फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   unus’s key adviser asks India to acknowledge 'Jul-Aug uprising' in Bangladesh

Bangladesh: 'बांग्लादेश के जुलाई-अगस्त विद्रोह को मान्यता दें...', यूनुस के प्रमुख सलाहकार का भारत से आग्रह

Wed, 04 Dec 2024 04:18 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 04 Dec 2024 04:18 PM IST
सार

Bangladesh: अंतरिम सरकार के एक प्रमुख नेता महफूज आलम ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत ने जुलाई-अगस्त विद्रोह को आतंकवाद, हिंदू विरोधी के रूप में पेश करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भारत को 75 बाद की वास्तविकता को समझना चाहिए। 

विज्ञापन
unus’s key adviser asks India to acknowledge 'Jul-Aug uprising' in Bangladesh
बांग्लादेश में आरक्षण के मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन (फाइल) - फोटो : एएनआई / रॉयटर्स

विस्तार

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के एक करीबी सहयोगी ने बुधवार को भारत से आग्रह किया कि वह जुलाई और अगस्त के बीच हुए विद्रोह को आधिकारिक रूप से मान्यता दे। इस विद्रोह के कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ था। उन्होंने कहा कि अगर भारत इस विद्रोह को मान्यता देगा तो दोनों देशों के बीच संबंधों की शुरुआत एक नए तरीके से हो सकती है। 

विज्ञापन


'75 साल बाद की वास्तविकताओं को समझे भारत' 
महफूज आलम अंतरिम सरकार के एक अहम नेता और बांग्लादेश के भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के प्रमुख सदस्य हैं। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा कि भारत ने इस विद्रोह को आतंकवाद, हिंदू विरोधी और इस्लामी विद्रोह के रूप में पेश करने की कोशिश की। आलम ने भारत से आग्रह किया कि वह 75 साल बाद की बांग्लादेश की वास्तविकताओं को समझे। उन्होंने कहा, यह (विद्रोह को मान्यता देना) पहला कदम होना चाहिए। इस विद्रोह को नजरअंदाज करना बांग्लादेश की नींव के लिए नुकसानदेह होगा और दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक असर डालेगा। 
विज्ञापन


नौकरी में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ था आंदोलन
आलम के संगठन ने जुलाई के मध्य में हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किए थे। यह विरोध प्रदर्शन सरकारी नौकरी में एक खास वर्ग को आरक्षण के मुद्दे पर हुए थे। जिसके कारण हसीना को प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा। आंदोलन के हिंसक होने के बाद हसीना पांच अगस्त को भारत आ गईं। इसके तीन दिन बाद नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाया गया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

'लंबे समय तक जारी रहेगा लोकतांत्रिक संघर्ष'
उन्होंने आगे कहा कि भारत का यह विचार गलत है कि विद्रोह केवल एक सांप्रदायिक आंदोलन था। उन्होंने कहा कि भारत को अब 1975 के कालक्रम से बाहर निकलकर बांग्लादेश की नई राजनीतिक स्थिति को समझने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि यह एक लोकतांत्रिक संघर्ष है, जो लंबे समय तक जारी रहेगा। उनके मुताबिक, यह बांग्लादेश में एक ऐतिहासिक बदलाव का समय है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष है। 

संबंधित वीडियो-
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed