और क्रिप्टोग्राफी तकनीकों का सवाल है, दुनिया में सबसे आगे चीन है। इस क्षेत्र में चीन के पास तीन हजार पेटेंट हैं, जो अमेरिकी कंपनियों के पेटेंट की संख्या से लगभग दो गुना ज्यादा है। बताया जाता है कि 2013 में एडवर्ड स्नोडेन ने जैसे खुलासे किए, उसके बाद चीन ने क्वांटम कम्यूनिकेशन और क्रिप्टोग्राफी पर ज्यादा ध्यान दिया। स्नोडेन सीआईए के कॉन्ट्रैक्टर थे, जिन्होंने अमेरिका की खुफिया सूचनाओं को सार्वजनिक कर दिया था।

चीन ने 2016 में दुनिया का पहला क्वांटम साइंस सैटेलाइट-मिसियस को लॉन्च किया। 2018 में अमेरिकी थिंक टैंक द सेंटर फॉर अ न्यू अमेरिकन सिक्युरिटी ने एक रिपोर्ट में कहा कि ये साफ है कि चीन अब क्वांटम क्रांति का अगुआ बनना चाहता है। जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इनफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशंस के फेलॉ मसाहिडे ससाकी ने निक्कई एशिया से कहा- जिन युवा चीनी अनुसंधानकर्ताओं ने पश्चिमी देशों में शिक्षा हासिल की, उन्होंने देश लौट कर ऐसा योगदान किया, जिससे चीन ने क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में ‘विस्फोटक प्रगति’ हासिल की है।


अमेरिका अब चीन का पीछा करने की कोशिश कर रहा है। 2018 के बाद से उसने इस क्षेत्र में निवेश को तीना गुना करने की योजना लागू की है। अमेरिकी सरकार अब क्वांटम इंटरनेट विकसित करने में जुटी है। यह अगली पीढ़ी का इंटरनेट होगा। उधर चीन ने पिछले जनवरी में एलान किया कि उसने 4,600 किलोमीटर का क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क बना लिया है। ये नेटवर्क उपग्रहों को धरती स्थित स्थलों से प्रभावी ढंग से जोड़ने में सक्षम है। अब जापान भी इस दिशा में निवेश बढ़ाने में जुटा है। जापानी कंपनियों ने कहा है कि वे इस क्षेत्र में अमेरिका से सहयोग के लिए तैयार हैं।

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