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झटका : ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रस्ताव का यूएनएससी में विरोध
Sun, 23 Aug 2020 01:47 AM IST
Jeet Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 23 Aug 2020 01:47 AM IST
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unsc(file photo)
- फोटो : पीटीआई
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ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगवाने की अमेरिकी मुहिम को बड़ा झटका लगा है। 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के 13 सदस्य देशों ने अमेरिकी कोशिशों का विरोध किया है। इसके बाद अमेरिका इस मुहिम में अकेला पड़ता दिख रहा है। फ्रांस, ब्रिटेन व जर्मनी ने इस मुद्दे पर उसका साथ देने से इनकार कर दिया है। जबकि रूस-चीन पहले ही इस तरह के प्रतिबंधों के खिलाफ हैं।
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ईरान पर अमेरिकी कोशिशों का विरोध करने वाले देशों ने कहा है कि वाशिंगटन का इसलिए व्यर्थ है क्योंकि वह एक ऐसी प्रक्रिया का विरोध कर रहा है जिस पर परमाणु समझौते के तहत सहमति जताई गई थी।
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जबकि अमेरिका इस समझौते से दो साल पहले ही बाहर निकल चुका है। रूस, वियतनाम, नाइजर, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, एस्टोनिया और ट्यूनीशिया ने पहले ही अमेरिका के विरोध में पत्र लिखे हैं।
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उधर, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि 24 घंटे में उन्होंने ईरान पर यूएन के प्रतिबंधों को वापस लगाने के लिए के लिए 30 दिन की उलटी गिनती शुरू कर दी है। पोम्पियो ने रूस और चीन को चेतावनी दी कि यदि वे ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के उपायों का विरोध करने से इनकार करते हैं तो उनपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अमेरिका को हैरानी, प्रस्ताव गिरने का खतरा
अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर ईरान पर फिर से वैश्विक प्रतिबंध लगाने की मांग इसलिए की क्योंकि जिस तरह से ईरान के रिश्ते चीन और रूस के साथ बढ़ रहे हैं, उनसे खतरा पैदा हो गया है कि वह दोनों देशों से घातक हथियार लेकर उन मिलीशिया तक पहुंचाना शुरू कर देगा, जो उसके इशारे पर दुनिया के कई इलाकों में लड़ रही हैं। अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों (ब्रिटेन, फ्रांस व जर्मनी) के रुख पर हैरानी जताई है, क्योंकि इनमें से ब्रिटेन और फ्रांस सुरक्षा परिषद के सदस्य भी हैं। दोनों देशों के इस रुख से सुरक्षा परिषद में अब अमेरिका के प्रस्ताव के गिरने का खतरा पैदा हो गया है।
अमेरिका को प्रतिबंध बहाली का हक नहीं : ईरान
ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने कहा कि अमेरिका के पास इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ साल 2015 के पहले के सभी प्रतिबंधों को बहाल करने का कोई अधिकार नहीं है। जरीफ ने सुरक्षा परिषद के चेयरमैन को लिखे पत्र में यह बात कही। उन्होंने लिखा कि परिषद अमेरिका को एकतरफा और गैरकानूनी रूप से डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन मेकैनिज्म का दुरुपयोग करने से रोके।