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अफगानिस्तान: शिया मस्जिद में धमाके की यूएनएससी ने की निंदा, कहा- आतंक के आकाओं को न्याय के कटघरे में खड़ा करने का वक्त
Sun, 10 Oct 2021 09:35 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sun, 10 Oct 2021 09:35 AM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कहा कि आतंक का उद्देश्य कुछ भी हो, हमला कहीं पर भी किया गया हो। इसे न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। आतंक के आकांओं को न्याय के कटघरे में खड़ा करने की आवश्यकता है।
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अफगानिस्तान के कुंदुज शहर में स्थित शिया मस्जिद में हुआ धमाका।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
अफगानिस्तान की एक शिया मस्जिद में हुए बम धमाके की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कड़ी निंदा की है। सुरक्षा परिषद ने कहा है कि आतंक के आकाओं को न्याय के कटघरे में खड़ा करने की आवश्यकता है। यह हमला आठ अक्तूबर को कुंदुज प्रांत की शिया मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान हुआ था। इसमें 50 से अधिक लोग मारे गए थे और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन आईएस-के ने ली थी।
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हमले में मारे गए लोगों के प्रति सहानुभूति जताते हुए सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने कहा कि, अफगानिस्तान में हुआ हमला एक कायरतापूर्ण कृत्य है। सदस्यों ने कहा- आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए शांति व सुरक्षा का मुद्दा बन गया है। सुरक्षा परिषद ने आतंकवाद के आकाओं, इनके फाइनेंसरों को पकड़ने की आवश्यकता व्यक्त की।
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इससे पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कहा कि आतंक का उद्देश, उसकी प्रेरणा कुछ भी हो, लेकिन यह आपराधिक प्रवृत्ति है और अन्यायपूर्ण कृत्य है। यूरोपियन यूनियन एक्सटर्नल एक्शन सर्विस (ईईएएस) ने भी कहा था कि अफगान नागरिकों के अधिकारों, उनके जीवन, धार्मिक व जातीय अधिकारों का सभी को सम्मान करना चाहिए।
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इसलिए हुआ था हमला
घटना की जिम्मेदारी लेते हुए आईएस-के से जुड़ी आमाक संवाद एजेंसी ने हमलावर की पहचान एक उइगर मुस्लिम के रूप में की थी और दावा किया था कि इस हमले का निशाना शिया समुदाय और तालिबान दोनों थे क्योंकि चीन के दबाव में तालिबान उइगर मुस्लिमों को बाहर निकाल रहा है। अमेरिकी और नाटो सेनाओं के लौटने के बाद से आईएस लगातार तालिबान के शासन को चुनौती देने के साथ अल्पसंख्यक शिया समुदाय और धर्मस्थलों को निशाना बना रहा है।